Tuesday, May 20, 2008

दिल्ली का रेड लाइट एरिया



दिल्ली में ही नही बल्कि बाहर भी जीबी रोड मशहूर है ॥कहा जाता है रेड लाइट एरिया है । एक बार गया था उस रोड से ॥रिक्शे पर सवार होकर जब मैँ रोड क्रास कर रहा था तो मैं नजर बचाकर उन कोठों की ओर तांकने का लालच ना छिपा पाया...विभिन्न भंगिमाओं से कोठे की लडकियाँ राह आने जाने वालों को मानो दावत दे रही थी। रोड क्रास कर चुका था और वो हसीन नजारा भी। ये तो रजिस्टर्ड जगह है जहा मजबूरी में औरतें देह व्यापार के धंधे में लिपत है। लेकिन ऐसे कै जगह है जहां ये धंधे पुलीस वालों के सह्योग से हुआ करते है। समय बीता लगभग दो सालों के बाद मेरा एक दोस्त स्टिँन्ग आपरेशन के सिलसिले में मेरे पास आया बोला आइ कार्ड रख ले ..स्टिँन्ग करना है ...मैँ बोला किसका ..बोला धंधे वाली लडकियों का और उसमें शामिल सफेदपोश लोगों का। बोला रिस्क है लेकिन तेरे उपर आंच नही आने दूँगा।पहला पडाव ः- भीखाजी कामा प्लेस के सामने का हयात होटल ...दोस्त की नजरों ने तलाश लिया ..एक महिला के पास जाकर कुछ बोला मैं दूर ही था थोडा हिचकते हुए पास गया ..2500 में मामला तय हो गया ..उसने पैसे दे दिये ...थोडी देर के बाद दोस्त से कहा सुनी हो गइ ..औरत ने कहा जाओं यहा से औरत पहुंच गइ 100 नंबर वाले पीसीआर वैन के पास ...दोस्त गया और बोला कि इसने मेरे 2500 रुपये लिए है ..पुलीस वाले ने हडकाया और कहा कि भाग जाओं यहां से वरना अभी गिरफ्तार कर लूंगा ..दोस्त गिडगिडाने का नाटक करने लगा सब कुछ कैमरे में कैद हो रहा था ..रात के ग्यारह बज रहे थे ..धीरे धीरे भीड होने लगी वहां पर ..पीसीआर वाले नशे में धुत्त..और वो धंधे वाली लडकी ऐसे खडी थी जैसे वो उन कांस्टेबलों की बास हो ..मामला बिगडता देख ..दोस्त ने अपना आइ कार्ड निकाला और दिखाया साथ तब जाकर पुलीस वाले शांत हुए और उसका पैसा भी लौटा गये ..दोस्त ने यह खुलासा नही किया ...कि उसने हिडन कैमरे पर सब कुछ शूट कर लिया है । ( अगली बार दूसरे स्पाट की कहानी)




6 comments:

दीपान्शु गोयल said...

कमाल है पता ही नहीं था आप भी स्टिंग आपरेशन कर चुके हैं। आगे भी इन्तजार रहेगा

अतुल said...

इस तरह मजबूर गरीब लडकियों के स्टिंग आपरेशन नहीं करने चाहिए. करना है तो पाश कालोनियों का करें.

ग़ुस्ताख़ said...

आपके हिसाब से वेश्यावृत्ति स्टिंग का मसाला है.. जनाब यह दुनिया के सबसे गलीज पेशों में से एक है। और इसमें जितना जलालत झेलना पड़ती हैं वह सिर्फ शामिल लड़कियां ही बता सकती है। पेट के लिए धंधा करने का यह भी एक ज़रिया है। इसे स्टिंग का मसाला बनाकर आप तेजपाल नहीं बन जाएंगे।

Udan Tashtari said...

शायद आपके यह कदम उन चेहरों को उजागर कर पायें जो इन्हें यह सब करने को मजबूर करते हैं.

कुमार आलोक said...

atul and gustakh bhai sting maine nahee kiya mujhe to kaha gaya sirf chalane ke liye ..majboori har kisi ke paas hai isakaa matlab sab log chori aur robbery karne lage? paash colonies tak pahoonchanaa bhee badee baat nahee ...mujhe tezpaal nahee banana ...main to ek raat hee ghooma ehsaas hua kee veshyavriti ke tar rajdhanee ke kone kone tak faile hai. udantastaree jee aap kaa kahanaa sahee hai safedposh log ka ek bahut badaa gang hai ..khair mere doston ne daraa diya .is chapter ko yahee close kartaa hoon.

Amit Kumar said...

The red light area is very common in the metropolitan city. It is not only common in the metropolitan city but due to the affects of fashion it is also found in the small city. In this occupation some girls are involved due to her live, and some are involve to live her life very funtastic and romantic. The main accused of this profession is agent, who give a loof to parents of the poor girl, that i will settle her in New Delhi. Parents of girls agree to his proposal, send their girl for a job with the person. When the girls come in metropolitan city like New Delhi, Pune, Mumbai, the person sold her to the red light area or in the inner house, from where she can not run away.

She has to fulfill the sexual demand for the person, who visit the inner house. If she is unable to fulfill it, the honour of the inner house barely beaten her.

To understand why girls goes to the inner house, to watch the movie "Lagga Chunri Me Dag".