Saturday, April 12, 2008

कलम आज उनकी जय बोल


देश में लोग महंगाइ और मुद्रास्फ़ीती के मकड्जाल में उलझे हुए है। मध्यप्रदेश की सरकार ने कितना बडा क्रांतीकारी फ़ैसला लिया उसे मीडीया ने तवज़्ज़ो ही नही दी। मीडीया को तो चाहिए राखी , राजु और शिल्पा । तथाकथित धर्मनिरपेक्श लोगों को भी नरेंद्र मोदी को गाली देने के अलावा कुछ नही सुझता।
देश कभी का हिंदू राष्ट्र बन गया होता ...हम लोग भी गर्व से कहते जय श्रीराम.... मध्यप्रदेश की सरकार ने २००८-०९ के राज्य बजट में आम लोगों के लिये क्या क्या नही किया । १६ वस्तुओं को बिल्कुल टैक्स फ़्री कर दिया । जिन वस्तुओं को टैक्स- फ़्री किया गया उनमें क्रपान , हाथ का कडा, प्रसाद , भोग या महाभोग , धार्मिक चित्र, कपूर , गौमूत्र और उससे बने सभी उत्पाद , सत्तु -पंजीरी, मुरमुरा, बताशा, एवं मिश्री इत्यादी शामील है। एक धर्मनिरपेक्श देश में एक समुदाय विशेष के प्रति आग्रह दिखाने का साहस हिंदू सम्राट मोदीजी भी नही दिखा सके। राज्य सरकार की उदारता को देखकर दानवीर कर्ण भी शर्मा जाये। यही नही राज्य सरकार ने अपने पूर्व के बज़ट में भी जनेउ - , पूजा की धूपबत्ती पूजा में काम आनेवाली रस्सी और कलावे के धागे को पहली ही टैक्स फ़्री कर दिया था। राज्य के दयालु मुख्यमंत्री ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए राज्य सरकार के सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस की शाखाओं मे जाने की विधीवत छूट दे रखी है। इससे दो फ़ायदे होंगे एक तो कर्मचारियों में अनुशासन का समावेश होगा दूसरी तरफ़ आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लोककल्यान कारी महाराज शिवराज सरकार की वापसी कैसे होगी इसकी भी ट्रैनिंग हो जायेगी। दुख होता है कि ऐसे लोककल्यान्कारी फ़ैसले ना तो राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खी बनते है ना ही पढे लिखे लोगों के बीच बहस का मुद्दा।