Wednesday, July 2, 2008

१२३ एग्रीमेंट



आजकल १२३ करार सियासी गलियों में चर्चा का विषय बना है । मानलिजीये कांग्रेस , भाजपा , वामपंथी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नुमांइदे साथ साथ खडे हो और पैरोडी में सवाल जबाब करने हों तो कैसे कहेंगे।


( काग्रेस सरकार की ओर से पहला बयान आता है )


करुंगा करार चाहे करले तकरार


गिर जाए सरकार इसकी नही परवाह ।।


(लेफ्ट गुस्से से लाल होकर कांग्रेस से कहता है )


करोगे करार तो होगा यूपीए दो फाड


मजा आएगा तुम्हें जब करेंगे दहाड।।


( भला बीजेपी वाम पार्टियों को कहां छोडने वाली थी )


भौंकोगे जरुर लेकिन काटोगे नही ।


सत्ता सुख का मोह कभी त्यागो गे नही ।।


(और अंत में अमर सिह जी को भी बोलना पडा २४ अकबर रोड के सामने जाकर)


बरबादियों की अलग दास्ता हूं ॥


माया के डर से तेरे दर पे खडा हूं।।



14 comments:

Udan Tashtari said...

हा हा!! बहुत सही.

परेश टोकेकर said...

बहुत सही भाई आलोक,
आपकी पैरोडी कुछ अधुरी है उसे पुरा किये देते है।

(23 जून को शीर्षस्त वरिष्ठ आणविक वैज्ञानिक बयान देते है)
मत करो करार इस धुन में है धोखे हजार।
अरे कमबख्तो हमारी न सही लेफ्ट की सुन लो बात।।

(अब बारी प्रधानमंत्री की -)
हम कहते-सुनते नहीं करते है, सौदागर है बढिया सौदा करते है।
मुलायम को अपनी बोतल उतार, खुद बुश की बोतल में तरते है।।

'कबीरा' भगतसिंह नहीं, जयचंद-मीरजाफरों की ही बोतली है तूती।
करार भी रहे सरकार भी, इसे ही तो कहते है राजनिती।।

कुमार आलोक said...

परेश भाइ आप की साहित्यिक भाषा के सामने मेरी पैरोडी स्तरहीन हो गई है ...बहुत सुन्दर लिखा है ....

परेश टोकेकर said...

कुमार भाई अंदर की बात बताता हू मैं कोई साहित्यिक वाहित्यिक भाषा नहीं जानता, बस अपना कार्य ईमानदारी से करने की कोशिश करता रहता है। आप लोग जिस क्षेत्र में काम कर रहे है वहा पग-पग पर अनचाहे करार करने पडते है, इन विपरीत परिस्थितीयो में काम करते रहना बहुत कठिन है। इसपर ब्लागिंग, ये भी जोखीम भरा है, जरा संभल कर।
जरा दिल्ली का हाल बताये, आखिर हमारे आदरणीय जयचंदो ने कितने में डील की है। भाई अमर-प्रणव की निजी वार्तालाप के अंदाज पर हम तो फिदा हो गये है। उन्हीं की तर्ज पर अपनी निजी बातो को ईमेल कर देवे तो भी चलेगा।

दिलीप मंडल said...

विडंबना वाले इस समय में व्यंग और पैरोडी और हास्य की भाषा में ही संवाद मुमकिन है। बहुत बढ़िया।

कुमार आलोक said...

मंडल सर आपकी टिप्पनी को पढकर आगे मुझे और हौसला मिलेगा कुछ नया कर गुजरने का ..बहुत बहुत धन्यवाद..

CNEB said...
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anil said...

करार के ऊपर बेकरारी से हर ब्लॉग पर टिप्पणी देने वाले आलोक करार के बारे में कुछ पता है भी या नही या बरसाती मेंढक की तरह हर जगह करार पर बहस होते देख तुमने भी यही धुन छेड़ दी है ....पहले करार की एबीसीडी तो कहीं से पढ लो ....और हाँ ये मिसगाइडेड मिसाइल की तरह हर ब्लॉग पर भटकते ही रहते हो या कुछ काम भी करते हो अगर न करते हो कुछ जुगाड़ कर दूँ ....खुदा कसम बहुत बड़े फोकटिये

anil said...

सिर्फ तुकबंदी के लिए ही बेसरपैर की तुकबंदी करने वाले आलोक जरा कुछ अक्ल लगाकर तुकबंदी किया करो ....अमर सिंह 24 अकबर रोड पर माया के डर से नही दरबार लगाया है वो अपने कारपोरेट जगत के साथियों अनिल अंबानी औऱ सहारा की दलाली में जयचन्द बना हुआ है....क्या यार कुछ तो अपनी समझदानी का प्रयोग किया करो या समझदानी में ही छेद है ....

बड़े - बड़े लोगों को ब्लॉग खोलते देखकर तुमने भी ब्लॉग बना लिया ....सिर्फ ब्लॉग बना लेने से ही हर आँवला ,झन्डू च्यवनप्राश नही हो जाता पहले कुछ पढो लिखो औऱ दूसरों से सीखो ....अधकचरे ज्ञान से अपनी खिल्ली मत उड़वाओ....बुरा मत मानना इसे एक शुभचिंतक की सलाह मानो ....और बुरा मान भी गये तो क्या ....

anil said...

छोटे से गांव मसौढी से अपने जीवन सफ़र को शुरु करके राजधानी दिल्ली की भीड में अपने वजूद की तलाश में हू.


चाटुकारिता के दम पर ....अब समझ में आया कि क्यों तुम हर ब्लॉग पर हर किसी की चाटुकारिता करते हो....सिर्फ चाटुकारिता करने से कामयाबी नही हासिल होती ....लेकिन तुम जैसे लोग चाटुकारिता के दम पर ही आगे बढना चाहता हो....तो सोहराते रहो हो सकता है कि कोई रहम खा जाए....

कुमार आलोक said...

अनिल जी महान है आप ..आपकी महानता की मैं दाद देता हूँ ..लेकिन जरुरत पड भी गइ फिर भी आप के पास मैं नही आउंगा इसके लिये निश्चिंत रहे..और हां किसी बहस को वैचारिक स्तर तक ही रहने दे तो बेहतर होगा फलक को सीमित करने का प्रयास ना करें।

परेश टोकेकर said...

अनिल भाई लगता है आप करार के बारे में बहुत कुछ जानते हो, फोकटीया भी हो आैर जुगाडू भी इसिलिये यहा वहा घुमते फिरते हो, सब जानते हो कौन कहा की दारू पीता है, जयचंदो के भी संपर्क में हो, डील के विरोध से कैसे कमाया जा सकता है यार कुछ हमें भी बताआे? हम भी सिख ले आपसे कुछ काम की बात। आलोक की छोडो, क्या जुगाड करवा सकते हो इस माकपा काडर की जरा ये तो बताना। आप इन वामपंथियो के बारे में कुछ जानते नहीं हो जरा दो चार दिन हमारे साथ बिता कर देखना सब समझ में आ जायेंगा। माफ किजीये आपके गरियाने से घबराकर हम वामपंथियो के पंक्ष में आवाज बुलंद करना बंद नही करने वाले।
भाई ये तो अपना अपना शौक है हम पैरोडी करते है आप उसपर कपडे फाडते हो? सारी भडास निकाल ली हो तो कभी विस्तार से तार्किक बहस करना। बुरा मत मानना किसी के बुरा मानने से आपको भले ही कोई फरक न पडता हो हमें तो पडता है। आपके शुभचिंतक है इसलिये कह रहे है कि इतना र्फस्ट्राना सेहत के लिये ठीक नहीं है।

anil said...

कबीरा भाई अगर मेरी कोई बात आपको बुरी लगी हो तो उसके लिए माफ करना वैसे मुझे नही लगता मैने अभी तक कभी भी आपके खिलाफ कोई गलत टिप्पणी करी हो ....फिर भी आपने मुझपर अपनी भड़ास निकाली उसके लिए शुक्रिया ....लेकिन आलोक का प्रवक्ता बनने से पहले आप को आलोक द्वारा मुझ पर की गई टिप्पणियों का संज्ञान लेना चाहिए ....और हाँ जिस तरह वामपंथियों को ये गलत फहमी है कि करार के बारे में सिर्फ वो ही जानते है उसी तरह आलोक और आप दोनो गुरु चेलों को भी यही गलतफहमी है....दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख जानते हैं कौन होता है वो अपने आप को सबसे ज्यादा बुद्धिमान मानता है....और रही बात करार के मसौदे को जानने समझने की तो उसके लिए मुझे आप दोनो से किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नही है....पिछले एक साल से लेफ्ट बीट पर ही काम कर रहा हूँ....

कुमार आलोक said...

यार क्यूं मेरे पीछे पड गये हो ..लेफ्‍‍ट बीट पर काम करके परमाणु समझौते के प्रकांड विद्वान बन गये है अच्छी बात है ..आप इतना सफाइ क्यूं देते रहते है कस्बा हो या मोहल्ला ..कस्बे में बेबजह आलोचना करते है और फिर रवीश जी से सफाइ भी देते है कि देखिये सब कोइ आप के सुर में सुर मिलाता है लेकिन मैं आपकी आलोचना करता हूं कितना बहादुर हूं मैं । रही बात परेश भाइ की अच्छा लिखते है और उनमें सैद्धांतिक समझ है ..किस चैनल के लिये लेफ्ट बीट पर काम करते है ...हां मैं डीडी न्यूज के लिये पिछले चार साल से लेफ्ट बीट पर ही काम कर रहा हूं ..गोपालन भवन में किसी दिन भेंट हो जाएगी ।