Saturday, June 7, 2008

हमारा बिहार

एक बार एक पूवॆ प्रधानमंत्री ने कहा था मैं अटल हूँ बिहारी नही ...लेकिन जो बिहारी नही वो शायद हिँदुस्तानी भी नही ...क्यूंकि ...B= Bharat..I= India...H= Hindustan ..A= Aryavart ..R= Ruhelkhand होता है ।...

3 comments:

ghumantu said...

आलोक जी आपका वौधिक स्तर काफी अच्छा है। अ‍‌‌टल जी ने एक आम चुनाव के दौरान विहार की जनसभा में कहा था कि मैं अटल भी हूं और बिहारी भी। यह बात चाहे मतदाताओं को लुभाने के लिए ही कहा हो ।वो बिहारी नहीं हैं सत्य है । मध्य प्रदेश मूल के हैं । बिहारी ही भारतीय होगा ऐसा नहीं है । भारतीय बिहारी होगा ऐसा है। बौद्धिक दस्त करने का ितना शोक है तो कुछ ठीक ठीक कीजिए। इधर उधर दिमाग लगाकर प्रसिद्धि पाने के चक्कर में मत रहिये।

ab inconvenienti said...

एहसानमंद रहूंगा आपका, मैं तो नॉन-बिहारी मूल का होने और बिहार से दूर अब तक की जिंदगी गुजारने के बाद भी ख़ुद को भारतीय मनाता था. अच्छा किया बता दिया भारतीय सिर्फ़ बिहारी होते हैं. वरना हम तो भारत को ही अपना देश माने बैठे थे!
वैसे बिहारियों की यह आदत पुरानी है, संघ के नेताओं पर निशाना साधने के लिए लालू-परशाद ने कहा था की 'हमरे बिचार से हिंदू ओही है जिसने अपने बिआह में हल्दी लगवाया हो', तब हमारा बिल्कुल इसी प्रकार ज्ञानवर्धन हुआ की बजरंगबली भी हिंदू नहीं थे.

anil said...

फिर घटिया तुकबंदी A का मतलब आर्याव्रत और R का मतलब रुहेलखण्ड क्या यार बात कर रहे हो बिहार की औऱ पेल दिया रूहेलखण्ड यानि कुल मिला के मतलब सिर्फ बेसरपैर की तुकबंदी से शुक्र की तुमने A से अहमदाबाद और R से राजस्थान नही कहा यार अब तक तो मै सोच रहा था कि शायद तुममे थोड़ा बहुत कंटेंट होगा लेकिन जितना तुमको पढ रहा हूँ उतना ही तुम्हारा खोखला पन दिख रहा है....ये जो तुमने अपने ब्लॉग पर इधर उधर से कट कापी पेस्ट मार रखा है उससे कुछ भला नही होने वाला ....और हाँ जो तुम हर किसी की चाटुकरिता करते हो अब समझ में आया कि क्यों.... क्योंकि जिनके पास प्रतिभा नही होती है वो तुम्हारा ही रास्ता अख्तियार करतें हैं....तुम्हारी ही तरह के दरबारी मेरे चैनल में मौजूद है जो दिन भर सिर्फ बॉस लोगों के केबिन में दरबार लगाते हैं ....औऱ जो तुम हर ब्लॉग पर चाटुकरिता वाली टिप्पणियां देते हो बिना कंटेंट की उससे अब हर कोई परिचित हो गया है और सब तुम्हारा मजा लेते हैं इसलिए अपना समय चाटुकरिता में लगाने की जगह कुछ पढो लिखो....इसे एक शुभ चिन्तक की सलाह मानना और बुरा मत मानना और मान भी गये तो क्या ....और हाँ ये बिहारी - बिहारी क्या लगा रखा है तुम जैसे ही लोग राज ठाकरे जैसों को आगे आने का मौका देते हो और बाद में छाती पीटते हो....तुम बिहारी - बिहारी चिल्लाओ तो ठीक और राज ठाकरे मराठी - मराठी चिल्लाये तो गलत ....और हाँ ये वाहियात तुकबंदी के चक्कर में अपनी भद मत पिटवाओ.....अब ये मत बोलना की मै तुम्हारी आलोचना कर रहा हूँ ....क्योंकि उपर आयी दोनों टिप्पणियाँ तुम्हारी बौद्धिक खोखले पन की पोल खोलती है....नादान