Monday, December 8, 2008

दलों के लिये आंखे खोलने वाला है यह परिणाम







( कुमार आलोक said... ) मुंबइ में आतंकी हमले के बाद मेरे एक पत्रकार मित्र ने दिल्ली से फोन किया मैं उस समय पटना में था । कांग्रेस निपट गइ भइया ..चारो स्टेट में बीजीपी को क्लीयर मैंडेट मिल गया । मेरा दोस्त बडे चैनल में है । हमें लगा कि सचमुच कांग्रेस के लिये यह कांड वाटरलू साबित हो गया । कुछ देर बाद मैं एक दोस्त के दूकान पर गया ..हमसे सीनियर है पेंट और लोहा लक्कट की छोटी दूकान चलाते है । मैने कहा भइया कांग्रेस निपट गइ दिल्ली से फोन आया है । उन्होने कहा कैसे । मैने बोला आतंक की जो घटना हुइ है मुंबइ में पव्लिक उसी के चलते काग्रेस के खिलाफ वोट देगा ।ज्यादा पढे लिखे नही है भइया बोले बाबू चुनाव में यह मुद्दा ही नही रहेगा ..लोगों के अपने स्थानिय मुद्दे होते है । यहां तो कांग्रेस के राज में होटल में आतंकी घटना हुइ ..उनके राज में तो संसद में ही आतंकी घुस गये थे । खैर ८ तारिख को पता चलेगा कि मेरे भाइ साहब सही थे चा फिर मेरा पत्रकार दोस्त ।
December 6, 2008 7:36 PM)
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मैनें यह कमेंट रविश कुमार जी के व्लाग पर ६ दिसंबर को लिखा था । अब जबकि चुनाव परिणाम सामने है ..तो यह कहा जा सकता है कि देश का आम आदमी हम तथाकथित बुद्धीजीवियों से बेहतर पालिटिकल नालेज रखता है । पांचों राज्यों के चुनाव परिणाम ने यह साबित किया कि अगर कहीं गुड गर्वँनेंस है तो मतदाता उसको दुबारा सत्ता की सीढी पर आसानी से चढा देगा । बीजीपी ने आतंकवाद को मुद्दा बनाया , इंटरनल सिक्यूरीटी ...और पोटा जैसे मुद्दे शायद जनता के गले नही उतरे । दिल्ली में इस भरोसे पर रहे कि बीएसपी कांग्रेस का बैंड बजा देगी जिसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा यह भी आकलन गलत साबित हुआ ...और इसका उल्टा असर यह हुआ कि अल्पसंख्यक समुदाय पूरी गोलबंदी के साथ बीजेपी के खिलाफ हो गया । दिल्ली चुनाव के रोज जिस तरह के विग्यापन अखबारों में छपे कि आतंक की सरकार को वोट मत दें शायद वोटरों का टर्नआउट शीला जी के लिये सहानुभूती का सबब बन गया । खैर ये तो दिल्ली की बात हुइ । अगर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ की बात करें तो यह जीत बीजेपी के लिये ऐतेहासिक ही नही बल्कि यादगार है । अजीत जोगी जो स्वंयभू मुख्यमंत्री बनकर रमन सिंह को लबरा राजा का खिताब दे रहे थे ..जनता ने बता दिया कि लबरा यानि झूठा कौन है ? अजीत जोगी , श्यामाचरण शुक्ल और महेंद्र करमा एक दूसरे खो फूटी आंख नही देखना चाहते । रमन सिंह ने बडे पैमाने पर निवर्तमान विधायकों के टिकट काटकर युवाओं को मौका दिया ..लेकिन कांग्रेस यह हिम्मत नही दिखा पाइ । चुनाव परिणामों ने रमन सिं को बडा नेता बना दिया है । रही बात मध्यप्रदेश की रही वहां भी कांग्रेस खेमों में बंटी रही और शिवराज सिंह के कद में कोइ भी कांग्रेसी टिक नही पाया । शिवराज ने अपने कार्यकाल में बोला कम और किया ज्यादा .. मध्यप्रदेश के एक बडे कांग्रेसी नेता ने हमें बताया कि शिवराज सिंह व्यक्तिगत रुप से इमानदार है भले ही उनके मंत्रीमंडलीय सहयोगी भ्रष्ट ।लेकिन जनता ने इमानदार कप्तान पर पूर्ण भरोसा किया । रहीं बात राजस्थान की अगर वहां भी कांग्रेसी गुटों में नही बंटे रहते तो परिणाम कुछ और होता । एक बात इस चुनाव परिणाम से और उभकर सामने आइ कि मोदी अगर कद्दावर हाल में कद्दावर नेता बनकर उभरे है सिर्फ इस बिना पर कि गुजरात में लगातार तीसरी बार अपने दम पर भाजपा को उन्होने सत्ता में वापस लाया है तो कल के लिये शिवराज सिंह और रमन सिंह भी पार्टी के स्टार कंपेनर हो सकते है । और बात करें मिजोरम की तो वहां एंटी इंकंबेन्सी के फैक्टर ने कांग्रेस को शानदार जीत दिलवाइ । अंत में यह कहा जा सकता है कि कि बढिया काम करोगे जनता के नजदीक रहोगे तो इनाम अवश्य मिलेगा ..हाल के वर्षों में जो ट्रेन्ड रहा है चुनाव परिणामों का हालिया चुनावों में बदला है । तवक्कों की जानी चाहिये की राजनीति में अच्छे और पढे लोग जो सेवा की भावना को लेकर राजनीति की चौखट पर आये है उन्हें जनता सर आंखो पर बिठाएगी ।

2 comments:

परेश टोकेकर 'कबीरा' said...

आलोक भाई वाकई ये चुनाव प्रमुख दलो के लिये आखे खोलने वाला है। मिजोरम को छोड दिया जाये तो चारों राज्यो में हाथी सीधी चाल चलते चलते बहुत आगे बढा है। एम पी राजस्थान में भले ही हाथी ने ज्यादा सीटे हासिल नहीं की लेकिन जिस तरह की चुनौती उसने कांग्रेस बीजेपी के सामने पेश की वो हिन्दी भाषी राज्यो में आम चुनावो के दौरान दोनो कमबख्तो के होश उडाने के लिये काफी है। उधर राजस्थान में हसिया हथौडा सितारे ने भी बढिया फसल काटी, अस्सल सर्वहारा पेमाराम की धौंद से जीत महत्वपूर्ण है।

राम एन कुमार said...

आलोक भाई,,आपके कमेन्ट ब्लोग्स पर पढता रहता हूँ...आपके साथ जो चुनाव परिणाम को लेकर ऊहापोह था, वही हमारे साथ था...हम अपने कांग्रेसी मित्रो को कहे की धीरज रखिये, लेकिन हमारे कांग्रेस के मित्र बहुत उदास थे आतंक की काली रात के बाद...लेकिन चुनाव परिणाम के बाद सबकी बाछे खिल गई.....
हाथी आगे बढ़ी है और अगर उत्तर प्रदेश का जातिगत समीकरण हर जगह बिठा पाई तो भारतीय राजनीती में उनकी पूछ बढ़ जायेगी...