<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099</id><updated>2012-02-15T22:30:04.913-08:00</updated><title type='text'>मिसगाइडेड मिसाइल</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>48</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-2347056457324115894</id><published>2010-11-07T01:47:00.000-07:00</published><updated>2010-11-07T02:48:28.633-08:00</updated><title type='text'>ऐतेहासिक होगा बिहार के लोगों का फैसला</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/TNaDsTO1SXI/AAAAAAAAAJU/1mIN81AHCVo/s1600/Bihar-Legislative-Assembly-Building-300x208.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5536757588998572402" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 208px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/TNaDsTO1SXI/AAAAAAAAAJU/1mIN81AHCVo/s320/Bihar-Legislative-Assembly-Building-300x208.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;पहले राष्ट्रमंडल खेल फिर ओबामा की भारत यात्रा ..और फिर एशियन गेम्स की चकाचौंध । शायद बिहार का चुनावी संग्राम मीडिया की सुर्खियां बटोरने में थोडा पीछे सा रह गया है। विभिन्न चैनलो और दिल्ली के पत्रकारों ने नीतिश कुमार की पुनः ताजपोशी कर दी है । पिछले दो महीनें से बिहार में हूं । बहुत सारे जगहों पर घूमा । यहां ऐसी कोइ लहर नही जो दर्शाती हों कि अमुक पार्टी को पूर्ण जनादेश देने के लिये जनता बेताब है । अगर पिछले २००५ के विधानसभा चुनावों की बात की जाये तो लालू के खिलाफ एक लहर सी पूरे प्रांत में चल रही थी जिसकी आंधी में सब उड गये और राज्य में एनडीए की सरकार बनी । वैसी आंधी या तूफान यहां देखने को नही मिल रहा है । हां एक बात जरुर नीतिश के चेहरे पर देखने को मिल रही है । सत्ता में वपसी को लेकर वह आश्वस्त ही नही बल्कि ओवरकन्फिडेंट नजर आते है । शाइनींग इंडिया के बाद शाइनिंग बिहार वाली चमक एनडीए के नेता और उनके समर्थक जरुर महसूस कर रहे है । टिकटों को लेकर एनडीए और जद यू में खूब घमासान मचा ..आखिरकार बात बनी और अब तो मात्र दो चरणों के चुनाव बाकि रह गये है । समीक्षकों का मानना है कि बढा हुआ वोट प्रतिशत नीतिश के गठबंधन को तो १५० से १७० सीट तक दिला सकता है या तो यह गठबंधन ८० - ९० सीटों तक सिमट जायेगा । २४३ सीटों पर अकेले चुनावी अखाडे में कूदी कांग्रेस अपने सीटों में कोइ खास इजाफा करने तो नही जा रही लेकिन इस पार्टी ने राजद-लोजपा और भाजपा जद-यू गठबंधन को खासा परेशान किया है । हालांकि राजद गठबंधन को कम ...लेकिन जद-यू गठबंधन को इसका ज्यादा नुकसान उठाना पड सकता है । जिस किसी सीट पर कांग्रेस ने जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर दमदार प्रत्याशी उतारा है वहां राज्य की दोनो प्रमुख गठबंधन को नुकसान उठाना पड रहा है । पिछले कुछ चुनावों से राजद लोजपा गठबंधन में यादव जाति के लोगों को पासवान पर भरोसा नही था उसी तरह पासवान जाति को यादवों पर भरोसा नही था ..शायद यही कारण था कि हाजीपुर से पासवान को हार का मुंह देखना पडा था । इस बार स्थितियां बदली हुइ है । दोनो जातियां गोलबंद है अपने प्रत्याशियों की जीत के लिये । इसका फायदा इन दोनो दलों को मिल सकता है । लालू ने ७५ सीटें लोजपा को दी है ..लोजपा ने दिल खोलकर सवर्ण प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है । लालू की पार्टी से अपेक्षाकृत सवर्णों को कम सीट दी गयी है । लालू से सवर्ण जातियों को चीढ हो सकती है लेकिन शायद पासवान से नही । जैसे जैसे चुनाव अंतिम दौर में पहुंच रहा है ..अन्य मुद्दों पर जातिय फैक्टर ज्यादा हावि हो रहा है । जद-यू के अत्यंत पिछडी जातियों में सेंधमारी को लेकर विपक्षी राजद - लोजपा गठबंधन खासे परेशान है ..वहीं नीतिश कुमार सवर्णों में सबसे आक्रामक जाति की नाराजगी से परेशान दिख रहे है ।अलपसंख्यक वोटों में भी बिखराव दिख रहा है ..लेकिन इसका ज्यादा प्रतिशत लालू वाले गठबंधन की ओर जा सकता है ..जहां जहां कांग्रेस की ओर से दमदार प्रत्याशी है अलपसंख्यकों का झुकाव कांग्रेस की तरफ भी देखने को मिल रहा है । बटाइदारी कानून का मुद्दा हालांकि यहां नजर नही आ रहा लेकिन साइलेंट वोटरों की संख्या को देखते हुये इस मुद्दे का मुर्दा हो जाना कहना गलत होगा । नीतिश सरकार के द्वारा अमन चैन ..रोड के मामले में सुधार ..लडकियों को साइकिल वितरण जैसे विकास के मुद्दे लोगो को खूब भा रहे है ..लेकिन अफसरशाही के हिटलरी रवैये ..गरीबों को दी जाने वाली खाद्यान में घोटाले जैसे मुद्दे नीतिश सरकार के खिलाफ जा रहे है ।शायद यही वजह है कि नीतिश अपनी चुनावी सभाओं में कह रहे है कि सत्ता में वापसी पर भ्रष्ट अपसरों को जेल ही नही भेजेंगे बल्कि उनकी संपत्ती को जब्त कर उसमें स्कूल खोलेंगे । लालू अपनी सभाओं में उंची जातियों से खूब माफी मांग रहे है कह रहे है कि आज सारे सवर्ण जाति के लोग समझ रहे है कि लालू मुंह का फूहड है दिल से नही और नीतिश दिल के काले है । कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी खासकर जद-यू की तरफ से खूब आक्रमण हो रहा है ..शरद यादव का बयान गंगा में फेंक देने वाला ..पर खूब हंगामा हुआ। कांग्रेस का मानना है कि जद-यू के वोट वैंक में सेंधमारी से एनडीए के लोग बौखला गये है ।विश्लेषकों का मानना है कि सन २००३ के राजस्थान विधान सभा चुनावों में अशोक गहलोत से राज्य की जनता को कोइ नाराजगी नही थी । सर्वेक्षणों में वेस्ट मुख्यमंत्री के तौर पर गहलोत सबसे आगे थे लेकिन जब चुनाव के परिणाम आये तो भाजपा ने कांग्रेस का सूपडा साफ कर दिया । गहलोत के खिलाफ नही बल्कि उनके मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ जबरदस्त ऐन्टीइंकंबेंसी मत पडे । कुछ क्षेत्रों में ऐसी स्थिति देखने को मिली लेकिन राजस्थान जैसे हालात यहां नजर नही आ रहे है । कुल मिलाकर यहां लडाइ दिलचस्प है और २४ तारिख को जब मतों की गिनती होगी तो बिहार के लोगों का जनादेश अपने आप में ऐतेहासिक माना जायेगा । लोगों ने विकास को ही तरजीह दी या जातिय समीकरण का ही ख्याल रखा यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण रहेगा । &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-2347056457324115894?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/2347056457324115894/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=2347056457324115894' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2347056457324115894'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2347056457324115894'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2010/11/blog-post.html' title='ऐतेहासिक होगा बिहार के लोगों का फैसला'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/TNaDsTO1SXI/AAAAAAAAAJU/1mIN81AHCVo/s72-c/Bihar-Legislative-Assembly-Building-300x208.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-9041186866740844464</id><published>2010-08-14T19:55:00.000-07:00</published><updated>2010-08-14T20:05:11.169-07:00</updated><title type='text'>पिपली लाइव का असली हीरो नत्था नही राकेश है ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/TGdZC8Z9T0I/AAAAAAAAAI0/Jn6x-T3P3I0/s1600/nathha.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5505466976593334082" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/TGdZC8Z9T0I/AAAAAAAAAI0/Jn6x-T3P3I0/s320/nathha.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;फिल्म रिलीज होने के पहले बहुत कुछ कयास लगाये जा रहे थे ..किसान कर्ज माफी.... ग्रामीण भारत की समस्या आदि आदि इस फिल्म का थीम है । सही मायनों में यह फिल्म मीडिया और खासकर खबरिया चैनलों को खबर लेती दिखती है । भाजपा नेता प्रमोद महाजन को गोली लगने के बाद चार दिन तक जिंदगी और मौत से वो जूझते रहे ..आखिरकार उनका दुखद अंत हुआ। लेकिन उन चार दिनों तक खबरिया चैनलों के रिपोर्टर ..खबरनवीस कम डाक्टर ज्यादा हो गये थे। स्टिक लेकर लीवर का नक्शा बनाकर वो बताते थे कि गोली गोल व्लाडर को छूती हुइ निकली है ..इसलिये संभावना है कि प्रमोद महाजन की जान आसानी से बच जाएगी ...कोइ कहता था कि नही मेडिकल साइंस के मुताबिक गोली लगने के बाद टेटनस का खतरा हो गया है ..इसलिये उनकी जिंदगी खतरे में है । कुछ ऐसा ही उदाहरण नत्था के साथ इस फिल्म में है । आत्म हत्या के डर से उसे एक दिन में २० २० बार शौचालय के लिये जाना पडता है । एक बार शौचालय करने के बाद अहले सुबह नत्था गायब हो जाता है । उसकी ट्टी पर कुमार दिपक नाम के रिपोर्टर का विश्लेषण शुर होता है ...नत्था गायब है ..लेकिन वहीं ये जगह है जहां नत्था ने अंतिम बार अपना मल त्याग किया है ...इसका पाखाना सफेद है ..इसलिये जाहिर है कि नत्था जिस मनोस्थिती से गुजर रहा है उस हालत में ऐसा ट्टी होना लाजिमी है ..यह मनोचिकित्सकों का भी मानना है । चैनलों में एक जीव है जिसका नाम ..स्ट्रिंगर होता है । कस्बे का संवाददाता होता है । राष्ट्रीय चैनलों में कस्बों की खबर गाहे बगाहे ही फलक पर आती हों लेकिन जब कोइ बडी घटना कस्बे के आस पास हो जायें तो वही स्ट्रिंगर चैनलों के लिये अति महत्वपूर्ण हो जाता है। जहानाबाद जेल ब्रेक के दौरान एक स्थानिय स्ट्रिंगर ने ही उस खबर को ब्रेक किया था ..चैनल की टीआरपी भी बढी ..हालांकि चैनल ने उस स्ट्रिंगर को प्रश्स्ती पत्र के साथ साथ सुपर स्ट्रिंगर बनाया और नकद भी दिया । खैर ऐसा सबके साथ नही होता है । कुछ ऐसा ही पिपली लाइव में राकेश नाम का किरदार है जो स्थानिय अखबार का संवाददाता है। नत्था की खबर उसी के अखबार में सबसे पहले छपी । बाद में यह बडी खबर बन गयी ..राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक हिल गयी । सारे चैनलों के बडे सूरमा पिपली पहुंच गये । एक बडे चैनल की बडी अंग्रेजीदा रिपोर्टर भी पहुंची ...राकेश उन्हें ऐसीस्ट कर रहा था । उन्हीं के साथ साथ घूमता था और उनके चैनल की टीआरपी बढाने में मदद कर रहा था । कुछ दिन साथ रहने के बाद राकेश ने मोहतरमा को अपना सीवी बढाया ...मोहतरमा ने उसे अपने पास रखने को कहा क्यूंकि उसकी नौकरी से कहीं ज्यादा नत्था की स्टोरी थी । उस गांव में एक और किसान कर्ज और भूख से मर जाता है लेकिन वो चैनलों के लिये खबर का हिस्सा नही बन पाता है ...राकेश और मोहतरमा में वैचारिक तकरार भी इसको लेकर होता है ,,लेकिन मोहतरमा भारी पडती है क्यूंकि वो बडे चैनल की बडी रिपोर्टर है । पीटूसी करने के पहले पिपली के धूल धूसरीत स्थान में फिल्ड रिपोर्टिंग करते वक्त वह अपना मेकअप करना नही भूलती । नत्था कहां है ..राकेश की खोजी पत्रकारिता रंग लायी और नत्था का उसने पता लगा लिया । मोहतरमा दौडती है साथ में और चैनलों के रिपोर्टर अपनी ओवी के साथ उधर लपकते है । इसी बीच एक विस्फोट मे राकेश की मौत हो जाती है ...नत्था गुडगांव निकल पडता है दाढी मुंडवाकर मजदूरी करने ...लेकिन खबर यही बनती है कि विस्फोट में नत्था ही मर गया । सारा मसाला खत्म चैनल वाले के लिये ...ओवी और चैनलों के काफिले दिल्ली कूच कर जाते है ..मोहतरमा सबसे अंत में निकलती है और अपने सहयोगियों से पूछती है ...राकेश कहां है ...वो फोन भी रिसीव नही कर रहा है। गाडी में बैठती है और वो भी वापस दिल्ली स्टूडियो कूच कर जाती है । दिल्ली के पत्रकारों को स्ट्रिंगर कहे जाने वाले ये जीव उनकी ओर आशा और विश्वास भरी नजरों से देखते है ..सोचते है हरि मिल गया ..अब भवसागर पार कर जायेंगे ......लेकिन काम निकलने के बाद यही दिल्ली वाले पत्रकार उस जीव का फोन भी नही रिसीव करते....हां उसके विजुवल्स पर नक्सल बगैरह की स्टोरी बना डालते है ....और दिल्ली की झाडियों के बीच भाव भंगिमाएं बनाकर एक पीटूसी पेल डालते है । ...चैनल पर चलता है ..गुमला के जंगलों से कुमार दीपक की ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ..........&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-9041186866740844464?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/9041186866740844464/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=9041186866740844464' title='11 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/9041186866740844464'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/9041186866740844464'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2010/08/blog-post.html' title='पिपली लाइव का असली हीरो नत्था नही राकेश है ?'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/TGdZC8Z9T0I/AAAAAAAAAI0/Jn6x-T3P3I0/s72-c/nathha.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>11</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-6724779624365494452</id><published>2010-05-11T12:33:00.000-07:00</published><updated>2010-05-11T15:33:19.285-07:00</updated><title type='text'>क्यूंकि मैं दूरदर्शन में हूं ।</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S-mx1zcRL4I/AAAAAAAAAIs/vJoPdg27Ocs/s1600/Doordarshan.png"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5470098760318136194" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 229px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S-mx1zcRL4I/AAAAAAAAAIs/vJoPdg27Ocs/s320/Doordarshan.png" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; हमारा दोस्त आशुतोष पाण्डेय है । दून में पढा है ..स्मार्ट भी है सिर्फ दिखने में ही नही बल्कि अपनी काबलियत से भी । कुछ दिन पहले वो एक साक्षात्कार में गया ..अंग्रेजी के लब्धप्रतिष्ठित चैनल में ..इंटरव्यू में उसके सामने थे उस चैनल के प्राइम टाइम एंकर  या समझलिजीये  बौस । सारे प्रश्नों का बेबाक उत्तर देने के बाबजूद उसे बताया गया कि आप दूरदर्शन में है इसलिये खबरें निकाल पाना आपके बस में नही है । आशुतोष ने मुझे बताया कि क्या खबरें निकालना सिर्फ निजी चैनलों के ही बस का है ? खबरें हम दिखाते है और हमारे चैनल के लोग मेहनत भी करते है हम खबरों में मसाले का छौंक नही दे पाते है ..उसे सनसनिखेज नही बना पा पाते है ..हम टी आरपी के खेल से भी अलग है ...हम थोडा पिछे रह जाते है लेकिन खबर पक्की जब तक नही हो जाये नही दिखा पाते है । खबरों के छौंक का एक छोटा उदाहरण हम आपसे शेयर करना चाहते है । भारत अमरीका परमाणु करार के मामले में राजनीतिक सरगर्मीयां अपने चरम पर थी । वाम पार्टियों का एक छोटा सा मूवमेंट भी खबर का एक अहम हिस्सा बन चुका था । एक शाम खबर आयी कि प्रकाश करात १० जनपथ में कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने आ रहे है । १० जनपथ में उस समय संतन  की भीड जुट गयी थी पूरे लाव लश्कर के साथ । तमाम तरह के लाइव इनपुट चैनल के महान रिपोर्टर अपने संस्थान के लिये कर रहे थे । ६ बजे का समय शायद निर्धारित था सीपीएम महासचिव का कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने का । ९ बज गये थे ..लेकिन प्रकाश करात का कोइ अता पता नही था । प्राइम टाइम में एक लाइव इनपुट बडे चैनल के बडे रिपोर्टर ने शुरु किया । एंकर ने पूछा लेटेस्ट अपडेट बताइये । रिपोर्टर ने अपने स्पीच में जोरे बाजू का इस्तेमाल करते हुये ब्रेकिंग खबर दिया कि प्रकाश करात आये तो थे कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने लेकिन वो पिछले दरवाजे से आये और मैडम सोनिया गांधी से मिलकर चले गये । रात के ११ बज गये थे सारे चैनलों ने वाइंड अप कर लिया । हम  भी वाइंड अप हो गये । उस दिन मुझे पता चला दूरदर्शन और निजी चैनल का फर्क । मैने सोचा कि इस रिपोर्टर को शायद प्रकाश करात ने ही बताया होगा कि भइया हम पिछले दरवाजे से मिलकर चले गये । खबरों की खबर रखने वाले से हमारा क्या मुकाबला । बात आयी गयी हो गइ .. एक दिन के बाद प्रकाश करात की गोपालन भवन में पीसी थी । सारे अखबारनवीस और चैनल के बडे बडे रिपोर्टर पहुंचे थे । पीसी के बाद सवाल जबाब का सिलसिला शुरु हुआ। सब लोग थक गये अपने अपने सवाल पूछ कर ..मसलन आप लोग भौंकते है काटते नही ...बगैरह वगैरह । मुझे तो पिछला दरवाजा वाला सवाल दिमाग में घूम रहा था । मैने पूछ दिया कि कल आप १० जनपथ में पिछले दरवाजे से कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने गये कृप्या आप बतायें एटमी करार  पर क्या बात हुइ । प्रकाश करात ने कहा कि मैं कल दिल्ली में था ही नही । मैने अपना माथा पीट लिये । तब मुझे अहसास हुआ कि आखिर खबरों के निकालने की तरकीब क्या होती है । हाल ही में एक दिन गोपालन भवन में हरिकिशन सिंह सुरजीत पर एक बुकलेट का विमोचन था प्रकाश करात , सीताराम तथा कामरेड सुरजीत की पत्नी भी उपस्थित थी । इसी बीच हमारे दूरदर्शन के एक पत्रकार दोस्त ने फोन किया कि आलोक जी कानू सन्याल ने आत्म हत्या कर ली है हो सके तो इसपर एक बाइट ले लिजीये । निजी चैनल के एक बडे रिपोर्टर से हमने वह बात उन्हे कही कि प्लीज ये सवाल पूछिये ...उन्होने कहा कि हु इज कानू सान्याल ? दोस्तों तों वो बीट रिपोर्टर थे उसमें भी बडे चैनल के । यहां आप कतइ ये नही समझेंगे कि मैं अपनी शेखी बघार रहा हूं ... अरे हम तो रिपोर्टर कहलाने के तो काबिल ही नही है ...इसलिये कि दूरदर्शन में है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-6724779624365494452?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/6724779624365494452/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=6724779624365494452' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/6724779624365494452'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/6724779624365494452'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='क्यूंकि मैं दूरदर्शन में हूं ।'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S-mx1zcRL4I/AAAAAAAAAIs/vJoPdg27Ocs/s72-c/Doordarshan.png' height='72' width='72'/><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-6394847379519513255</id><published>2010-03-23T08:40:00.000-07:00</published><updated>2010-03-23T08:45:13.515-07:00</updated><title type='text'>भूत पड गया लालाजी के चक्कर में - एक लोककथा</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S6jhvDpoIMI/AAAAAAAAAH4/z-0BB008BF4/s1600-h/bhoot.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5451855547481989314" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S6jhvDpoIMI/AAAAAAAAAH4/z-0BB008BF4/s320/bhoot.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;कायस्थ लोग कलम के तेज या कहे धनी होते है । बिहार में कहावत है कि क्षत्रिय के तलवार के धार से भी बडी धार होती है लालाजी के कलम में । लाला जी की नयी नयी शादी हुयी थी । पढे लिखे थे लेकिन कहीं नौकरी नही थी । एक आध साल के बाद उनकी धर्मपत्नी लगीं लाला जी को कोसने । रोज उलाहना देती कि बाबूजी कइसन करमकीट से वियाह कर दिहलन । पत्नी का ताना सुनते सुनते लाला जी परेशान हो उठे । एक दिन अपना कलम दावात उठाया और सोचे कि चलो नही कहीं कुछ रोजगार मिला तो बच्चों को पढाकर छोटा मोटा स्कूल खोल देंगे । अहले सुबह अपने घर का त्याग कर निकल पडे रोजगार की तलाश में । गर्मी का दिन था । चलते चलते भरी दुपहरिया में लाला जी पसीने पसीने हो गये । सुकुमार तो थे ही । दोपहर में एक पेड के निचे घर से बंधे हुये पोटली का खाना खाया । पेड की छांव में लालाजी को निंद आ गयी । खर्राटे लेकर सो गये । वह पेड भूतों का बसेरा था । शाम हुइ भूत जब लौटकर पेड पर वापस आये तो देखा कि एक आदमी सो रहा है । भूतों के तो पौ बारह हो गये उनमें से एक नौजवान भूत ने कहा ..अहा ..आज तो इंसान का ताजा खून पीने के लिये मिलेगा । तभी एक बुजुर्ग भूत ने अपने साथियों को समझाया ...अरे सब जानते है कि यह पेड भूतों का बसेरा है ..यहां तो कोइ इंसान दिन में भी नही फटकता । जरुर कोइ असाधारण इंसान है । बुजुर्ग भूत ने लालाजी को जगाया । लालालाजी की निंद टूटी तो आसपास भूतों के काफिले को देखकर उनके तो प्राण ही सूख गये । लालाजी ने सोचा मरना तो है ही क्यूं ना कुछ अक्ल का इस्तेमाल किया जाये । बुजुर्ग भूत ने लाला जी को डपटते हुये पूछा ..अरे इंसान के बच्चे तुम कौन हो ..तुम्हें डर नही लगा कि ये पेड भूतों का बसेरा है । लालाजी ने हिम्मत का प्रदर्शन करते हुये कहा ..हमें क्यूं डर लगेगा तुम लोग अब अपनी सोचों । बुजुर्ग भूत थोडा सहमा और बोला ..आखिर क्यूं ..। लालाजी ने कहा कि मैं इंद्र देवता का क्लर्क हूं ..मुझे देवता ने यहां भेजा है कि जाओ धरती पर और इस पेड के निचे रहने वाले भूतों का सर्वे करो । ये भूत निकम्मे और कामचोर है पूरी गिनती कर जल्द ही इन्हें खेतों में काम पर लगाओ। बुजुर्ग भूत ने लालाजी के पांव पकड लिये । हे किरानी महाराज सदियों से हमलोग स्वच्छंद जीवन जीते आये है । हमें ऐसी सजा नही दिजीये । ले देकर मामला रफा दफा किजीये । आप जो कहें हम करने के लिये तैयार है । लालाजी ने मन ही मन सोचा कि तीर सही निशाने पर लगा है । ठिक है देवता तो हम पर पूरा विश्वास करते है । चलिये रोज २० क्विंटल अनाज घर पहुंचा दिजीये मैं इस मामले को अपने रिस्क पर सुलझाने की कोशिश करता हूं। लालाजी घर लौट आये । बस अगले दिन से रोज २० क्विंटल अनाज लाला जी के घर रोज पहुंचने लगा । लालाइन को भी लगा कि बाप रे बाप हम झूठ ही अपने मर्दाना की काबलियत पर शक करते थे । लालाजी के घर अब खुशियों की बारिश होने लगी । यह सब देखकर लालाजी के पडोसी व्यापारी भाइ को नही सुहाया । सोचा कि लाला जी कि इस सफलता के पिछे क्या राज है ? व्यापारी ने अपनी पत्नी को जासूस बनाकर लालाइन से इसका भेद जानने के लालाजी के घर भेजा । लालाइन सीधी साधी थी सारा राज व्यापारी की पत्नी को बता दिया । व्यापारी ने सोचा अच्छा बेटा तो तुम्हारी सफलता का ये राज है । उसी दिन शाम को व्यापारी भाइ चल दिये उस भूतों वाले पेड के निचे । जानबूझकर मटियाकर सो गये । भूत आये । व्यापारी को जगाया । व्यापारी ने वही डायलाग बोला जो लालाजी ने भूतों से कहा था । भूत एक साथ जब डपटे तो व्यापारी महोदय के प्राण सूख गये । उन्होने सच्चाइ बता दिया । भूतों ने व्यापारी की खूब पिटाइ की और दंडस्वरुप उन्हें ये कहा कि तुम लालाजी को रोज २० किलो घी दंड के रुप में पहुंचाओ । व्यापारी भाइ मान गये । जाकर लालाजी से आरजू मिन्नत की तो लाला जी ५ किलो डेली पर मान गये । अब तो लालाजी के दिन और मजे से कटने लगे । एक दिन बुजुर्ग भूत ने अपने साथियों से मंत्रणा की कि कहीं ये लालाजी हमलोगों को वेवकूफ तो नही बना रहा है । अगले दिन बुजुर्ग भूत अपना चोला बदलकर कुत्ते के भेष में लालाजी के यहां पहुंचे । लालाजी के कुत्ते का नाम गिरधारी था ..लालाजी खाना खाने के बाद अपने कुत्ते को गिरधारी आ आ करके बुलाया । संयोग से बुजुर्ग भूत का नाम भी गिरधारी था । उसकी तो सिट्टी पिट्टी गुम । कुत्ते का भेष त्यागकर बुजुर्ग भूत लालाजी के चरणों में गिर पडा । हे किरानी महाराज मुझे माफ कर दिजीये मैने बेवजह आप पर शक किया । लालाजी को समझ में आ गया कि भाग्य ने गेंद तो फिर मेरे पाले में फेंक दिया है । लालाजी ने बुजुर्ग भूत से कहा देखो भाइ तुम्हें तो इसके लिये मुझे कडी से कडी दंड देनी चाहिये लेकिन चलो मैं तुम्हें बक्श देता हूं । हां तुम ऐसा करों कि रात में तुमलोगो मेरे गोदाम में आओं और जो कच्चा अनाज तुम लोग दे आते हो उसकी रोज पिसाइ करों । बुजुर्ग भूत ने एवमअस्तु कहा और वापस अपने पेड की ओर लौट आया । &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-6394847379519513255?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/6394847379519513255/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=6394847379519513255' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/6394847379519513255'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/6394847379519513255'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html' title='भूत पड गया लालाजी के चक्कर में - एक लोककथा'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S6jhvDpoIMI/AAAAAAAAAH4/z-0BB008BF4/s72-c/bhoot.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-7539689055947731846</id><published>2010-03-19T23:56:00.000-07:00</published><updated>2010-03-20T00:08:46.187-07:00</updated><title type='text'>नजर सुरक्षा चक्र -- इलाज से बढिया ऐहतियात बरतें</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S6R0Hhs6OtI/AAAAAAAAAHw/irAe-m9IgAE/s1600-h/alok.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5450609121679784658" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 192px; CURSOR: hand; HEIGHT: 183px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S6R0Hhs6OtI/AAAAAAAAAHw/irAe-m9IgAE/s320/alok.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;नाम- मिसेज देसाइ ...राजस्थान की रहने वाली ..इनके पति बहुत बडे व्यवसायी है । दस साल पहले इनकी बर्तन की एक छो‍टी सी दूकान थी । अपनी मेहनत और कर्म के बलबूते आज इनकी बर्तन की तीन तीन बडी फैक्टरियाँ है । सब कुछ ठिक ठाक चल रहा था । एक दिन इनकी चाची सास इनके घर आ गयी ..बस बोलना शुर किया ..बाप रे बाप कितनी तरक्की तूने कर ली है ..ऐसा व्यापार ..इतने पैसे ..तेरी पत्नी के इतने गहने ..और एक मेरे पति जो सिर्फ गवांना जानते है बनाना नही । तभी चाची की दोनो आंखों से चिंगारी निकली ( ठिक वैसा ही जिस तरह रामायण सीरियल में राम के वाण चलने के बाद रावण तक पहुंचते पहुंचते ( रे यानि किरण का रुप लेकर पहुंचती थी ) और उसके बाद मिस्टर देसाइ की आँखो मे जाकर चुभ गयी । एक स्पेशल इफैक्ट होता है और मिस्टर देसाइ के शरीर का अग्र भाग बिल्कुल लाल हो जाता है । बस क्या था ..उसी दिन से मिस्टर देसाइ उखडे उखडे रहने लगे । धीरे धीरे उनका व्यापार भी उजडने लगा । पूरा परिवार परेशान हो उठा । भला हो मिसेज देसाइ का जिन्होने बिना अपनी पति के अनुमती के बगैर इस नंबर पर संपर्क किया ( ९३१२९२२६२२६) फिर एसएमेस किया ( एनएसके ५६७६७) और उसके बाद उन्हें मात्र २३७५ रुपये में मिला नजर सुरक्षा चक्र । दिव्य ऋषी संस्थान के वैग्यानिकों के द्वारा बनाया गयी एक ऐसी माला जिसके पहनने के बाद आपके इर्द गिर्द वह माला पोजीटिव एनर्जी क्रियेट करता है और आप पर डाले गये निगेटीव एनर्जी की काट करता है । माला के पहनते ही मिस्टर देसाइ का जीवन ही बदल गया और उनका व्यापार भी अपने पुराने ढर्रे पर आ गया । चाची सास आज भी उनके पास आती है और निगेटीव एनर्जी क्रियेट करती है लेकिन वाह रे नजर सुरक्षा चक्र का कमाल ..समझिये नजर लगानेवाली की ऐसी तैसी । पुणे की रहनेवाली पेशे से शिक्षिका बरखा गुप्ता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ उनकी भाभी ने बरखा की शादी काट दी । नजर सुरक्षा का लाकेट पहनते ही उनकी भी दुनिया बदल गयी । महामंत्रों के जाप इस लाकेट में इनबिल्ट है । नजर सुरक्षा ही है आपके भाग्य की चाबी ..और हां ३० दिनों के अंदर इस लाकेट ने अपना काम नही किया तो कंपनी आपसे ली हुइ सहयोग राशी भी वापस कर देगी । जल्दी किजीये क्या पता कोइ बुरी नजर आपका पिछा कर रही है । बचपन में हमारी मां नवरात्री के दिनों में हमारी नाभी पर काजल का टीका लगाती थी ...बुरी नजरों से बचाने के लिये ..गाय भैंस से दूध का व्यापार करने वाले अपने गौशाले में बंदर रखा करते है बुरी नजर से बचाने के लिये । २० साल पहले बिहार में एक अफवाह उडी कि भइया अपने घर पर पंजा छाप के लेबल की छपाइ करों नहीं तो घर की ऐसी तैसी हो जायेगी । सारे घरों पर पंजे का लेबल छप गया बुरी नजरों से बचने के लिये । कुछ वर्षों पहले अचानक गणेश जी दूध पीने लगे । हालांकि उन्हीं दिनों एक डेमों में एक प्रसीद्ध वकील ने गणेश जी को शराब भी पिला डाली । दूकानदार जब शाम को अपनी दूकान बंद करते है तो बंद शब्द का प्रयोग नही करके बढाना शब्द का उपयोग करते है । रवि शास्त्री ने अपना एकमात्र दोहरा शतक आष्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में लगाया । उस मैच में जो जुराब उन्होने पहनी थी उसे लगाचार फटे चिथडे हालात में भी दस साल टोटके के तौर पर पहनते रहे ।तेंदुलकर अच्छी पारी खेलने के बाद और कपिलदेव क्रिज पर पहुंचने के पहले सूर्य भगवान को अभिनंदन करना नही भूलते । ऐसे में मेरी सलाह है आप सब टोटके को छोडकर नजर सुरक्षा चक्र को अपनाये कोइ विघ्न आपके पास नही फटकेगा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-7539689055947731846?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/7539689055947731846/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=7539689055947731846' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7539689055947731846'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7539689055947731846'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='नजर सुरक्षा चक्र -- इलाज से बढिया ऐहतियात बरतें'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/S6R0Hhs6OtI/AAAAAAAAAHw/irAe-m9IgAE/s72-c/alok.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-2111556040977594768</id><published>2009-12-10T00:37:00.000-08:00</published><updated>2009-12-10T00:41:00.984-08:00</updated><title type='text'>एक नक्सली की कहानी- पार्ट-२</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SyCz19IJnmI/AAAAAAAAAHc/1knXhFlTlOc/s1600-h/naxal.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5413524491622522466" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 230px; CURSOR: hand; HEIGHT: 230px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SyCz19IJnmI/AAAAAAAAAHc/1knXhFlTlOc/s320/naxal.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;अब बिलाइ मियां अपने बौद्धिक अंदाज में अपना दर्शन मेरे सामने बयां कर रहे थे । मैने कहा बिलाइ मियां जब तक वैचारिक क्रांति आप लोगों के अंदर समावेश नही करेगी तब तक आप अपने मकसद में कैसे सफल होंगे । बिलाइ ने माओ-त्से-तुंग का डायलाग बोला क्रांति बंदूक के नली से होकर गुजरती है । खैर दस्ता प्रमुख ने बोला आलोक जी अब हमारा पडाव यहां से चल रहा है ..हमने पूछा कि कहां ..बोले मुझे भी नही मालूम । अब बिलाइ मियां बहुत मशहूर हो चुके थे । उनके नाम से ही बडे बडे अपराधी थर्राने लगे थे । खैर बिलाइ इमानदार थे और शोषितों के लिये उन्होने हमेशा संघर्ष किया । एक दिन अपने बाल बच्चों से मिलने अपने पैतृक घर पहुंचे पुलीस के भदिये ने इसकी खबर प्रशासन को दे दी । बिलाइ मियां अरेस्ट हो गये इनके साथ एक और नामी नक्सली पकडा गया । पुलीस की नजर में ये नक्सली कुख्यात होते है क्यूंकि बारुदी सुरंग बिछाकर नक्सली संगठन कितने ही पुलीसकर्मिंयों को मौत की निंद सुला चुके है । इन दोनो नक्सली नेताओं के साथ पुलीस ने बेइंतहा जुल्म किये । बिलाइ के साथी को पुलीस ने इतना प्रताडित किया कि उसकी मौत पुलीस हिरासत में हो गइ । मीडिया ने बहुत हो हल्ला किया ..मानवाधिकार संगठन भी काफी चिल्लाये लेकिन जहां तक मुझे जानकारी है न्याय अभी भी कोसों दूर है । बिलाइ की भी बहुत पिटाइ हुइ । कइ मुकदमों मे संलग्न है इस बीच उनका पूरा परिवार दाने दाने को मुहताज हो गया ..और उस भू माफिया ने ... कहा जाता है कि नक्सली संगठन को मोटी रकम देकर मामले को रफा दफा करा लिया । जिस जमीन के हक को लेकर बिलाइ ने बंदूक उठायी थी ..उसके जमीन पर उसी भू माफिया का आज एक सुंदर सा मार्केटिंग काम्पलेक्स बिलाइ मियां की जमीन पर चमचमा रहा है ।&lt;br /&gt;( समाप्त)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-2111556040977594768?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/2111556040977594768/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=2111556040977594768' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2111556040977594768'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2111556040977594768'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/12/blog-post_10.html' title='एक नक्सली की कहानी- पार्ट-२'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SyCz19IJnmI/AAAAAAAAAHc/1knXhFlTlOc/s72-c/naxal.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-3689121667181812321</id><published>2009-12-01T08:00:00.000-08:00</published><updated>2009-12-01T08:02:53.779-08:00</updated><title type='text'>एक नक्सली की कहानी</title><content type='html'>शरीर से वलिष्ठ उपर से रौबदार मूंछे । ऐसा लगता था कि शोले का गब्बर है बिलाइ मियां । बचपन में घरवालों ने उनका यहीं नाम दे दिया था । आंखे भूरी होने की बजह से शायद। वैसे बिहार में आपको अमरिका सिंह भी मिल जायेंगे और खदेरन सिंह भी । किसी गांव का नाम वहां इंगलिश पर भी मिल जायेगा । खैर बात हो रही थी बिलाइ मियां की । बिलाइ  मियां बचपन से ही खुराफाती थे । बम बगैरह बना देना उनके बांये हाथ का खेल था । वो इसलिये कि हिंदु मुस्लिम फसादात को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से ऐहतियात के तौर पर अपने कौम के लिये ऐसा भला काम कर देने की जिम्मेदारी उन पर आन पड जाती थी । खैर लेकिन है वे बडे शरीफ इंसान । तारेगना के फुटपाथ पर उनकी एक दूकान हुआ करती थी । ताले ,चाबी  , लालटेन और टार्च के मरम्मत की । बहुत मशहूर टेक्नोक्रेट थे । हर ताले की चाबी और टार्च की गयी रौशनी को वापस बुलाना उनके बायें हाथ का खेल था । बहुत मशहूर थे अपनी कारकर्दगी के लिये । जाति से वो रंगरेज थे । यानि कपडे को रंगीन बनाना उनके परिवार का पुश्तैनी पेशा था । मुझे याद नही कि कितने वर्षों से उनका परिवार तारेगना में रह रहा था । बात सन १९९५ की है । एक स्थानिय भू माफिया ने बिलाइ मियां की जमीन के  साथ पूरे १२ कठ्ठे जमीन को अपने नाम करा लिया । बिलाइ मियां के घर के आगे बंगलियां ( जी हां यही नाम था ) उसका होटल था । उसका मालिक भी वही भू माफिया हो चुका था । जो भी लोग उस जमीन से वास्ता रखते थे भू माफिया के डर से भाग चले लेकिन बिलाइ मियां सीना तानकर इका विरोध करते रहे । एक रात को वहां एक आदमी की हत्या हो गइ । वो आदमी बंगलिया होटल मालिक का बेटा था । हत्यारे ने गफलत में बंगलिया के बेटे की हत्या कर दी रात के अंधेरे में उसे लगा कि बिलाइ मियां साइकिल से अपने घर जा रहा है । उस दिन का सबेरा बिलाइ मियां के लिये खौफ का मंजर लेकर आया उसने अपनी दूकानदारी बंद की .. भू माफिया से लडने की ताकत नही थी उसमें । बदले की आग दिमाग में लिये हुये वो पहुंच गया नक्सल संगठन की शरण में । चार जवान बेटियां और अपनी पत्नी को छोडकर बिलाइ मियां कुछ ही दिनों में नक्सल संगठन के दस्ता प्रमुख बन गये । दस्ता यानि नक्सलियों का वो विंग जिसकी कमाइ पर नक्सल संगठन जिंदा है । बिलाइ मियां अब माओ और क्रांति की बात करने लगे थे । २० -२५ मुकदमों के मुदालय भी बन चुके थे । एक बार मैं अपने दोस्त की बहन की शादी के सिलसिले में तारेगना के एक सूदूर गांव में पहुंचा । दोस्त मुसलमान था । बडका मांस ( गाय का )  वहां बन रहा था मैने नही खाया । इसी बीच एक आदमी मेरे पास आया और बोला फलां नक्सली संगठन के दस्ता प्रमुख आपको बुला रहे है । मेरी तो हवा निकल गइ । सोचा नही जाउंगा तो यहीं मारा जाउंगा दिमाग पेशोपेश में क्यूं बुलाया क्या मैने कुछ नक्सल मूवमेंट के बारे में तो कुछ नही बोल दिया था । परेशान और हैरान जब उस व्यक्ति के साथ उस स्पाट पर पहुंचा तो वहां दस्ता प्रमुख और कोइ नही बल्कि बिलाइ मियां अपने दस्ते के साथ खाना खाकर ताडी ( इसे आप स्काइ जूस समझे )  पी रहे थे । आइये आलोक बाबू स्वागत है । मैनें कहा अरे मिस्टर बिलाइ जी ...ये सब क्या है चालीस के करीब हथियार बंद लोग जिसमें ३५ के करीब सो रहे थे और पांच लोग अप डाउन अप डाउन कर रहे थे । बिल्कुल मिलिट्री की तरह । लेकिन किसी के पास भी तन पर ढंकने के लिये पयार्प्त कपडे नही थे । मैने पूछा कि बिलाइ यह जो १४ साल का लडका है नक्सली क्यूं बन गया ...दबंगों ने इसके पूरे परिवार को मार डाला जमीन हडपने के खातिर इसके पास उन लोगों से लडने की औकात नही थी इसलिये ये नक्सली हो गया ...मैनें फिर कहा कि ये बालक जिसके दूध के दांत भी ठिक से नही उगे है ...इसकी बहन के साथ दबंगों ने बलात्कार किया और बहन ने खुदकुशी कर ली । इसी तरह की कहानी सभी लोगों की थी । खुद में इतना ताकत नही था कि वो उन दबंगो से लड सकें इसलिये थाम लिया हाथ नक्सलपंथ का । &lt;br /&gt;( शेष जारी है । )&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-3689121667181812321?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/3689121667181812321/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=3689121667181812321' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3689121667181812321'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3689121667181812321'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/12/blog-post.html' title='एक नक्सली की कहानी'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-1829401530309493643</id><published>2009-08-25T06:34:00.000-07:00</published><updated>2009-08-25T06:38:22.841-07:00</updated><title type='text'>आनंद जैसी फिल्में बार बार नही बनती । पार्ट-१</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SpPpLvQFUlI/AAAAAAAAAFY/t4k83oMPTfg/s1600-h/Anand_film.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5373895168254890578" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 252px; CURSOR: hand; HEIGHT: 250px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SpPpLvQFUlI/AAAAAAAAAFY/t4k83oMPTfg/s320/Anand_film.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;गीतकार गुलजार की ७३ वीं वर्षगा‌ठ पर विभिन्न चैनल अलग स्टोरी चला रहे थे । एक चैनल में आनंद का वो गीत जिंदगी कैसी है पहेली ...चल रहा था ..पैकेज में बताया जा रहा था गुलजार का ये अमर गीत आज भी दिल की गहराइयों को छू जाता है । हकीकत है कि इस गाने के गीतकार योगेश है ..इसी फिल्म का एक और गीत कहीं दूर जब दिन ढल जाये..के लेखक भी योगेश ही है । मैने तेरे लिये ...ना जिया जाय ना ..और मौत ती एक पहेली है के गीतकार गुलजार है । हालांकि इन सभी गीतों का संगीत अमर संगीतकार सलील चौधरी ने दिया है । १९७२ में बनी इस फिल्म के सारे किरदारो को देखकर ऐसा लगता है कि वे सब हमारे और आपके बीच के हों । पहले इस फिल्म के लीड रोल के लिये महमूद और किशोर कुमार को ह्रषिकेश मुखर्जी ने चुना था । इस सिलसिले में जब ह्रषि दा किशोर कुमार के आवास पर पहुंचे तो दरवाजे पर खडे चौकीदार ने उन्हे वहां से भगा दिया । दरअसल किशोर कुमार का एक स्टेज कार्यक्रम किसी बंगाली सेठ ने करवाया था । जब पैसे की भुगतान की बात आयी तो बंगाली सेठ ने तयशुदा पैसे नही दिये । किशोर कुमार के बारे में ये सबको पता है कि वो अपने मेहनताने में से एक रुपया भी कम नही लेते थे ..यहां तक कि कटे फटे नोट भी वो स्वीकार नही करते थे । उस बंगाली सेठ से किशोर दा की मारपीट भी हो गयी थी थी । तब किशोर दा ने अपने दरबान को ये स्पस्ट आदेश दे रखा था कि किसी भी बंगाली को घर के अंदर नही घुसने देना । जैसे ही ह्रषि दा ने अपना नाम मुखर्जी बताया दरबान ने उन्हें खदेड दिया । ह्रषि दा इस घटना से इतना आहत हुये कि उन्होने निश्चय किया कि इस फिल्म में किशोर कुमार को तो कभी नही लेंगे। बाद में महमूद से भी बात नही बनीं और इस फिल्म में दो नये अदाकार अमिताभ और राजेश खन्ना को ह्रषि दा ने लिया ।बाबू मोशाय राजकपूर ऋषि दा को कहा करते थे उसी से प्रभावित होकर निर्देशक महोदय ने बाबू मोशाय का करैक्टर आनंद में रखा । बाबू मोशाय उस दौर में एक प्रतीक बन गया था राजेश खन्ना और अमिताभ के संदर्भ में ।&lt;br /&gt;अगली बार आनंद से जुडी कुछ और बातें )&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-1829401530309493643?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/1829401530309493643/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=1829401530309493643' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1829401530309493643'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1829401530309493643'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='आनंद जैसी फिल्में बार बार नही बनती । पार्ट-१'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SpPpLvQFUlI/AAAAAAAAAFY/t4k83oMPTfg/s72-c/Anand_film.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-3704922507211257720</id><published>2009-07-28T02:49:00.000-07:00</published><updated>2009-07-31T00:41:11.142-07:00</updated><title type='text'>हमारे जनप्रतिनिधी</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/Sm7LE0HJ6HI/AAAAAAAAAFQ/7nRKY8AjMdA/s1600-h/pawan.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5363447489813407858" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 234px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/Sm7LE0HJ6HI/AAAAAAAAAFQ/7nRKY8AjMdA/s320/pawan.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;( ये दोनो प्रसंग सिनापा जी ने हमें भेजा है ॥आपके सामने रखने  में मजा आयेगा । ) &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;( एक)&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;बिहार में संविद की सरकार गिर गयी थी । शोषित दल की सरकार बनी थी । उस मंत्रीमंडल में एक मंत्री किसी मठ के महंत थे । महंथ जी के पास एक फाइल आयी । फाइल चूंकी महत्वपूर्ण थी इसलिये सचिव महोदय महंथ जी चैम्बर में स्वंय चले गये और महंथ जी से कहा कि महोदय एक बहुत ही महत्वपूर्ण फाइल हमने आपके यहां नोट देकर भेजा है । कृप्या इस फाइल पर पर कारवाइ करके वापस लौटाया जाय। सचिव के जाने के बाद मंत्री ने फाइल मंगवाया । उसको उलट पुलट कर देखा और रख दिया । थोडी देर के बाद एक सहायक आया और मंत्रीजी से बोला कि हुजूर फाइल सचिव महोदय साहब मंगवायें है । मंत्री जी ने फाइल को फिर उलट पुलट कर देखा और फिर वहीं रख दिया । फाइल चूंकि अर्जेन्ट थी इसलिये सचिव महोदय स्वंय महंथ जी के कमरे में आ गये और फाइल के लिये याचना की । महंथ जी विफरते हुये बोले ॥बार बार फाइल के लिये आदमी भेज रहे है ? फाइल उछालकर बोले ...कहां है नोट ? कांग्रेसियों को आप लोगों ने बहुत ठगा है ॥आप हमें ठगने चलें है । हम महंथ है ..ठगाने वाले नही है ...। कहां आपने फाइल में नोट दिया है और बार बार तगादा किये जा रहें है । पहले तो सचिव महोदय हक्का बक्का रह गये । तुरंत बात उनकी समझ में आ गयी । सचिव महोदय ने महंथ जी को समझाया कि फाइल पर लिखने को नोट देना कहा जा ता है । मंत्री जी सचिव महोदय का मुंह ताकते रह गये । उन्होने कहा महाराज ऐसा था तो पहले ही बता देते ना कि दस्तखत करना है । बार बार नोट नोट क्या चिल्ला रहे थे ।सचिव महोदय संचिका लेकर बाहर निकल गये और पहला काम किया कि जिस वाकये को प्रधान सचिव को सुनाया बाद में बात फैली तो अखबारों में भी छपी । &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;(दो) &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;ललित नारायण मिश्रा समस्तीपुर बम - विस्फोट में घायल हो चुके थे । समस्तीपुर से दानापुर लाने के क्रम में उनकी मौत हो गयी । अब्दुल गफूर सरकार ने घोषणा की कि जो भी एल एन मिश्रा के मौत के रहस्य का अनावरम कर देगा उसे पच्चीस हजार रुपया नगद इनाम और पुलीस के आदमी को प्रमोशन दिया जाएगा । समस्तीपुर के तत्कालिन एसपी ने रहस्य का खुलासा कर दिया । घोषणा के अनुसार गफूर कैबिनेट ने उक्त एसपी को नगद इनाम सहित डीआजी बनाने की घोषणा कर दी । दूसरे ही दिन गफूर मियां को उनके पद से हटा दिया गया । जगन्नाथ मिश्रा मुख्यमंत्री बन गये । उन्होने पहला काम किया । गफूर मियां के मंत्रीमंडल के निर्णय को तत्काल निरस्त कर दिया और मामले को सीबीआइ को सौंप दिया । मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अब्दुल गफूर मुख्यमंत्री आवास से दो अटैची हाथ में लेकर सडक पर आयें और रिक्शा पकडकर अपने निजी आवास में पहुंचे । उनका ड्राइवर अनुरोध करता रहा लेकिन गफूर साहब &lt;span class=""&gt;ने कहा &lt;/span&gt;   कि कार मुख्यमंत्री का है और मैं अब मुख्यमंत्री नही रहा । &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-3704922507211257720?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/3704922507211257720/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=3704922507211257720' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3704922507211257720'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3704922507211257720'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/07/blog-post_28.html' title='हमारे जनप्रतिनिधी'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/Sm7LE0HJ6HI/AAAAAAAAAFQ/7nRKY8AjMdA/s72-c/pawan.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-656892547433010789</id><published>2009-07-23T23:48:00.000-07:00</published><updated>2009-07-26T04:16:42.841-07:00</updated><title type='text'>सूर्यग्रह्ण के तीन मिनट</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/Smw6fgXgrnI/AAAAAAAAAFI/s4EQUtEeC1Y/s1600-h/sun.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5362725569230319218" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 150px; CURSOR: hand; HEIGHT: 113px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/Smw6fgXgrnI/AAAAAAAAAFI/s4EQUtEeC1Y/s320/sun.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;(अभी मैं तारेगना में ही हूं। सूर्यग्रहण के बाद तारेगना को सब लोग जान गये है । आर्यभट्ट् के बारे में इसी शहर के रिसर्चकर्ता सिद्शेश्वर नाथ पांडेय हों या यूपी के प्रताप गढ में जन्में और तारेगना को अपनी कर्म स्थली बनाने वाले नारायण जी हों । नारायण जी एक बहुत अच्छे कवि भी है ..२२ जुलाइ को तारेगना के पूर्ण सूर्यग्रहण को देखा और एक छोटी कविता को हमारे पास भेजा है । हम उसे प्रकाशित कर रहें है । )                             &lt;br /&gt; &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;कौतुक विस्मय ललक पल पल छलक छलक ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;अद्भुत स्पन्दन ...अभिनंदन अभिनंदन शुभ शुभ पूर्ण सूर्यग्रहण ... अभिनंदन&lt;br /&gt;अपलक नयन गगन गगन &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;छितीज चरण चरण &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;पल पल परिवर्तन &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;मन्द मन्द सिहरन सिहरन , &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;सुन मौन&lt;/span&gt; गगन का उद्भोदन &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;कर &lt;span class=""&gt;वंदन .....&lt;/span&gt; अभिनंदन अभिनंदन&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;भय-मान भयानक कृष्णावरण &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;पूर्ण प्रकाश वृत-चन्द्रशयन &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;वृन्द विहग सब विस्मित- &lt;span class=""&gt;शंकित सुन&lt;/span&gt; पद्चाप&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;काल - व्याल सन्निकट मरण &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;पर पायें तीव्र त्वरण अभिनंदन अभिनंदन ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;गर्भ ब्रहांड व्यवस्थित&lt;u&gt; कालक्रम &lt;/u&gt;गति नियम ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;अनवरत &lt;span class=""&gt;स्वंय अनुपालन &lt;/span&gt;व्यतिक्रम &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;प्रमाण प्रत्यछ पवन ॥&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;विभु को कर हर प्राण नमन &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;अभिनंदन अभिनंदन ॥ ॥&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;शुभ शुभ पूर्ण सूर्यग्रहण &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-656892547433010789?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/656892547433010789/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=656892547433010789' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/656892547433010789'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/656892547433010789'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/07/blog-post_2234.html' title='सूर्यग्रह्ण के तीन मिनट'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/Smw6fgXgrnI/AAAAAAAAAFI/s4EQUtEeC1Y/s72-c/sun.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-1211891472512086725</id><published>2009-07-23T05:25:00.000-07:00</published><updated>2009-07-23T23:48:05.675-07:00</updated><title type='text'>२२-७ के बाद का तारेगना</title><content type='html'>सारे विश्व की नजर तारेगना पर गडी थी । प्रकृति को ये रास ना आया ..२१ की शाम को वहां खूब बारिश हुइ..रात १२ बजे तक पूरा आकाश बादलों से ढका था ..सुबह के तीन बजे आसमान बिल्कुल साफ ..स्पेस के पंडितों के लिये ये लम्हा आनंददायी था । लोग खुश थे कि आज सदी की ये विशेष खौगोलिय घटना का आनंद वे मजे से ले सकते है । सुबह के साढे चार बजनेवाले थे कि अचानक बादलों का घेरा एक बार फिर आकाश में छाने के लिये व्याकुल हो उठा और देखते ही देखते बादलों के पूरे साम्राज्य ने आकाश को फिर से ढक लिया । उसके बाद उस मनहूस बादल ने तो पूरा खेल ही बिगाड दिया ...६ बजकर २४ मिनट का वो भी दृश्य सामने आया जब सुबह की लालिमा धीरे धीरे गोधूली वेला की ओर जाती देखी गयी..और अचानक एक बार फिर पृथ्वी रात के अंधेरें में लुप्त हो गइ ..बडा ही विहंगम दृश्य था ..तापमान अचानक ४ से ५ डीग्री निचे चला गया ..वहां उपस्थित ढाइ लाख लोगों ने इस घटना का भरपूर मजा लिया ।विग्यान जगत के लोग निराश जरुर हुये लेकिन भारत से बाहर के लोगों से हमने पूछा कि आज का ये शो आपको कैसा लगा ..उनका जबाब था अद्भभुत । उन्हें ये मलाल नही थी कि हमलोगों ने पूर्ण सूर्यग्रहण को नही देखा बल्कि ३ मिनट ३८ सेकेंड का वो लम्हा अद्भुत था जब लोगों ने दिन मे ही तारों का दीदार किया । खैर तारेगना जो एक छोटा सा गांव था आज खबरों में नही है लेकिन इस विशेष खौगोलिय घटना का केंद्र बनने के बाद आर्यभट्ट की इस नगरी को विश्व मे एक अलग पहचान जरुर बन गइ है । लगभग तीन लाख लोग इस छोटे से शहर में अपनी उत्सुकता के पंख को लगाये शाम से ही एक स्थान पर जमा होकर सूर्यग्रहन का इंतजार करते देखना अपने आप में एक विहंगम दृश्य को निहारने के जैसा था । स्टेशन का नाम तारेगना है क्यूंकि तारेगना गांव के जमींदारों ने अंग्रेजों को स्टेशन के निर्माण के लिये जमीन इसी शर्त पर दिया था कि इसका नामकरण मेरे गांव पर होना चाहिये ..शहर का नाम मसौढी है ..जब तारेगना का नाम विश्व फलक पर अपनी चमक बिखेर रहा है तो अब मसौढी के लोग भी पूरे शहर का नाम तारेगना मे तब्दिल करने पर राजी हो गये है । मसौढी का नाम आते ही इसमें नक्सलवाद की बू आती है क्यूंकि बिहार में नक्सलवाद की जन्मस्थली मसौढी ही रही है ऐसे में मसौढीवासियों के लिये तारेगना का खगोलविग्यान का केंद्र में होना खूब भा रहा है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-1211891472512086725?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/1211891472512086725/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=1211891472512086725' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1211891472512086725'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1211891472512086725'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/07/blog-post_23.html' title='२२-७ के बाद का तारेगना'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-3294154936986467389</id><published>2009-07-07T01:24:00.000-07:00</published><updated>2009-07-07T01:28:41.429-07:00</updated><title type='text'>कुत्ता साधु को देखकर क्यूं भौंकता है ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SlMHK6szqrI/AAAAAAAAAFA/MqkPec95BF4/s1600-h/sadhu.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5355632266010929842" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 214px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SlMHK6szqrI/AAAAAAAAAFA/MqkPec95BF4/s320/sadhu.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;बिहार के छपरा , सिवान और पूर्वांचल के इलाके में शादियों में होने वाले नाच का कोइ तोड नही था । गाने बजाने के साथ लौंडा का नाच बहुत प्रसिद्ध था । उसमें कलाकारों के द्वारा नाटक का मंचन किया जाता था जो सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत होते थे । यूं कहे तो भिखारी ठाकुर के द्वारा जो नींव डाली गयी थी उन्हीं परंपराओं का निर्वहन उस स्थान के कलाकार करते रहे । हालांकि आज उस नाटक शैली की जगह फूहड औरकेष्ट्रा ने ले ली है । बचपन में उसी नाच का एक छोटा सा नाटक हमने देखा था जो आज तक याद है । नाटक था तीन सवाल ? पहला ..कुत्ता साधु को देखकर क्यूं भौंकता है ? कुत्ता सडक के बीचो-बीच क्यूं बैठता है ? कुत्ता उंची जगह को देखकर ही लघुशंका क्यूं करता है । कुत्ता साधु को देखते ही भौंकने लगता है कि महाराज आपकी जगह यहां नही है आप का तो काम तपस्या करना है ..इश्वर की सेवा करना है ..आप को तो जंगल में होना चाहिये फिर आप दुनियादारी की भीड में क्या कर रहे है।कुत्ता धरती को अपनी माता मानता है फिर भला उसी माता के शरीर पर पेशाब कैसे करें ।कुत्ता सडक के बीचों बीच इसिलिये बैठता है कि इसी मार्ग से संत , साधु , महात्मा के चरण धूल पडे है उन्ही को पूजता है ..कुत्ता चाहता है कि इस जन्म से मुक्ति पाकर इश्वर कहीं उन्हीं महात्माओं के चरणों की धूल में सेवा करने का अवसर दे दें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-3294154936986467389?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/3294154936986467389/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=3294154936986467389' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3294154936986467389'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3294154936986467389'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/07/blog-post.html' title='कुत्ता साधु को देखकर क्यूं भौंकता है ?'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SlMHK6szqrI/AAAAAAAAAFA/MqkPec95BF4/s72-c/sadhu.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-3804003478715161046</id><published>2009-05-26T04:06:00.000-07:00</published><updated>2009-05-26T04:34:52.764-07:00</updated><title type='text'>रात को मैनें मुजरा देखा</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/ShvTwI9ZDiI/AAAAAAAAAE4/PO3Gf57SL1Y/s1600-h/mina+kumari.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5340094607170014754" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 124px; CURSOR: hand; HEIGHT: 82px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/ShvTwI9ZDiI/AAAAAAAAAE4/PO3Gf57SL1Y/s320/mina+kumari.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;बनारस की सुबह ..अवध की शाम के बारे में सुना था । हमारे एक दोस्त ने मुझे बताया कि भाइ उसके साथ अगर आपने सीताराम पुर का मुजरा नही देखा .तो शुरु के दोनों जुमले अधूरें है । हमारे वो अजीज मित्र एक बार मुझे ले गये सीतारामपुर । फिल्मों में मुजरें का सीन देखा करता था । नर्तकी का नाचना ..मसनद लगाकर जमींदार टाइप रइसों का महफील में बैठना ..जाम और पान के साथ वाह वाह कहना आदि दृश्य मेरे दिमाग में नाच रहे थे । जैसे ही शहर में हमने प्रवेश किया ..तबले की थाप और हारमोनियम की आवाज यह इशारा कर रहे थे कि आप निश्चिचित जगह पर पहुंच गये है । हमलोगों ने अंदर प्रवेश किया ...वो उस इलाके की प्रसीद्ध नृत्यांगना या आप जो कह लें ..समाज उसे यह शब्द नही देगा । मोहतरमा ने आदाब कहकर हमलोगों का स्वागत उसी अंदाज में किया जिस तरह की अदा ऐतेहासिक सिरियलों में बादशाहों के लिये कनीज किया करती है । तुरंत बंगाल पुलीस की गाडी वहां आ गइ । मोहतरमा ने १०० रु का कर अदा किया पुलीसवालें वहां से चले गये । बहुत छोटा कमरा था ...मेरे दिमाग में तो पाकिजा वाली हीरोइन मीना कुमारी वाला लंबा सा बरामदा ..पर्दा ..बगैरह बगैरह घूम रहा था । खैर ..तबला वाला बजैया आ गया जो उम्रदराज हो चुका था ..साथ में हारमोनियम मास्टर और बैंजो वाला । मोहतरमा ने डांस शुरु किया । डांस इसलिये कह रहा हूं क्यूंकि अब मुजरे में छाडे रहियें ..और इन्हीं लोगों ने की जगह ...जस्ट चियां चियां ..और ना ना ना नो इंट्री जैसे गानों ने ले रखी थी । डिस्कों और पता नही नये नये जमानें वाले फिल्मी गीतों पर डांस करते हुये प्रत्येक गानों पर २०० रु की छूट भी देनी पड रही थी ...मैने कहा कोइ पुराना फिल्मी गीत गाते तो बेहतर होता ...तबला मास्टर ने कहा कि हूजूर अब पुराने कद्रदान कहा रह गये ..महफिल तो बेनूर सी हो गइ है ..और ये ( यानि नर्तकी ) भी तो नये जमाने वाली है । १० गानें हुये थे और मेरे जेब से २००० रुपये जाया हो चुके थे । हने सोचा इसी महफिल और मुजरे में तो कइ राजवाडे और घराने लूटकर खाक हो गये चलो भागों यहां से और यह मुजरा मेरे जिंदगी का पहला और अंतीम हो गया ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-3804003478715161046?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/3804003478715161046/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=3804003478715161046' title='13 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3804003478715161046'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3804003478715161046'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/05/blog-post.html' title='रात को मैनें मुजरा देखा'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/ShvTwI9ZDiI/AAAAAAAAAE4/PO3Gf57SL1Y/s72-c/mina+kumari.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>13</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-5150222819327997599</id><published>2009-04-26T03:44:00.000-07:00</published><updated>2009-04-26T03:58:18.226-07:00</updated><title type='text'>केरल जहां चुनावी मुद्दे  राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय है ।</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SfQ892kICFI/AAAAAAAAAEo/c_G-xFn5nJs/s1600-h/shashi-tharoor-6409313.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5328951292402862162" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 313px; CURSOR: hand; HEIGHT: 234px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SfQ892kICFI/AAAAAAAAAEo/c_G-xFn5nJs/s320/shashi-tharoor-6409313.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;२० लोकसभा सीटों वाले केरल में लोकसभा चुनाव एक चरण में ही खत्म हो गये है । मीडिया में राजनीतिक रसूख रखने वाले राज्यों की तो खूब चर्चा होती है लेकिन साउथ इंडिया के इस राज्य पर राष्ट्रीय मीडिया ने ज्यादा तवज्जों नही दी । भला हो शशी थुरुर की तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस की उम्मीदवारी का जिसकी बजह से यह राज्य राष्ट्रीय मीडिया में थोडा स्पेस पा सका। यहां कहा जाता है कि एक बार तू तो दूसरी बार मैं। पिछली बार सीपीएम की अगुवाइ वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने लगभग क्लीन स्वीप किया था ..२० में से १९ । एक सीट पर कांग्रेस की अगुवाइ वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के इंडियन मुस्लिम लीग के उम्मीदवार और वर्तमान में विदेश राज्य मेंत्री ई. अहमद मंजेरी सीट से जीत पाये थे । लगभग बीसों लोकसभा सीटों में कंपेनिंग एक तरह की । मुद्दों के क्या कहने ...अगर उत्तर भारत की बात करें तो राम और रोटी के साथ साथ नाली और गली भी लोकसभा चुनावों के मुद्दे होते है । यहां मुद्दे अलग किस्म के थे ..मसलन इजरायल सरकार के द्वारा गाजा पर हमले कर निर्दोष मुसलमानों का खून बहाया जा रहा है ..केंद्र सरकार का इस पर क्या स्टैंड है ....भरत अमरीकी परमाणु करार से भारत को क्या फायदे होने वाले है ....कांग्रेस को प्रो इजरायल बताने वाला लेफ्ट यह बताये कि बंगाल के भूतपूर्व मुख्यमंत्री २० लोगों के बिजनेस डेलीगेशन को लेकर इजरायल में क्या करने गये थे । चुनाव की तिथी घोषित होने के महज २ दिन पहले भारत सरकार ने इजरायल के साथ बडा मिसाइल डील क्यूं किया ? हालांकि स्थानिय मुद्दों की बात करें तो उनमें दो बडे ही महत्वपूर्ण थे । पहला ऐसएनसी लेवनीन डील जिसमें कहा जाता है कि कनाडा की कंपनी से हुए इस डील में तत्कालिन उर्जा मंत्री और वर्तमान में स्टेट सीपीएम सेकेरेट्री पिन्नारी बिजयन की कथित भूमिका पर राज्य सरकार के द्वारा लीपापोती की कोशिश की गयी है । दूसरा सबसे अहम मुद्दा यूडीएफ का एलडीएफ पर था कि लेफ्ट ने चुनावी लाभ के लिये अपने सिद्दांतो की बली देकर पीडीपी यानि पिपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विवादस्पद नेता अब्दुल नसीर मदनी के साथ चुनावी तालमेल किया । ये वही मदनी है जिनपर १९९६ में हुए कोयंबतूर बम व्लास्ट का दोषी माना गया था और बाद में आठ साल की सजा भी हुइ थी । हालांकि बाद में कोर्ट इन्हें बेकसूर मानते हुए बरी कर दिया था । अगर पिछले विधानसभा चुनावों की बात करें तो कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार के मुख्यमंत्री ओमन चांडी के साथ मदनी के बडे बडे पोस्टर थे और जनता से यह कहा गया कि मदनी को झूठे आरोपों के तहत फंसाया गया है । हालांकि इस चुनाव में चांडी मतदाताओं से अपनी भूल के लिये माफी मांगते नजर आये । मदनी से जब हमारी बात हुइ तो मदनी ने कहा कि मुझे यूडीएफ के द्वारा फंसाया गया । मैं अगर अलगाववादी हूं तो यूडीएफ के परम सहयोगी इंडीयन मुस्लिम लीग क्या है ? कायदे आजम के द्वारा स्थापित इस पार्टी का झंडा आज भी पाकिस्तानी है । खैर पिनारी ने इस चुनाव में एक बहुत बडा जुआ खेला है ...लेफ्ट ने अपनी कूटनीति के तहत मुस्लिम लीग को घेरने के लिये पीडीपी को आगे किया है ..हालांकि इसका परिणाम यह हुआ है कि मल्लपुरम से मुस्लिम लीग के टिकट पर चुनाव लड रहे ई अहमद और पुनानी से किस्मत आजमा रहे इटी बशीर को पीडीपी की बजह से काफी पसीना बहाना पड रहा है । कहा जाता था कि बनातवाला हो या सुलेमान सेठ एक बार नामांकन करने आते थे और दूसरी बार जीत का प्रमाणपत्र लेने । आपको याद होगा कि पुनानी सीट को लेकर सीपीआइ ने पूरे राज्य में अकेले चुनाव लडने की घोषणा कर दी थी ..हालांकि बाद में समझौते के तहत सीपीएम ने सीपीआइ को वायनाड जैसी जोखिम भरी सीट दे दी वही पुनानी सीट पीडीपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार रंडथानी के लिये छोड दी । मल्लपुरम में हमने ई अहमद के बडे बडे कट-आउट देखें जिसमें अहमद यासर अराफत के साथ गले में गले डालकर शायद मतदाताओं को ये जता रहे थे कि फिलीस्तीन के सच्चे हितैषी वही है । उधर कांग्रेस के तिरुवनंतपुरम से उम्मीदवार शशी थुरुर को विरोधियों ने घेर रखा था उनपर आरोप लगाया जा रहा था कि उन्होने अपने एक लेख में इजरायल सरकार की वंदना की थी । थुरुर का कहना था कि मैनें हजारों लेख लिखें अगर उसमें से पांच लाइन इजरायल सरकार की किसी खूबी के बारे में रेखांकित किया तो विरोधी लोग उसी को लेकर मेरे पिछे पड गये है । वहां के लोगों की मानें तो उनका कहना था कि यहां के मतदाता विधानसभा चुनावों में सीपीएम के साथ तो हो जाते थे लेकिन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को सपोर्ट करते थे...बजह थी कि केंद्र की राजनीति में सीपीएम की किसी भूमिका का ना होना । हालांकि सन १९९६ के लोकसभा चुनावों के बाद जिस तरह से तीसरे मोर्चे की सरकार बनाने में लेफ्ट ने हरकिशन सिंह सुरजीत की अगुवाइ में किंग मेकर की भूमिका निभाइ तब से केरल के मतदाताओं को लगा कि लेफ्ट भी केंद्र की राजनीति में भूमिका निभा सकती है । उसके बाद से लोकसभा के चुनावों में लेफ्ट का प्रदर्शन निरंतर बेहतर होता गया । शायद यही कारण है कि वर्तमान तीसरे मोर्चे के घटक दल भले ही केंद्र में अपनी भूमिका को लेकर ओपेन है लेकिन लेफ्ट नन कांग्रेस और नन बीजेपी की सरकार बनाने के लिये ज्यादा मुखर है । &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-5150222819327997599?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/5150222819327997599/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=5150222819327997599' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5150222819327997599'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5150222819327997599'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/04/blog-post_26.html' title='केरल जहां चुनावी मुद्दे  राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय है ।'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/7322247590853519892/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=7322247590853519892' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7322247590853519892'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7322247590853519892'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/04/blog-post.html' title='वशिष्ठ बाबू दिल्ली के एक अस्पताल में एडमीट'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' 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लोगों ..या दे दी हमें आजादी ..या आओ बच्चे तुम्हें दिखायें ..। ऐसा लगता है कि कवि प्रदीप के बाद फिल्मी गीतों में देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों का टोटा पड गया । देश आगे बढा लोग विकास के पथ पर हम आगे बढते गये हिन्दी फिल्मों ने तकनीक और आधुनिकता की सारी हदें पार कर दी । लेकिन राष्ट्र प्रेम से भरे गीत शायद कवि प्रदीप के अवसान के साथ ही खत्म हो गये । हो सकता है कि वक्त का तकाजा हो जब राष्ट्र प्रेम से संबंधित गीत उस समय बहुत ज्यादा प्रासांगिक हो जब देश अग्रेजों के खिलाफ स्वाधिनता की लडाइ लड रहा था । हालांकि १५ अगस्त को स्वाधिनता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस आज भी मनाये जाते है ..वक्त बदला और समय की मांग भी तो क्या हम सिर्फ इतना कह कर संतोष जता सकते है कि वह समय मांग कर रहा था ऐसी गीतों के जनमने का । चलिये इसी बहाने कवि प्रदीप जी को याद कर लिया जाय । ६ फरवरी १९१५ को मध्यप्रदेश में जन्में पंडित रामचंद्र दिव्वेदी से प्रदीप बनने की कहानी कम दिलचस्प नही है । कवि सम्मेलनों और मुशायरों में शिरकत करने वाले पंडित जी को किसी ने मिलवाया उस समय के महान फिल्मकार हिमांशु राय से ..हिमांशु राय उस वक्त काफी परेशान थे क्यूंकि उनकी लगातार छः फिल्में बुरी तरह पिट गयी थी । पहले पंडित जी का इंट्रव्यू हुआ ..उनसे कहा गया कि आशा है आप सेलेक्ट कर लिये जायें। पंडित जी को लगा कि देखने में भला हूं शायद यहां हीरो के लिये मेरा चयन किया जाएगा । बाद में बताया गया कि उनका चयन गीतकार के रुप में २०० रुपये मासिक पर हो गया है । १९३९ में अशोक कुमार और देविका रानी अभिनीत फिल्म कंगन बेहद सफल हुइ । इस सफलता के पिछे कवि प्रदीप के लिखे हुए चार गानों ने तो मानो पूरे देश में ही धूम मचा दी । फिर तो प्रदीप बढते रहे और बढते ही गये । १९४० में बंधन फिल्म का हिट गीत ..चल चल रे नौजवान ..और १९४३ में किस्मत फिल्म का गीत ..दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है ..इस गीत ने तो आजादी के आंदोलन में संजीवनी का काम किया ..थियेटरों जब ये फिल्म चल रही होती थी तो इस गाने को दर्शकों की विशेष फरमाइश पर दुबारा रिबांइड करके बजाना पडता था । बंबइ के एक थियेटर में तो यह फिल्म लगातार साढे तीन सालों तक हाउस फुल चलती रही। इस गीत की मकबुलियत की कीमत कवि प्रदीप को चुकानी पडी और अंग्रेजों ने उन्हें सलाखों के पिछे कर दिया । पुनर्मिलन , झूला , नया संसार , अंजान, किस्मत आदि के गीतों ने उनके कद को काफी उपर बढाया । मन्ना डे की आवाज में प्रदीप का लिखा गीत ...उपर गगन विशाल .....नेचर जो हमें गाड गिफ्ट के रुप में मिला है उसकी महत्ता को कितने सुंदर शब्दों में बताती है । विभाजन पर लिखा गया ..देख तेरे संसार की हालत ...उसी तरह बापू के सम्मान में ..दे दी हमें आजादी हो या आओ बच्चें तुम्हें दिखायें...कोइ लाख करें चतुराइ (चंडी राजा) या इंसान का इंसान से हो भाइचारा ..या पिंजडे के पंछी रे ..राष्ट्र-भक्ति और मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को एक सूत्र में पिरोने वाले इस अमर गीतकार का कोइ सानी नही । बात प्रदीप की हों और ऐ मेरे वतन के लोगों की बात ना हों तो कवि प्रदीप के बारे में कुछ कहना अधूरा रहेगा । माहिम के एक फुटपाथ पर सिगरेट के डिब्बे पर उन्होने इस ऐतेहासिक गानें को लिखा । पहले आशा भोंसले इस गाने को गानेवालीं थी लेकिन सी रामचंद्र और प्रदीप ने फैसला किया लता से इस गाने को गवांने के लिये । हिंदुस्तान और चीन के युद्ध में शहीदों को समर्पित लता जी के द्वारा गाये गये इस गीत ने २६ जनवरी १९६३ को दिल्ली के रामलीला मैदान में तत्कालिन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु को रुला दिया । इस गीत को कवि प्रदीप ..लता जी ..और सी रामचंद्र ने ..वार वीडो फंड बनाकर शहीदों को समर्पित कर दिया । इस गाने की रायल्टी सदा सदा के लिये शहीदों की विधवाओं को मिलती रहेगी । २५ अगस्त २००५ को मुंबइ हाइ कोर्ट ने एचएमवी कंपनी को १० लाख रुपये शहीदों के परिवारों को इस गाने की रायल्टी के रुप में अदा करने के निर्देश दिये । लगभग १७०० गाने को कलमबद्ध करने वाले इस महान गीतकार को १९९७ में दादा साहेब फाल्के अवार्ड से नवाजा गया । राष्ट्र प्रेम से लोगों के अंदर जोश का संचार करने वाले इस गीतकार का अंतीम समय काफी मुश्किलात और गुरबतों से जूझता हुआ बीता ....इस पिंजडे के पंछी का दर्द दुनिया नही समझ पायी ..और कवि प्रदीप यह गाते हुए इस दुनिया से विदा हो गये ...चल अकेला चल अकेला चल अकेला तेरा मेला पिछे छूटा राही चल अकेला।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-6766394158663897272?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/6766394158663897272/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=6766394158663897272' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/6766394158663897272'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/6766394158663897272'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/02/blog-post_16.html' title='पिंजडे का पंछी'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' 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/&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;छो‍टे शहरों से झोला उठाकर चलने वालों ने भारतीय क्रिकेट जगत को हाल के वर्षों में एक से बढकर एक सितारों को जगमगाने का अवसर दिया । भारतीय क्रिकेट का नया नगीना है फिरकी गेंदबाज प्रग्यान ओझा । अगर देखा जाय तो बिशन सिंह बेदी के रिटायरमेंट के बाद लेफ्ट आर्म स्पिनर के रुप में दिलीप दोषी , मनिंदर सिंह , वेंकटपती राजू , रवि शास्त्री , सुनील जोशी आदि ने भारतीय क्रिकेट को अपनी सेवाएं दी । हालांकि दिलीप दोषी पूर्ण रुप से गेंदबाज थे वहीं शास्त्री और सुनील जोशी आलराउंडर के रुप में भी याद किये जाते है । ओझा ने लंका के खिलाफ पिछले दो मैचों में जिस तरह का प्रर्दशन किया है वो भारतीय क्रिकेट के लिये शुभ संकेत है । लंका के खिलाफ तीसरे एक दिवसीय मैच में ओझा की गेंदों पर लंकाइ बल्लेबाज डांस करते नजर आये । इनकी गेंदो को जो टर्न मिल रहा था उसी पिच पर महान गेंदबाज मुरलीधरन और लंकाइ सनसनीखेज अजंता मेंडीस टर्न के लिये तरसते रहें। अगर गुरुवार को खेले गये वन डे पर निगाह डालें तो पांच ओवरों के बाद कप्तान धोनी ने ओझा के ओवरों को बचा के रखा और सहवाग के साथ दूसरे छोर पर युसूफ पठान को आजमाया । यह साबित करता है कि जब मैच में आगे हिंदुस्तान को मुश्किलात का सामना करना पडता तो तुरुप के इक्के के रुप में ओझा का इस्तेमाल किया जाता । ओझा फ्लाइट पर नियंत्रण रखने के साथ आर्मर का प्रयोग जब बीच बीच में बखूबी करते है । अपने ओवर की छः गेंदो को अलग वेरियेशन से गेंद डालना एक परिपक्व गेंदबाज की खूबी को ओझा साबित करते नजर आये । ५ सितंबर १९८६ को भुवनेश्वर में जन्में ओझा हैदराबाद की ओर से रणजी में खेलते है । सबसे पहले वो चयनकर्ताओं की नजर में तब आये जब उन्होने भारत की अन्डर-१९ टीम की ओर से खेलते हुए दो मैचों में २३ विकेट झटक डालें । एशिया कप २००८ में वो मेन्स इन व्लू के सदस्य बनें । आइपीएल में ओझा डेक्कन चार्जस की ओर से खेलते है हालांकि लीग में ये टीम बुरी तरह फ्लाप रही थी लेकिन ओझा ने अपनी टीम के लिये ११ विकेट झटककर अपनी विश्वसनियता को साबित किया । २२ वर्षिय ओझा प्रथम श्रेणी के ३२ मैचों में १२६ विकेट हासिल कर चुकें है । सचमुच ओझा भारतीय स्पीन गेंदबाजी के लिये भविष्य के उदयीमान सितारें है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SYwTS5UDY6I/AAAAAAAAAEY/rt6o2b9k_5E/s72-c/ojha.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-594024505297429399</id><published>2009-01-05T04:16:00.000-08:00</published><updated>2009-01-05T04:53:55.789-08:00</updated><title type='text'>टी.टी.एम यानि ताबडतोड तेल मालिश</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SWICz9ael_I/AAAAAAAAAEI/pQDQd_L3MUk/s1600-h/nitish_3.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5287792004168587250" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 260px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SWICz9ael_I/AAAAAAAAAEI/pQDQd_L3MUk/s320/nitish_3.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;खबर है पटना से । मशहूर चिकित्सक और राजनेता सीपी ठाकुर ने नीतिश कुमार को नोबेल पुरस्कार से नवाजने की मांग की है । मिलना भी चाहिये । रेलमंत्री और अब बिहार के मुख्यमंत्री । बिहार अब कुशासन से मुक्त होकर सुशासन की राह चल पडा है । अपराधी बिहार से भाग गये है । चैन और अमन की नयी धारा बह रही है , बिहार बाढ की विभिषीका से मुक्त होकर कृषि के मामले में आत्मनिर्भर होने को है । पटना की सडके हेमा मालिनी की गाल की चिकनाहट से भी चिकनी हो गइ है । मुख्यमंत्री के जनता दरबार की मिसाल तो दानी राजा भोज की दानवीरता और न्याप्रियता को भी तुच्छ बना रही है । और पुलीस प्रशासन के क्या कहने आजादी के दशकों बाद वह जनता के सच्ची सेवक की भूमिका में नजर आ रही है । रामराज्य देने का दिवास्वपन भाजपा ने भले ही देखा हो लेकिन हकीकत की कसौटी पर बीजेपी के छोटे भाई जद यू के करिश्माइ नेता नीतिश कुमार ने यह साबित कर दिया है कि मुश्किल कुछ भी नही सिर्फ वादों और आश्वासनों के पत्थर तो दिल से उछालों यारों। सबकुछ मान लिया जाये तो क्या सचमुच ये सारे तथ्य नीतिश जी को नोबेल पुरस्कार का हकदार बनाते है । वैसे सचमुच अगर इस प्रस्ताव के मसौदे को भारत सरकार स्वीडन भेज दें तो इसका सबसे कडा प्रतिरोध अमरिका के नवनियुक्त सदर बराक ओबामा करेंगे । आप पूछेंगे ऐसा क्यूं। जी हां भले मानस नीतिश जी ने अमरीकी चुनाव के दौरान ये घोषणा कर दी थी कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे अमरीका जाकर हिलेरी क्लिंटन के लिये एनआरआइ बिहारियों से समर्थन मांगेगे। खैर हिलेरी तो चुनाव मैदान से हट गइ। लेकिन विश्वस्त सूत्रों से ये पता चला है कि नीतिशजी के उस बयान से बराक ओबामा अभी भी नाखुश चल रहे है । जब विश्व का परम शक्तिशाली राष्ट्र का मुखिया ही इस रास्ते में अडचन लगा देगा तो भाइ नोबेल पुरस्कार तो भारत कुमार यानि सुशासन बाबू के हाथ में आने से रहा । अब जरा सीपी ठाकुर जी के आग्रह पर गौर फरमाया जाये . तो .लालू जी का मानना है कि लोकसभा चुनावों को देखते हुए पटना की सीट को नीतिश बाबू की तरफ से हरी झंडी मिल जाये तो ठाकुर जी का दावा बीजेपी पर आसानी से दबाब बनाने में काम आएगा । लालू जी ने ठाकुर जी के इस बयान को टी.टी.एम यानि ताबडतोड तेल मालिश कहा है ...आप क्या कहेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-594024505297429399?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/594024505297429399/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=594024505297429399' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/594024505297429399'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/594024505297429399'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2009/01/blog-post.html' title='टी.टी.एम यानि ताबडतोड तेल मालिश'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SWICz9ael_I/AAAAAAAAAEI/pQDQd_L3MUk/s72-c/nitish_3.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-5190202768232965316</id><published>2008-12-26T00:43:00.000-08:00</published><updated>2008-12-26T00:46:38.920-08:00</updated><title type='text'>शोले के महाराज</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SVSZ0Yf3ALI/AAAAAAAAAEA/dOdk49vdeOY/s1600-h/sholay.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5284017388020760754" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 97px; CURSOR: hand; HEIGHT: 140px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SVSZ0Yf3ALI/AAAAAAAAAEA/dOdk49vdeOY/s320/sholay.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;हमारे एक मित्र बनारस गये थे । उन्होने एक वाक्या सुनाया ..अच्छा लगा इसलिये आपलोगों के साथ भी शेयर कर रहा हूँ। सन १९७५ में शोले फिल्म की तैयारी चल रही थी ..जिपी सिप्पी इसे एक अनोखी फिल्म बनाना चाहते थे । खैर फिल्म अनोखी बनी भी । फिल्म के सीन में उन्हें घोडों के टाप की जीवंत आवाज चाहिये थी । लोगों ने सलाह दिया कि ऐसी आवाज तो बनारस के गोदइ महाराज के ही वश में है । सिप्पी ने उस महाशय से पूछा कितना पैसा लगेगा। खैर तीन चार लाख से अधिक भी सिप्पी देने को तैयार थे । गोदइ महाराज को इत्तला दी गयी कि बंबइ के बहुत बडे फिल्म मेकर अपनी फिल्म में आपके पास तबला बजवाने के लिये आ रहे है । स्वभाव से बेहद कंजूस गोदइ महाराज तैयार बैठे थे सिप्पी के लिये । सिप्पी बनारस पहुंचकर चल दिये गोदइ महाराज के यहां । महाराज ने सिप्पी साहब को अपने ड्रांइग रुम में बिठाया । ज्यादा बिजली के बील की खपत ना हो इसलिये वहां शून्य वाट का ही बल्ब हमेशा जलता था । सिप्पी साहब ने कहा महाराज फिल्म में आपसे तबले की थाप बजवानी है । महाराज बोले कि भाइ तबला बजवाना हो तो ठिक है और अगर खंजरी बजवाना हो तो सामने किशनवा ( किशन महाराज ) रहता है चले जाओं उसके पास । सिप्पी साहब ने कहा नही महाराज हम तो आप के पास आये है जितना आपको पैसा चाहिये ले लें। महाराज ने सोचा बढिया मुल्ला फँसा है ..बोले भाइ ४० हजार लूंगा । सिप्पी साहब ने हां कर दी । महाराज को लगा कि कितना बडा मूर्ख है । तुरंत मान गया ...ठिक है भाइ मैं ट्रेन से नही प्लेन से बंबइ जायेंगे । सिप्पी साहब ने कहा कोइ बात नही । फिर अचरज में पड गये महाराज ...बोले भाइ सिप्पी ऐसा करों कि ८ आदमी के प्लेन का भाडा मुझे नकदी दे दों । नकद पैसे भी मिल गये उन्हें। महाराज ने फिर कहा कि भाइ वहां फाइव स्टार होटल में हम लोग पांच दिन रुकेंगे । सिप्पी साहब ने कहा ठिक है । महाराज ने कहा कि उसका भी भाडा नकदी दे दो। वो पैसे भी मिल गये । सिप्पी साहब चले गये बंबइ। महाराज ने कहा कि कितना बडा मूर्ख है आसानी से ठगा गया । चय समय पर उन दिनों महाराज ने अपनी टीम के साथ ट्रेन में थर्ड क्लास का टिकट कटा कर पहुंच गये मुंबइ ..वहां उनका भतीजा रहता था उसी के यहां महाराज टिक गये । अमुक दिन पर महाराज को स्टूडियों ले जाया गया । सिप्पी साहब को बताया गया कि जब महाराज ट्रायल ले आप रिकार्डिंग आन कर दिजीयेगा। महाराज अपने तबले की थाप से सुनाने लगे ...देखो एक घोडा दौडेगा तो कैसे बजेगा ..और कइ घोडे दौडेंगे तो थाप क्या होगा । खैर रियाज खत्म हुआ ..तबतक रिकार्डिंग पूरी हो चुकी थी ।महाराज बोले चलो भाइ अब रिकार्ड करों मेरा रियाज खत्म हो गया । सिप्पी साहब ने कहा कि महाराज मेरा काम हो चुका अब आप चाहें तो जा सकते है । खैर सिप्पी साहब को फिल्म में एक ही घोडे को दौडाना था तबले की थाप पर ..लेकिन महाराज के अनोखे तबले की थाप ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होने फिल्म में सामूहिक घोडे के दौडने की भी आवाज को परदे पर दिखाया ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-5190202768232965316?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/5190202768232965316/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=5190202768232965316' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5190202768232965316'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5190202768232965316'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/12/blog-post_26.html' title='शोले के महाराज'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SVSZ0Yf3ALI/AAAAAAAAAEA/dOdk49vdeOY/s72-c/sholay.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-4372047849239301686</id><published>2008-12-08T22:50:00.000-08:00</published><updated>2008-12-08T23:12:33.050-08:00</updated><title type='text'>दलों के लिये आंखे खोलने वाला है यह परिणाम</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/ST4YfbnDsuI/AAAAAAAAAD4/Oh8HKJvTqhY/s1600-h/sheila1[1].jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5277682741591388898" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 140px; CURSOR: hand; HEIGHT: 82px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/ST4YfbnDsuI/AAAAAAAAAD4/Oh8HKJvTqhY/s320/sheila1%5B1%5D.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;( कुमार आलोक said... ) मुंबइ में आतंकी हमले के बाद मेरे एक पत्रकार मित्र ने दिल्ली से फोन किया मैं उस समय पटना में था । कांग्रेस निपट गइ भइया ..चारो स्टेट में बीजीपी को क्लीयर मैंडेट मिल गया । मेरा दोस्त बडे चैनल में है । हमें लगा कि सचमुच कांग्रेस के लिये यह कांड वाटरलू साबित हो गया । कुछ देर बाद मैं एक दोस्त के दूकान पर गया ..हमसे सीनियर है पेंट और लोहा लक्कट की छोटी दूकान चलाते है । मैने कहा भइया कांग्रेस निपट गइ दिल्ली से फोन आया है । उन्होने कहा कैसे । मैने बोला आतंक की जो घटना हुइ है मुंबइ में पव्लिक उसी के चलते काग्रेस के खिलाफ वोट देगा ।ज्यादा पढे लिखे नही है भइया बोले बाबू चुनाव में यह मुद्दा ही नही रहेगा ..लोगों के अपने स्थानिय मुद्दे होते है । यहां तो कांग्रेस के राज में होटल में आतंकी घटना हुइ ..उनके राज में तो संसद में ही आतंकी घुस गये थे । खैर ८ तारिख को पता चलेगा कि मेरे भाइ साहब सही थे चा फिर मेरा पत्रकार दोस्त ।&lt;br /&gt;December 6, 2008 7:36 PM)&lt;br /&gt;*****************************************************************************&lt;br /&gt;मैनें यह कमेंट रविश कुमार जी के व्लाग पर ६ दिसंबर को लिखा था । अब जबकि चुनाव परिणाम सामने है ..तो यह कहा जा सकता है कि देश का आम आदमी हम तथाकथित बुद्धीजीवियों से बेहतर पालिटिकल नालेज रखता है । पांचों राज्यों के चुनाव परिणाम ने यह साबित किया कि अगर कहीं गुड गर्वँनेंस है तो मतदाता उसको दुबारा सत्ता की सीढी पर आसानी से चढा देगा । बीजीपी ने आतंकवाद को मुद्दा बनाया , इंटरनल सिक्यूरीटी ...और पोटा जैसे मुद्दे शायद जनता के गले नही उतरे । दिल्ली में इस भरोसे पर रहे कि बीएसपी कांग्रेस का बैंड बजा देगी जिसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा यह भी आकलन गलत साबित हुआ ...और इसका उल्टा असर यह हुआ कि अल्पसंख्यक समुदाय पूरी गोलबंदी के साथ बीजेपी के खिलाफ हो गया । दिल्ली चुनाव के रोज जिस तरह के विग्यापन अखबारों में छपे कि आतंक की सरकार को वोट मत दें शायद वोटरों का टर्नआउट शीला जी के लिये सहानुभूती का सबब बन गया । खैर ये तो दिल्ली की बात हुइ । अगर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ की बात करें तो यह जीत बीजेपी के लिये ऐतेहासिक ही नही बल्कि यादगार है । अजीत जोगी जो स्वंयभू मुख्यमंत्री बनकर रमन सिंह को लबरा राजा का खिताब दे रहे थे ..जनता ने बता दिया कि लबरा यानि झूठा कौन है ? अजीत जोगी , श्यामाचरण शुक्ल और महेंद्र करमा एक दूसरे खो फूटी आंख नही देखना चाहते । रमन सिंह ने बडे पैमाने पर निवर्तमान विधायकों के टिकट काटकर युवाओं को मौका दिया ..लेकिन कांग्रेस यह हिम्मत नही दिखा पाइ । चुनाव परिणामों ने रमन सिं को बडा नेता बना दिया है । रही बात मध्यप्रदेश की रही वहां भी कांग्रेस खेमों में बंटी रही और शिवराज सिंह के कद में कोइ भी कांग्रेसी टिक नही पाया । शिवराज ने अपने कार्यकाल में बोला कम और किया ज्यादा .. मध्यप्रदेश के एक बडे कांग्रेसी नेता ने हमें बताया कि शिवराज सिंह व्यक्तिगत रुप से इमानदार है भले ही उनके मंत्रीमंडलीय सहयोगी भ्रष्ट ।लेकिन जनता ने इमानदार कप्तान पर पूर्ण भरोसा किया । रहीं बात राजस्थान की अगर वहां भी कांग्रेसी गुटों में नही बंटे रहते तो परिणाम कुछ और होता । एक बात इस चुनाव परिणाम से और उभकर सामने आइ कि मोदी अगर कद्दावर हाल में कद्दावर नेता बनकर उभरे है सिर्फ इस बिना पर कि गुजरात में लगातार तीसरी बार अपने दम पर भाजपा को उन्होने सत्ता में वापस लाया है तो कल के लिये शिवराज सिंह और रमन सिंह भी पार्टी के स्टार कंपेनर हो सकते है । और बात करें मिजोरम की तो वहां एंटी इंकंबेन्सी के फैक्टर ने कांग्रेस को शानदार जीत दिलवाइ । अंत में यह कहा जा सकता है कि कि बढिया काम करोगे जनता के नजदीक रहोगे तो इनाम अवश्य मिलेगा ..हाल के वर्षों में जो ट्रेन्ड रहा है चुनाव परिणामों का हालिया चुनावों में बदला है । तवक्कों की जानी चाहिये की राजनीति में अच्छे और पढे लोग जो सेवा की भावना को लेकर राजनीति की चौखट पर आये है उन्हें जनता सर आंखो पर बिठाएगी । &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-4372047849239301686?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/4372047849239301686/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=4372047849239301686' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/4372047849239301686'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/4372047849239301686'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/12/blog-post.html' title='दलों के लिये आंखे खोलने वाला है यह परिणाम'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/ST4YfbnDsuI/AAAAAAAAAD4/Oh8HKJvTqhY/s72-c/sheila1%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-2928415973917566078</id><published>2008-11-17T04:45:00.000-08:00</published><updated>2008-11-17T04:52:24.982-08:00</updated><title type='text'>छत्तीसगढिया सबले बढिया</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SSFow76l93I/AAAAAAAAADw/vrS-ssSaEcE/s1600-h/baster.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5269608228926650226" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 250px; CURSOR: hand; HEIGHT: 175px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SSFow76l93I/AAAAAAAAADw/vrS-ssSaEcE/s320/baster.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;एक बार आया था छत्तीसगढ ..थोडा दिन रायपुर में रुका और चला गया था । इस बार लगभग आधा छत्तीसगढ घूम गया । चुनाव कवर करने आया हूं। कांग्रेस और भाजपा यहां के प्रमुख राजनैतिक दल है ..लेकिन अगर नेताओं की बात करें तो बडे नेता या कहे कि उंची रसूख रखने वाले नेता यहां के बाहर के है । यहां की मूल जाति हाशिये पर है । बस्तर के पूरे इलाके में आदिवासियों का हथियार उठाना ये साबित करता है कि उन्हें राजनैतिक दलों से कोइ आशा नही रह गयी है । नया राज्य बनने के बाद यहां की अर्थव्यवस्था पर विल्डरों और प्रापर्टी डिलरों का लगभग कब्जा हो गया है । बिलासपुर के आसपास बडे कारखाने पर्यावरण कानूनों की धज्जीया उडा रहे है और सरकारी टैक्स की भी जमकर चोरी कर रहे है । अग्रवाल , खंडेलवाल , पाणडेय , चौबे आदि का राजनैतिक और सामाजिक रसूख है । विधानसभा के सदर प्रेम प्रकाश पांडे भिलाइ से जीतते है और रहने वाले गोरखपुर के है ..हालांकि अब वे यहां के निवासी हो चुके है । वैशालीनगर विधानसभा हल्के में गया ..वहां भाजपा की तेजतर्रार नेत्री सरोज पांडे का मुकाबला कांग्रेस के ब्रजमोहन सिंह से है ..सरोज वाराणसी की और ब्रजमोहन उन्नाव के ..वहां लड रहे चौदह प्रत्याशियों में १२ बनारस से है । मुख्यमंत्री रमन सिंह का मुकाबला वहां दो बार विधायक रह चुके उदय मुदलियार से है ..जानकर बडा आश्चर्य हुआ कि मुदलियार का पैत्रिक निवास तमिलनाडू में है । आदिवासियों के एक गांव में गया ..बडी दीन हिन स्थिती में गुजर बसर करने पर मजबूर है ...ऐसा लगभग प्रत्येक आदिवासी गांवों में आपको देखने को मिलेगा । परसापानी गांव का नाम है ..विलासपुर जिले में है । जब वहां के गिने चुने हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो जाता है तो ग्रामवासी एक गंदे पानी के नाले को रेत का मोटा बांध बांधकर बांध के दूसरी तरफ से बालू को खोदकर पानी पीते है ...वो पानी फिल्टर हो जाता है ...विल्कुल शुद्ध पानी की तरह हमने भी पीया ..मीठा लगा । सरकारों ने खूब योजनाए बनायी आदिवासियों के कल्यान के लिये ..लेकिन ऐसा लगता है कि उन योजनाओं के पैसे सेठ ., दलाल , साहूकारो और पालिटिसीयन की तिजोरियों में पहुंच गयी । ऐसे लोगों के घरों को हमने देखा ..आवाक रह गये ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-2928415973917566078?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/2928415973917566078/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=2928415973917566078' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2928415973917566078'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2928415973917566078'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/11/blog-post.html' title='छत्तीसगढिया सबले बढिया'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SSFow76l93I/AAAAAAAAADw/vrS-ssSaEcE/s72-c/baster.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-5695655779289151855</id><published>2008-10-28T07:59:00.000-07:00</published><updated>2008-10-28T08:02:22.079-07:00</updated><title type='text'>फिल्म इंडस्ट्री को कमजोर  किजीये ..एमएनएस को जबाब मिल जाएगा ।</title><content type='html'>एम एन एस का नामलेवा कोइ नही था ..बिहार के कतिपय नेताओं ने राज को अमर कर दिया , कांग्रेस को लगता है कि राज को प्रोत्साहित करने से शिवसेना का वोट बंटेगा और आनेवाले चुनावों में कांग्रेस इसका फायदा उढा लेगी । बिहार के विद्यार्थियों के साथ जो कुछ भी मुंबइ में हुआ वह भारत की अखंडता और एकता पर हमला है । यह देश किसी के वाप की जागिर नही है और कोइ भी व्यक्ति या पार्टी संविधान से उपर नही है । सोमवार का इनकांउटर भी महाराष्ट्र पुलिस की विभत्स तस्वीर को बयां करता है । बिहार के छात्रों ने जिस प्रकार से बिहार में तांडव मचाया उसकी भी जितनी निंदा की जाए कम है । उनके उग्र होने से खासकर वैसे लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पडा जो बडी मशक्कत से दो महिने पहले से अपनी टिकट रिर्जव करा अपने घरों को लौट रहे थे ।                      राज का सामना  या शिवसेना का जबाब यही हो सकता है ..जितना भी औकात बिहार और यूपी के लोगों में है उसका इस्तेमाल करों और सिनेमाघरों में हिन्दी फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाओं । तालाबंदी करो सिनेमा हाल और पीवीआर में । कम से कम बिहार और यूपी में तो लोग ऐसा कर ही सकते है । फिल्म इंडस्ट्री जैसे ही रसातल की ओर जाते दिखेगी ..राज तो क्या ..रिजनल राजनीति करने वालों की महाराष्ट्र में दुकानदारी बंद हो जाएगी । वहां की स्थानिय जनता ही राज और शिवसेना को उसकी औकात बता देगी ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-5695655779289151855?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/5695655779289151855/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=5695655779289151855' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5695655779289151855'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5695655779289151855'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/10/blog-post_28.html' title='फिल्म इंडस्ट्री को कमजोर  किजीये ..एमएनएस को जबाब मिल जाएगा ।'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-926926486207219638</id><published>2008-10-27T04:13:00.000-07:00</published><updated>2008-10-27T04:45:20.658-07:00</updated><title type='text'>रविश कुमार मीडिल क्लास के नही लगते ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SQWpjMBCv9I/AAAAAAAAADo/kq0o1QlC7W4/s1600-h/ravish.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5261798161638408146" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 150px; CURSOR: hand; HEIGHT: 150px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SQWpjMBCv9I/AAAAAAAAADo/kq0o1QlC7W4/s320/ravish.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;रवीश कुमार को जानता था ..एनडीटीवी के बाद उनकी खबरों और रपटों को भी देखने लगा । इलैक्ट्रानिक मीडिया में वैसे भी खबरें कहां होती है ...रावण ने यहीं अपने पांव रखे थे ..सरक गयी चुनरी रैंप पर ..खैर इसमें तह तक जाने की आवश्यकता नही । एक दिन हाफ एन आवर रवीश कुमार का आ रहा था ..मेरे कुछ पत्रकार दोस्त जो मेरे साथ काम करते है ..बोले आलोक देखो यार बहुत अच्छी डाक्यूमेंट्री है ..मैं टीवी से चिपका ...कुछ लोग रविश कुमार के नाम से चिढते थे ..पहले तो उन्होने कहा बंद करो टीवी ..चैनल चेंज करों ..जाहिर था वो सब मेरे मित्र अंग्रेजी जर्नलिस्ट थे ..हमारे यहां आधे आधे घंटे पर हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बुलेटिन प्रसारित होता है । खैर शुरु में तो उन अंग्रेजीदा पत्रकारों ने विरोध किया ..लेकिन जैसे जैसै कहानी आगे बढी ..सब के सब टीवी से चिपक गये । बात मीडिल क्लास के महानगर के समंदर में खो जाने की थी । एंकर कहता है कि मेरे चाचा ने अपनी बेटी की शादी के लिये गांव में कर्ज लिया था ...बडी जगहंसाइ हुइ थी ..कारें गिने चुने लोगों के पास होती थी ..लेकिन अब आम है । आज मेट्रों में सब कुछ उपलब्ध है ..लोन का पहाड जो आम आदमी के हाथ लग गया है ..हर चीज उपलब्ध है लोन पर ....प्रोग्राम खत्म हुआ ..सब को बडा अच्छा लगा ...उसी रात को सब एक महफिल में जुटे ...दो तीन भारी भरकम पत्रकार भी मौजूद थे ..अब हम सब यही चर्चा करने लगें ..वाह वाह ..क्या हाफ एन आवर था रविश कुमार का ..कोइ लोन वाले प्रसंग का जिक्र करता ...कोइ बजाज स्कूटर पर बैठकर रविश कुमार के जर्नलिस्टिक ऐप्रोच का बखान करता तो कोइ कुछ और भी...महफिल का एक बडा वक्त रविशकुमार के नाम खर्च हो गया ..भारी भरकम में से एक ने कहा ...शायद वो दूसरे की प्रशंशा सुनकर लगभग आपे से बाहर हो चुके थे ... बोले ..शर्म आनी चाहिये ..आप लोगों को .. कुछ करना नही चाहते ..अगर करतें तो रविश कुमार भला किस खेत की मूली है ..हिंदी जर्नलिस्म में आखिर रखा ही क्या है ...हम बोल नही सकते थे ..क्यूंकि कुछ भी बोलना आफत को न्यौता देना था । खैर बाद में हमलोगों ने रविश कुमार दूसरे भी हाफएन आवर प्रोग्राम को देखा करते रहें । कस्बा में भी रविश साहब ऐसा लगता है कि मीडिल क्लास के सच्चे प्रणेता है ....बस एक दिन टीवी पर देखा रविश कुमार ..साला मैं तो साहब वन गया ..ये बात दीगर थी कि साहब बनकर तनें नही थी । कोर्ट ..और टू पीस एंड थ्री-पीस ..विल्कुल इलिट लग रहे थे ..आम नही ..एंकरिंग कर रहे है हो सकता है कि मजबूरी हो लेकिन इस भेष में रविश कुमार मीडिल क्लास के नही अभिजात्य वर्ग के प्रणेता लगते है ।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-926926486207219638?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/926926486207219638/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=926926486207219638' title='14 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/926926486207219638'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/926926486207219638'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/10/blog-post_27.html' title='रविश कुमार मीडिल क्लास के नही लगते ?'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SQWpjMBCv9I/AAAAAAAAADo/kq0o1QlC7W4/s72-c/ravish.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>14</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-6712614680098017352</id><published>2008-10-05T03:41:00.000-07:00</published><updated>2008-10-05T04:20:33.526-07:00</updated><title type='text'>सेल के सौजन्य से</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SOiiR_ue2zI/AAAAAAAAAC4/TpYSDt-eoZk/s1600-h/a2.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5253627395375553330" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SOiiR_ue2zI/AAAAAAAAAC4/TpYSDt-eoZk/s320/a2.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;रामविलास पासवान जी भी डाइनमिक नेता है । बिहार की सत्ता की कुंजी भले ही उनके हाथ से छि‍टक गइ हो लेकिन केंद्र में जिस विभाग के भी मंत्री होते है ॥उस विभाग से जनहित का काम लेना उन्हें बखूबी आता है । हाल में मैं उनके संसदीय हल्के हाजीपुर में पहुंचा ..गंगा ब्रीज को पार करते ही हर चौक चौराहे पर स्टील आथँरिटी आफ इन्डिया के सौजन्य से के बैनर लहरा रहे थे । उत्तर बिहार में बाढ की विभिषीका के बाद राहत और इमदाद में उनकी पार्टी लोजपा के साथ साथ सेल भी पूरी मुस्तैदी से अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहा है । वैसे तो पूरे बिहार में सेल और उसके अधिकारी या तो मुफ्त में स्वास्थ्य शिवीर लगाकर लोगों का हेल्थ चेकअप कर रहे है या मरीजों को मुफ्त में दवा वितरण कर रहे है और हाजीपुर के क्या कहने ..ये काम वहां व्यापक स्तर पर प्रत्येक स्थानों पर किये जा रहे है । घूमते हुए मैं एक गांव सुल्तान पुर पहुंचा ..वहां सेल ने दलित बाहुल्य आबादी में गरीबों के लिये शौचालयों का निर्माण कराया है । लगभग २० घरों में इन शौचालयों का निर्माण कराया गया है और प्रत्येक चार घरों में से एक पर चापाकल गाडे गये है । दो तीन घरों को छोड दें तो लगभग बाकि घरों में लोग अपने शौचालयों का इस्तेमाल शौचालय के लिये नही बल्कि इसका इस्तेमाल स्ट्रांगरुम के तौर पर कर रहे है । सभी के मकान कच्चे है इसलिये लोगों ने अपने घरों के गहने और किमती सामानों को शौचालयों में भरकर उनमें बजाप्ता ताला लगा रखा है ।शायद उनके लिये शौचालय से अधिक जरुरी एक अदद मकान की रही होगी ...लेकिन इंदिरा आवास योजना के तहत मिलने वाले सरकारी मकान इन गरीबों के बीच वितरीत नही किये गये है । प्रत्येक चार मकानों पर एक चापाकल होने से पानी भरने के लिये यहां रोज दंगा फसाद होते है । राजस्थान जैसे राज्य में सुना था कि कि वहां के गांवों में दवंग लोग दलितों को अपने कुंए से पानी नही लेने देते ॥लेकिन यहां तो दलित बस्ती में रहने वाले दलित भाइ ही एक दूसरे को पानी नही भरने देते । खैर टीएन शेषण के पहले आमलोग चुनाव आयोग का नाम नही जानते थे ॥ठिक उसी तरह से बिहार के लोग रामविलास जी के पहले सेल का नाम नही जानते थे ..लेकिन &lt;span class=""&gt;आज &lt;/span&gt;वहां बच्चें बच्चों की जुवान पर है ...सेल के सौजन्य से ........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-6712614680098017352?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/6712614680098017352/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=6712614680098017352' title='9 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/6712614680098017352'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/6712614680098017352'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/10/blog-post.html' title='सेल के सौजन्य से'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SOiiR_ue2zI/AAAAAAAAAC4/TpYSDt-eoZk/s72-c/a2.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-8634009421201676971</id><published>2008-08-30T06:11:00.000-07:00</published><updated>2008-08-30T06:38:37.555-07:00</updated><title type='text'>आइये शशीकला की दुनिया देखें</title><content type='html'>पहले यवतमाल के जलका गांव की रहने वाली कलावती के दिन बहुरे ...तो अब सोनखास गांव की शशीकला अब गांव की सबसे इलिट हो गइ है । कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने विश्वास मत के दौरान इन्ही दो नामों का उल्लेख किया था । आपके सामने कुछ छाया चित्रों को प्रदर्शित कर रहा हूँ ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlKRo4-mOI/AAAAAAAAACw/6cl8QEbWkH8/s1600-h/vgntrz.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5240301308316915938" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlKRo4-mOI/AAAAAAAAACw/6cl8QEbWkH8/s320/vgntrz.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;                                                 (शशीकला क्या अब बकरी चराएगी ? )&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlKGJ290FI/AAAAAAAAACo/lpHWcT_yTvA/s1600-h/vbcbgv.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5240301111008415826" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlKGJ290FI/AAAAAAAAACo/lpHWcT_yTvA/s320/vbcbgv.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;                                                 (कपास के खेतों में जुता विदर्भ का किसान )&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlJu1tcofI/AAAAAAAAACg/FtsS3dxi0Zg/s1600-h/vbcbgv.jpg"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlJj9cDmII/AAAAAAAAACY/T58How4eQS8/s1600-h/vbcbgv.jpg"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlJdHMC0tI/AAAAAAAAACQ/aR-B8dXWUEM/s1600-h/nmbnv.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5240300405916881618" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlJdHMC0tI/AAAAAAAAACQ/aR-B8dXWUEM/s320/nmbnv.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;                                  (शशीकला के पति के लिये राहुल गांधी किसी देवता से कम नही )&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlJP1bH6kI/AAAAAAAAACI/u8VSZJrwlK4/s1600-h/ghghfcfd.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5240300177809992258" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlJP1bH6kI/AAAAAAAAACI/u8VSZJrwlK4/s320/ghghfcfd.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;                    (विदर्भ के यवतमाल जिले में सोनखास गांव में स्थित शशीकला का घर)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlI17EZ7vI/AAAAAAAAACA/xk1HvoFpNjI/s1600-h/b+cdfs.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5240299732648718066" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlI17EZ7vI/AAAAAAAAACA/xk1HvoFpNjI/s320/b+cdfs.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;                    (सुलभ इंटरनेशनल के विंदेश्वर पाठक शशीकला को चेक प्रदान कर रहे है )&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt; &lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-8634009421201676971?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/8634009421201676971/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=8634009421201676971' title='8 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/8634009421201676971'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/8634009421201676971'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/08/blog-post.html' title='आइये शशीकला की दुनिया देखें'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SLlKRo4-mOI/AAAAAAAAACw/6cl8QEbWkH8/s72-c/vgntrz.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-8874850567215278874</id><published>2008-07-28T06:15:00.000-07:00</published><updated>2008-07-28T06:16:50.771-07:00</updated><title type='text'>व्लाग के चिरकुट</title><content type='html'>चिरकुटों से व्लाग का हर सदस्य परेशान है । आप कुछ भी लिखों भद्दे या पर्सनल कमेंट करके ये चिरकुट अपनी पहचान और वजूद  बनाने  के लिये प्रयासरत है। अखबार में नाम पढा था बचपन में ठिक उसी तरह ट्रक के निचे जान देकर अपना नाम कमाने की चाहत रखते है ये चिरकुट । कुछ बेहया टाइप के चिरकुट तो अपने वास्तविक नाम और इमेल के जरिये अपनी खुजली करते नजर आते है तो कुछ कायर चिरकुट छद्म नाम से गंदी टीका टिप्पनी करने से बाज नही आते । आलोचना साहित्य की  एक महत्वपूणॆ विधा् है लेकिन ये चिरकुट आलोचना नही करते खुल्लम खुल्ला गाली देते है । आप इनके मुंह नही लगियेगा ये लरछुत प्राणी है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-8874850567215278874?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/8874850567215278874/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=8874850567215278874' title='12 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/8874850567215278874'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/8874850567215278874'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/07/blog-post_28.html' title='व्लाग के चिरकुट'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-3949454203195903221</id><published>2008-07-27T04:53:00.000-07:00</published><updated>2008-07-27T05:01:24.301-07:00</updated><title type='text'>चैनल वालों को इंतजार है हरिकिशन सिंह सुरजीत की .........का ....</title><content type='html'>सीपीएम के वेटरन नेता है हरिकिशन सिंह सुरजीत । काफी दिनों से बीमार चल रहे है । उनकी हालत गंभीर है ..नोएडा के मैट्रो अस्पताल में भर्ती है । ९० के दशक के बाद की उनकी प्रत्येक गतिविधीयों का लगभग मुझे स्मरण है । लेकिन मुझे उनके पूरे जीवनक्रम की एक एक इंच की जानकारी प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।२३ मार्च १९१६ को इनका जन्म पंजाब के जालंधर बंडाला ग्राम में हुआ था। सन १९६४ से ये पार्टी के पोलित व्यूरो के सदस्य रहें । अप्रील २००८ के पार्टी कांग्रेस में इनकी गंभीर बिमारी के चलते पहली बार इन्हें पोलित व्यूरो में शामिल नही किया गया । हालांकि इन्हें पार्टी के विशेष आमंत्रीत सदस्य के रुप में केंद्रीय कमीटी में रखा गया है। सन १९३० में इन्होने भारत के स्वंत्रता आंदोलन में भगत सिंह की प्रेरणा से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। २३ मार्च १९३१ को शहीदे आजम को अंग्रेजों ने फासी की सजा दी । उनकी पुन्यतिथी पर सुरजीत ने होशियारपुर न्यायालय के परिसर में तिरंगा फहराया उनके इस कारवाइ पर दो बार पुलीस ने उन्हें गोलियों का निशाना बनाया। उन्हें गिरफ्तार कर जब न्यायालय के सामने पेश किया गया तो इन्होने अपना नाम लंदन तोड सिंह बताया (one who breks london)। सन १९३६ में इन्होने कम्युनिष्ट पार्टी को ज्वाइन किया। अगंरेजों के खिलाफ इनकी लडाइ जारी रही। चिंगारी और दुखी दुनीया के प्रकाशन का जिम्मा अपने हाथों में लेकर अंग्रेजों से टकराव लेते रहे जिससे अंग्रेज सरकार ने इन्हें कइ बार गिरफ्तार भी किया । जब मुल्क आजाद हुआ तो ये सीपीआइ के पंजाब इकाइ के अविभाजित कम्युनिष्ट पार्टी के जेनरल सेकेरेट्री थे । मुल्क की आजादी के बाद इनकी लडाइ गरीब मेहनतकश और किसानों के वाजिब हक के लिये जारी रही । सीपीएम के वरिष्ठ नेता एके गोपालन के साथ केंद्र सरकार ने विशेष कानून बनाकर इनलोगों को गिरफ्तार किया। सन १९५० से १९५९ तक किसानों से अवैध लेवी वसूलने के सवाल पर एतेहासिक आंदोलन की इन्होने अगुवाइ की ।बाद में इन्हे अकिल भारतीय किसान सभा का जेनरल सेकेरेट्री बनाया गया । सन १९६४ में जब सीपीआइ टूटी तो सुरजीत ने अपने आपको सीपीएम के साथ रखा । उस समय जब सीपीएम के ९ पोलितब्यूरो के सदस्यों का चयन हुआ उनमें से एक सुरजीत भी थे । सन १९९२ में वे पार्टी के जेनरल सेकेरेट्री बनाये गये और सन २००५ तक इस पद पर रहकर पार्टी की सेवा करते रहे । सन १९९० की वीपी सिंह सरकार हो या १९९६ में देवेगौडा की सरकार सुरजीत ने तीसरे मोरचे के गठन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाइ । चलिये मैं आपको बता दूं कि चैनल में सुरजीत का ब्लू प्रिंट तैयार है लेकिन सुरजीत जिंदगी और मौत की लडाइ में ठिक उसी ढंग से लड रहे है जैसी जंग उन्होने अंग्रेजों के खिलाफ लडी थी । बीच में एक बार बाजपेयी जी भी बिमार पडे थे चैनल वालों ने उनके भी जीवनकाल का डाटा कम्पलीट कर दिया था । इसी जल्दीबाजी और खबरों में आगे बढने की ललक वाले चैनलों ने ने एक बार पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन के मौत की खबर गलत चला दी थी । भगवान बाजपेयी जी और सुरजीत दोनों को लंबी उमर प्रदान करें। मैनें सुरजीत के जीवन काल की छोटी कहानी आपके सामने रखा ...वक्त पर काम आ जाये चैनल वालों को रिसर्च करने की आवश्यकता नही पडेगी ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-3949454203195903221?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/3949454203195903221/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=3949454203195903221' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3949454203195903221'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3949454203195903221'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/07/blog-post_27.html' title='चैनल वालों को इंतजार है हरिकिशन सिंह सुरजीत की .........का ....'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-2155340897872523139</id><published>2008-07-23T00:57:00.000-07:00</published><updated>2008-07-23T01:04:16.279-07:00</updated><title type='text'>लोकतंत्र में नोटतंत्र</title><content type='html'>(इसे कविता नही बल्कि तुकबंदी का स्तरहीन प्रयास समझेंगे )&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;संसद में सूटकेस&lt;br /&gt;बताओ किस पर करोगे केस&lt;br /&gt;बहुमत की थी रेस&lt;br /&gt;तो फिर भाड में जाये देश .....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-2155340897872523139?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/2155340897872523139/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=2155340897872523139' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2155340897872523139'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2155340897872523139'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/07/blog-post_23.html' title='लोकतंत्र में नोटतंत्र'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' 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सवाल जबाब करने हों तो कैसे कहेंगे।&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;( काग्रेस सरकार की ओर से पहला बयान आता है )&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;करुंगा करार चाहे करले &lt;span class=""&gt;तकरार &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;गिर जाए सरकार इसकी नही परवाह ।।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;(लेफ्ट गुस्से से लाल होकर कांग्रेस से कहता है )&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;करोगे करार तो होगा यूपीए दो फाड &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;मजा आएगा तुम्हें जब करेंगे दहाड।।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;( भला बीजेपी वाम पार्टियों को कहां छोडने वाली थी )&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;भौंकोगे जरुर लेकिन काटोगे नही ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;सत्ता सुख का मोह कभी त्यागो गे नही ।।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;(और अंत में अमर सिह जी को भी बोलना पडा २४ अकबर रोड के सामने जाकर)&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;बरबादियों की अलग दास्ता हूं ॥&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;माया के डर से तेरे दर पे खडा हूं।।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-5562138187678840918?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/5562138187678840918/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=5562138187678840918' title='14 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5562138187678840918'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5562138187678840918'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/07/blog-post.html' title='१२३ एग्रीमेंट'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SGtbBe28KzI/AAAAAAAAAB4/zx1EkW5yF3s/s72-c/123Agreement-USIndia.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>14</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-5285116672012595885</id><published>2008-06-16T03:58:00.000-07:00</published><updated>2008-06-17T03:20:33.308-07:00</updated><title type='text'>बुझौवल</title><content type='html'>यकरंग उदूॻ  के अजीम शायर थे ...कुछ पहेलियां उन्होने लिखी ..दो पहेलियां आपके सामने रख रहा हूं..बुझौवल है आप बताइये...&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;यकरंग वह घर कौन है , जामें है दस द्वार।&lt;br /&gt;ऐसे घर में जो बसे , वाको क्या इतबार।।  (जीव और देह )&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;यकरंग वह फल कौन है , बिन बोये फरियायँ।&lt;br /&gt;बढत बढत इतने बढे , आखिर को झुक जायँ ।। (स्तन)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-5285116672012595885?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/5285116672012595885/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=5285116672012595885' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5285116672012595885'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5285116672012595885'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/06/blog-post_16.html' title='बुझौवल'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-8133395403315119319</id><published>2008-06-13T01:20:00.000-07:00</published><updated>2008-06-13T01:31:30.774-07:00</updated><title type='text'>शायरी और शराब</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SFIvaWvxKEI/AAAAAAAAABw/d2zqi0F0jLo/s1600-h/wine.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5211279848650123330" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SFIvaWvxKEI/AAAAAAAAABw/d2zqi0F0jLo/s320/wine.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;हालांकि इस्लाम में शराब पीना वजिॆत है ..लेकिन उदूॆ शायरों ने जमकर शराब तो नही पी लेकिन धामिॆक उपदेशकों यानि वाइज की खूब फजीहत की...आइये देखते है कुछ चुनिंदा शायरों के चुनिंदा शेर...&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;शाम को जाम पिया सुबह को तौबा कर ली।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;रिन्द के रिन्द रहें हाथ से जन्नत न गइ।। (अनाम)&lt;/p&gt;................................................................................&lt;br /&gt;&lt;p&gt;रखते है कहीं पांव तो पडता है कहीं और ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;साकी तू जरा हाथ तो ले थाम हमारा।। (इँशा)&lt;/p&gt;...................................................................................&lt;br /&gt;&lt;p&gt;कजॆ की पीते थे मय-औ यह समझते थे कि हां ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;रंग लाएगी हमारी फाका-मस्ती एक दिन ।। (गालिब)&lt;/p&gt;.......................................................................................&lt;br /&gt;&lt;p&gt;अंगूर में धरी थी पानी की चार बूंदे ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;जब से वो खिंच गइ है , तलवार हो गइ है।। (अनाम)&lt;/p&gt;......................................................................................&lt;br /&gt;&lt;p&gt;साकी तू मेरी जाम पे कुछ पढ के फूंक दे ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;पीता भी जाउँ और भरी की भरी रहे।। (अनाम)&lt;/p&gt;....................................................................................&lt;br /&gt;&lt;p&gt;साकिया अक्स पडा है जो तेरी आंखों का ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;और दो जाम नजर आते है पैमाने में ।। (अनाम)&lt;br /&gt;......................................................................................&lt;/p&gt;&lt;p&gt;दिल छोड के यार क्यूंकि जावे ?&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;जख्मी हो शिकार क्यूंकि जावे ?&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;जबतक ना मिले शराबे दीदार ,&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;आंखो का खुमार क्युंकि जावे ? (वली)&lt;/p&gt;..........................................................................&lt;br /&gt;&lt;p&gt;रंगे शराब से मेरी नियत बदल गइ ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;वाइज की बात रह गइ साकी की चल गइ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;तैयार थे नमाज पे हम सुन के जिक्रे-हूर ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;जलवा बुतों का देख के नियत बदल गइ ।।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;चमका तेरा जमाल जो महफिल में वक्ते शाम ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;परवाना बेकरार हुआ शमां जल गइ।। (अकबर)&lt;/p&gt;.......................................................................................&lt;br /&gt;&lt;p&gt;मस्जिद में बुलाता है हमें जाहिदे-नाफहम ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;होता अगर कुछ होश तो मैखाने ना जाते।। (अमीर मीनाइ)&lt;br /&gt;......................................................................................................&lt;/p&gt;&lt;p&gt;चलिये आज के लिए इतना ही पैग काफी है।&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-8133395403315119319?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/8133395403315119319/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=8133395403315119319' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/8133395403315119319'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/8133395403315119319'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/06/blog-post_13.html' title='शायरी और शराब'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SFIvaWvxKEI/AAAAAAAAABw/d2zqi0F0jLo/s72-c/wine.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-4539287331334729795</id><published>2008-06-11T05:08:00.000-07:00</published><updated>2008-06-11T05:13:18.900-07:00</updated><title type='text'>नारी तू नारायणी</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;( एक मित्र ने मुझे एक लतीफा मेल किया था ..मैनें पहले इसे नही सुना था ..हो सकता है आप ने इस लतीफे को सुना हो..कुछ भी हो मुझे बडा अच्छा लगा. चलिये  इसे मैं अपने ब्लाग पर डाल रहा हूँ).&lt;br /&gt; &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;ग्यारह लोग एक हेलीकॉप्टर से रस्सी से लटक रहे थे।दस आदमी और एक औरत।रस्सी कमजोर थी और एक साथ इतने लोगों को लटका करले जाने में टूटने का खतरा था।कम से कम किसी एक आदमी को रस्सी छोड़नी ही थीअन्यथा सारे लोगों की जान खतरे में आ सकती थी। पर बलिदान कौन करे?यह सोच विचार चल ही रहा था कि महिला ने भावुक होकर कहना शुरु किया।उसने कहा कि वह स्वेच्छा से रस्सी छोड़ रही है,क्योंकि त्याग करना स्त्री का स्वभाव है।वह रोज की अपने पति और बच्चों के लिये त्याग करती हैऔर व्यापक रूप से देखा जाये तो स्त्रियां पुरुषों के लिये नि:स्वार्थत्याग करती ही आई हैं।जैसे ही महिला ने अपना भाषण खत्म किया,सभी पुरुष एक साथ ताली बजाने लगे।&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-4539287331334729795?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/4539287331334729795/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=4539287331334729795' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/4539287331334729795'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/4539287331334729795'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/06/blog-post_11.html' title='नारी तू नारायणी'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' 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href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=5406911696397486548' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5406911696397486548'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5406911696397486548'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/06/blog-post_07.html' title='हमारा बिहार'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' 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दौर में जहां राजनीतिक हलके में मसखरा कहा गया वहीं बौद्धिक लोगों ने ताश का तीरपनवा पत्ता करार दिया ..लेकिन लालू की लोकप्रियता बढती ही गयी। मैं सोचता हूं कभी कभी आखिर इस व्यक्ति में खास क्या है ...सबसे खास था कि लालू ने अपने वोट बैंक का नब्ज पकड लिया था ...एक वाक्या सुनाता हूं ...सन २०० के आसपास गरीब रैली हुइ थी ..लालू इसके प्रचार प्रसार के सिलसिले में बिहार में जगह जगह सभाओं के माध्यम से जनता से भारी संख्या में पटना आने का दावत दे रहे थे ...मेरे कस्बे में भी आये ..मैं भी गया सभास्थल पर ...शाम हो गइ थी अंधेरा पसर रहा था ..लालू ने ज्यादा भाषण नही दिया ..भाषण समाप्त किया ..और रथ पर सवार अपने सहयोगी से कहा कि अरे जरा उ बिदेश से जो कैमरा लाए है दो हमको ...वस्तुतः वो कैमरा नही बल्कि जापानी टौचॆ था जिसकी लाइट ब्लिंक करती थी और सायरन की सी आवाज निकलती थी ...लालू ने अपनी जनता से कहा ..देखो भाइ ये कैमरा हम विलायत से लाए है और ये तुम लोगों का फोटू खिंचेगा ..और जब कल रैली समाप्त होगी तो मैं इसकी रिकाॆडिंग देखूंगा ...तब हमको पता चल जाएगा कि तुम लोगों में से कौन कौन रैली में नही पहुंचा है ...लालू ने उस टाचॆ को घूमाना शुरु किया ...मेरे साथ जनता की भीड में एक दूध बेचने वाला इन्सान पटना से अपना दूध बेचकर वापस अपने गांव जा रहा था लालू जी चूंकि भाषण दे रहे थे तो बेचारा ठहरकर लालू जी का भाषण सुन रहा था। जैसे ही टाचॆ की रौशनी उसके मुख पर पडी उसने कहा अरे बाप रे बाप लालू जी फोटुकवा खिंच लिये कल बेटी के यहां जाना था ..अब तो हमें रैली में जाना ही होगा ...खैर पढे लिखे लोग तो लालूजी की इस नौटंकी को समझ रहे थे लेकिन भोली भाली जनता को झांसा देना कहां का न्याय है आप ही बताइये.......&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-1459634942714129337?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/1459634942714129337/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=1459634942714129337' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1459634942714129337'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1459634942714129337'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/06/blog-post.html' title='लालू जी की लीला'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SEaYgg2C0GI/AAAAAAAAABo/nxu2mG2f93k/s72-c/laloo.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-2109196487393720315</id><published>2008-05-26T00:08:00.000-07:00</published><updated>2008-05-26T00:26:08.641-07:00</updated><title type='text'>एक अनाम कविता</title><content type='html'>&lt;p&gt;आपको सांस लेने की स्वतंत्रता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आप जो चाहे कर सकते है॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हर तरह के बंधनों को तोडने के लिए आप आजाद है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आप जहां जाना चाहे जा सकते है॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हर दिन आपका है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जो चाहे बोल सकते है॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जहां चाहे वहां रात बिता सकते है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अपनी प्रतिग्या को भंग करने के लिये आप स्वतंत्र है॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;खुद की मुस्कान पर आपका हक है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;किसी भी तरह की  शर्त  के लिये आप बाजी लगा सकते है॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;लेकिन यह सब करते हुये हमेशा ध्यान रखिए कि किसी ना किसी की नजर आप पर है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-2109196487393720315?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/2109196487393720315/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=2109196487393720315' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2109196487393720315'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2109196487393720315'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/05/blog-post_26.html' title='एक अनाम कविता'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-3015502756133099612</id><published>2008-05-23T06:27:00.000-07:00</published><updated>2008-05-23T06:34:34.431-07:00</updated><title type='text'>दो कुत्ते</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SDbHzvZny8I/AAAAAAAAABg/aZkpmzw-GZw/s1600-h/faqdogs.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5203566111184374722" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SDbHzvZny8I/AAAAAAAAABg/aZkpmzw-GZw/s320/faqdogs.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;दो कुत्ते थे शेरु और मोती ..शेरु दिल्ली के पाश कालोनी जीके(ग्रेटर कैलाश) में रहता था और मोती कल्यानपुरी में. हालांकि दोनो दोस्त थे। चार पांच महिने के बाद दोनो इंडिया गेट के पास मिले।शेरु ने कहा यार मोती मैं तो सबेरे उठता हूँ तो समझो कि कूडेदान में लजीज व्यंजनों की भरमार होती है ..खाते नही बनता...मोती ने कहा शेरु मोतिया गैरत के साथ जीनेवाला इंसान है लजीज भले ही मुझे खाने को नही मिलता लेकिन कल्यानपुरी वाले मुझे बुलाते है मोती आ.आ आ ..तभी मैँ उठता हूँ खाना खाने के लिये ...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-3015502756133099612?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/3015502756133099612/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=3015502756133099612' title='8 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3015502756133099612'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3015502756133099612'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/05/blog-post_23.html' title='दो कुत्ते'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SDbHzvZny8I/AAAAAAAAABg/aZkpmzw-GZw/s72-c/faqdogs.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-7214143832748992644</id><published>2008-05-20T07:11:00.000-07:00</published><updated>2008-05-20T07:21:24.894-07:00</updated><title type='text'>दिल्ली का रेड लाइट एरिया</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SDLeR6itMGI/AAAAAAAAABY/yJ5oYAZvAn0/s1600-h/sex+workers.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5202464918920310882" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SDLeR6itMGI/AAAAAAAAABY/yJ5oYAZvAn0/s320/sex+workers.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;दिल्ली में ही नही बल्कि बाहर भी जीबी रोड मशहूर है ॥कहा जाता है रेड लाइट एरिया है । एक बार गया था उस रोड से ॥रिक्शे पर सवार होकर जब मैँ रोड क्रास कर रहा था तो मैं नजर बचाकर उन कोठों की ओर तांकने का लालच ना छिपा पाया...विभिन्न भंगिमाओं से कोठे की लडकियाँ राह आने जाने वालों को मानो दावत दे रही थी। रोड क्रास कर चुका था और वो हसीन नजारा भी। ये तो रजिस्टर्ड जगह है जहा मजबूरी में औरतें देह व्यापार के धंधे में लिपत है। लेकिन ऐसे कै जगह है जहां ये धंधे पुलीस वालों के सह्योग से हुआ करते है। समय बीता लगभग दो सालों के बाद मेरा एक दोस्त स्टिँन्ग आपरेशन के सिलसिले में मेरे पास आया बोला आइ कार्ड रख ले ..स्टिँन्ग करना है ...मैँ बोला किसका ..बोला धंधे वाली लडकियों का और उसमें शामिल सफेदपोश लोगों का। बोला रिस्क है लेकिन तेरे उपर आंच नही आने दूँगा।पहला पडाव ः- भीखाजी कामा प्लेस के सामने का हयात होटल ...दोस्त की नजरों ने तलाश लिया ..एक महिला के पास जाकर कुछ बोला मैं दूर ही था थोडा हिचकते हुए पास गया ..2500 में मामला तय हो गया ..उसने पैसे दे दिये ...थोडी देर के बाद दोस्त से कहा सुनी हो गइ ..औरत ने कहा जाओं यहा से औरत पहुंच गइ 100 नंबर वाले पीसीआर वैन के पास ...दोस्त गया और बोला कि इसने मेरे 2500 रुपये लिए है ..पुलीस वाले ने हडकाया और कहा कि भाग जाओं यहां से वरना अभी गिरफ्तार कर लूंगा ..दोस्त गिडगिडाने का नाटक करने लगा सब कुछ कैमरे में कैद हो रहा था ..रात के ग्यारह बज रहे थे ..धीरे धीरे भीड होने लगी वहां पर ..पीसीआर वाले नशे में धुत्त..और वो धंधे वाली लडकी ऐसे खडी थी जैसे वो उन कांस्टेबलों की बास हो ..मामला बिगडता देख ..दोस्त ने अपना आइ कार्ड निकाला और दिखाया साथ तब जाकर पुलीस वाले शांत हुए और उसका पैसा भी लौटा गये ..दोस्त ने यह खुलासा नही किया ...कि उसने हिडन कैमरे पर सब कुछ शूट कर लिया है । ( अगली बार दूसरे स्पाट की कहानी) &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-7214143832748992644?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/7214143832748992644/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=7214143832748992644' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7214143832748992644'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7214143832748992644'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/05/blog-post_20.html' title='दिल्ली का रेड लाइट एरिया'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SDLeR6itMGI/AAAAAAAAABY/yJ5oYAZvAn0/s72-c/sex+workers.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-8368259917489775709</id><published>2008-05-17T02:52:00.000-07:00</published><updated>2008-05-17T02:59:02.090-07:00</updated><title type='text'>तेल बचाओं</title><content type='html'>गाडियों के काफिले से उतरकर मंत्री महोदय एक संगोष्ठी का उद्घाटन करने जा रहे थे.......जिसका विषय था ....तेल बचाओं अपने और राष्ट्र के लिए भी....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-8368259917489775709?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/8368259917489775709/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=8368259917489775709' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/8368259917489775709'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/8368259917489775709'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/05/blog-post_17.html' title='तेल बचाओं'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-2205877238192528185</id><published>2008-05-16T07:23:00.000-07:00</published><updated>2008-05-16T07:50:35.318-07:00</updated><title type='text'>जातीयता का महाभारत</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SC2e7qitMFI/AAAAAAAAABQ/6qC0N3I_TVw/s1600-h/mahabharat.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5200987892552118354" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SC2e7qitMFI/AAAAAAAAABQ/6qC0N3I_TVw/s320/mahabharat.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;कहा जाता है कि अंग्रेजों ने बहुत सी अच्छी और बुरी चीजें हिन्दुस्तान को दी।राष्ट्रीयता दी , इतिहास लेखन दिया साथ में सांप्रदायिकता और जातीयता की भी नेमत बख्शी । वैसे भारत में जातीयता मनुस्मृति की देन है।इसी जातियता ने हिंदुस्तान की हर पराजय में प्रमुख भूमिका भी अदा की। हेमू , बैरम खां से युद्ध में नही हारा बल्कि जातिय गद्दारी ने उसे हराया , शिवाजी को बनारस के ब्राह्णों ने उसका राज्यरोहन नही कराया क्यूंकि वह क्षत्रिय नही था।भारत में आपसी फूट के बल पर ही इस्ट इंडिया के पांव जमें। इस्ट इंडिया कंपनी ने पहले देशी लोगों से निम्नतर सेवाए लेनी शुरु की। उसके बाद उन्होने किरानी का काम लेने के लिए देशी लोगों को पढाना शुरु किया। 1834 में कानून के तहत एडीएम के पद पर देशी लोगों की बहाली शुरु कर दी गइ । फारसी उस समय शासन व्यवस्था की भाषा थी। पढने लिखने का सिलसिला उस समय कायस्थ जाति के लोगों में काफी पहले से था।मुगलों के समय से ही उन्होने फारसी पढना शुरु कर दिया था। इस खास जाति का जमाने के साथ बदलने की अद्भुत क्षमता है।अंग्रेजों की पढाइ में भी वे औरों से काफी आगे निकल गये थे। जमींदार और राजाओं के बेटोँ में भी शासक बनने की होड सी मच गइ। अब सारे लोग अंग्रेजी पढने की ओर उन्मुख हो गये। सर सैयद को भी लगा कि मुसलमान अगर अंग्रेजी नही पढेंगे तो शासक दल की पंक्तियों में शामिल नही हो सकेंगे। उन्होने अलीगढ में अंग्रेजी वर्नाकुलर स्कूल की स्थापना की । फिर क्या था पूरे हिंदुस्तान के मौलवियों ने फतवा जारी किया कि सर सैयद मुसलमानों को क्रिस्तान बनाना चाहता है।उसके बाद 1877 या 1879 में लखनऊ में अखिल भारतीय कायस्थ सम्मेलन हुआ। सम्मेलन के निर्णयानुसार जाति के नाम पर देशव्यापी कायस्थ पाठशाला खोलने की बात कही गइ।जाति के नाम पर अखबार निकला । इसके ठिक दो वर्षों के बाद पटना में अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्णण सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन के निर्णय के अनुसार ग्रियर्सन भूमिहार ब्राह्णण कालेज और स्कूलों की स्थापना की गइ। बाद में कालेज का नाम बदलकर लंगट सिंह कालेज ( मुजफ्फरपुर , बिहार में स्थित ) कर दिया गया , लेकिन स्कूल का नाम अभी भी ग्रियरसन भूमिहार ब्राह्णण कालेजियट बरकरार है। इसके दो वर्षों के बाद मारवाडी सम्मेलन हुआ। फिर अखिल भारतीय सरयूपारीन ब्राह्णण सम्मेलन । ब्राह्णण स्कूल और ब्राह्ण्ण अखबार निकाले गये जिसके संपादक प्रताप नारायण मिश्रा और पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे विद्वान लोग हुए । इन सबका क्रम दो दो वर्षों का था । उसके बाद क्षत्रिय सम्मेलन हुआ। बनारस में उदय प्रताप क्षत्रिय कालेज खुला जिसमें क्षत्रिय लोगों को घुडसवारी सिखाया जाता था और उसके बाद उन्हे पीने के लिए दूध भी दिये जाते थे।20 वीं सदी की शुरुआत में अखिल भारतीय गोप सम्मेलन और 1911 में दुसाध सम्मेलन हुआ था ।जातीय सम्मान बढेँ तो जातिय हमलें भी तेज हुए। उन हमलों का काट ढूंढा गया । कायस्थों ने अपने को ब्रह्मण का मानसपुत्र चित्रगुप्त का वंशज कहा और उनकी पूजा अर्चणा शुरु कर दी । विरोधियों ने इसे जायज नही माना। कायस्थों की एक उपजाती के संबंध में केशकारों ने घिनौना अर्थ दे डाला। ब्राह्णणों ने भूमिहार ब्राह्णोणों को ब्राह्णण मानने से इनकार कर दिया। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने बजाप्ता ब्रह्मषि वंश विस्तार ही लिख डाला। 1920-21 आते आते जातिय कटुता आसमान छूने लगी । गवरनर के सलाहकारों की ऐसेम्बली में तीन मंत्री हुआ करते थे , मौलाना मजहरुल हक , सर गणेश दत्त , और सच्चिदानंद सिन्हा। मौलाना मजहरुल हक साहब संत माने जाते थे लेकिन सर गणेश दत्त और सच्चिदानंद सिन्हा में भयंकर होड मच गइ।बिहार में कायस्थ बनाम भूमिहारों के बीच गर्दनकाट प्रतिद्वंदता शुरु हो गइ।सर गणेश दत्त ने पटना विश्वविद्यालय में पुअर भूमिहार ब्राह्णण स्टूडेन्ट स्कालरशीप की शुरुआत की जो आज तक जारी है।कहनेवाले तो यहां तक कहते है कि स्वामी सहजानंद की ताकत को कम करने के लिए बाबू राजेन्द्र प्रसाद की सलाह पर खेतिहर मजदूर सभा की निंव रखी गयी ।चुनाव जीतने के लिए कांग्रेसियों ने इसे जमकर भंजाया। कहा जाता है कि समाज शिक्षीत होगा तो जातियता की बिमारी स्वतः दूर हो जाएगी लेकिन इस दर्शन का विरोध स्वंय बिहार के कालेज तथा विश्वविद्यालयों में मिल जाऐँगे।दूर छोडिये आज भी पटना मेडिकल कालेज हास्टल का प्रत्येक रुम जातियों में बंटा पडा है। आजादी के बाद पंडित चंद्रदेव शर्मा के द्वारा लिखित " बापू के सपूतों का राज" नाटक प्रकाशित हुइ थी जिसे विहार सरकार ने बैन कर दिया था।25 साल के बाद पटना हाइकोर्ट ने इस बैन को हटाया। इस नाटक में जातियता का भयंकर वर्णण है। आजादी के बाद राम मनोहर लोहिया का नारा सौ में साठ हमारा है का लगा । काका कालेकर की अध्यक्षता में कमीशन की स्थापना की गइ। तत्कालिन सरकारों ने उसे लागू नही किया।मंडल कमीशन बना ॥उसकी रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में पडी रही ।1967 और 1974 के आंदोलन में जातीयता जडता टूटी थी । संघर्ष के दौरान जाति की बात नही उठी थी । 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार ने मंडल कमीशन को लागू किया जिसकी भयंकर प्रतिक्रिया हुइ।उस समय एक प्रश्न उठा था । आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा था । कोइ व्यक्ति तथा राजनीतिक दल नही बल्कि एक सयाने ने कहा ..मीडिया...। मीडिया हेडलाइन देकर इस आंदोलन को चला रहा था । वीपी सिंह की सरकार गिरते ही उसका काम हो गया । राव साहब की सरकार ने आराक्षण को अमली जामा पहनाया। विश्वविद्यालयो में हंगामा फिर शुरु हुआ, मीडिया ने तवज्जों नही दिया। आंदोलन अपनी मौत मर गया क्युंकि मीडिया का काम हो चुका था। उसका मुख्य मकसद वीपी सिंह की सरकार को गिराना था क्यूंकि प्रबंधन में मजदूरों की सहभागिता और संविधान में काम के अधिकार कानून को पूंजीपती वर्ग पारित नही होने देना चाहते थे।आम आवाम के अन्दर इतना आक्रोश था कि बिना कोइ ठोस कार्य किए लालू अपनी अनपढ वीवी के साथ बिहार में 15 बरस तक गद्दी पर बैठे रहे।पंडित को गाली देने वाले कर्पूरी ठाकुर के शिष्य लालू प्रसाद अब बिना पूजा पाठ के कोइ काम नही करते। पिता की मृत्यु पर समाजवादी नीतिश कुमार ने सर नही मुंडवाया था , बडी चर्चा हुइ थी , लेकिन पत्नी के मरने के बाद उनके समाजवाद की हवा निकल गइ।मुट्ठी भर सवर्ण कहने वाले नीतिश जी आज उसी की गोद में सो रहे है। संसकृत का श्लोक है कि जिस रास्ते बडे लोग जाते है वहीं रास्ता हो जाता है। लालू जी भी उसी रास्ते गये जिसपर जमींदार और कांग्रेसी गये । उसी की नकल होने लगी। मायावती और मुलायम भी उसी रास्ते पर चल रहे है।1974 में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लडने वाले लालू प्रसाद बाद में खुद ही भ्रष्टाचार के प्रतीक बन गये। उत्तर भारत में माडल क्या है ? राजा , जमींदार और कांग्रेसी । बिहार के टिकारी राज्य के अन्तर्गत रहने वाले हर भूमीहार के यहा महंगा व्यंजन विरंज बनता है । बिहार के किसी भी दूसरे भूमिहारों के यहां यह व्यंजन नही बनता । टेकारी महाराज के यहां विरंज बनता था । जमींदारी उन्मूलन के बाद अपने को टिकारी महाराज मानते हुए उस क्षेत्र के गरीब भूमीहार के यहां भी यह महंगा व्यंजन बनता है।लालूजी मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने गांव गोपालगंज के फुलवरिया गये । उनकी मां ने पूछा .. बबुआ तू का हो गइल बाडअ..। लालूजी ने कहा माइ हम बिहार के हथुआ महाराज हो गइल बानी।पटना जंक्शन पर एक बार बैठा था । एक बैँड बाजा बजाने वाला मजदूर भी मेरे पास बैठा था । मालूम हुआ कि वह रविदास है सट्टा पर बाजा बजाता है। एकाएक एक राजनीतिक पार्टी का जूलुस निकला । वह हंसा और बोला सब जात पर मरता है ..इ खातिर हमनी भी सब पार्टी छोडके अप्पन जात वाला पार्टी बसपा में चल गइली हे..स्पस्ट है संघर्ष से ही यह जातियता टूट सकती है ..दूसरा और कोइ रास्ता नही जिससे जातियता पर हमला हो सकें ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;( रविश कुमार की दवा की जाति के लेख ने मुझे प्रेरित किया कि जातियता के इस बहस को और आगे ले जाया जाय जिससे समाज में जडता खत्म हो। )&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-2205877238192528185?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/2205877238192528185/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=2205877238192528185' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2205877238192528185'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2205877238192528185'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/05/blog-post_16.html' title='जातीयता का महाभारत'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SC2e7qitMFI/AAAAAAAAABQ/6qC0N3I_TVw/s72-c/mahabharat.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-1695820731302251146</id><published>2008-05-10T05:18:00.000-07:00</published><updated>2008-05-10T05:19:31.391-07:00</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SCWSrltvQ7I/AAAAAAAAABI/SEMe1XtHZcU/s1600-h/part-003.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5198722622425088946" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SCWSrltvQ7I/AAAAAAAAABI/SEMe1XtHZcU/s320/part-003.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-1695820731302251146?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/1695820731302251146/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=1695820731302251146' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1695820731302251146'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1695820731302251146'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/05/blog-post_4603.html' title=''/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SCWSrltvQ7I/AAAAAAAAABI/SEMe1XtHZcU/s72-c/part-003.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-729561979287882726</id><published>2008-05-10T05:00:00.000-07:00</published><updated>2008-05-10T05:17:06.013-07:00</updated><title type='text'>मैथेमैटिक्स किंग वशिष्ठ नारायण</title><content type='html'>हाल ही में पटना के एक संस्थान ने वशिष्ठ नारायण जी के नाम पर अपनी संस्था का नामकरण किया। इस अवसर पर खुद वशिष्ठनारायण जी अपने परिवार के सदस्यों के साथ पहुंचे थे। गणित के इस जादूगर को जब मंच पर बुलाया गया तो वे  कुछ गणीत  के सूत्र ही बुदबुदा पाये।2005 में मैँ इनके गांव वसंतपुर पहुँचा था जो आरा शहर से 20 किलोमीटर की दूरी पर है । गांव के बीचोबीच एक पक्का मकान है। घर के बरामदे पर एक खाट पर सोये थे वशिष्ठ नारायण। मैने सिर्फ उनका नाम सुना था ।साक्षात देखने के बाद मेरे अंदर जो सुख की अनुभूती हुइ मैं उसका बयान नही कर सकता। उनके चेहरे पर मक्खियाँ भिनभिना रही थी  । मैंने हांकने की कोशिश की तब वे जाग उठे। बहुत प्रार्थना करने के बाद परिवार के अन्य सहयोगियों की मिन्नत पर वे साक्षात्कार के लिए राजी हुए। जल्दी बोलिये क्या पूछना है....जरा अपना पेनवा दिजीयेगा बडा अच्छा है ,,पायलट का पेन मैनें पाकेट से निकाल कर दे दिया। अपने कुर्ते के पाकेट से उन्होने छोटे छोटे बंडल निकाले।जिसमें दो तीन चूडी ,कुछ धागे और बाल पेन का रिफील ...उन्होने मेरे पेन को उन्हीं सामानों के साथ रख लिया । मैने पूछा सर मैथ क्या है उन्होने मैथस के कुछ सूत्र बोलने शुरु किये। फिर वो ऐटम बम के बारे में बोलने लगे। उसके बाद उन्होने कहा चलिये अब भागिये यहां से ...मैने कुछ हठ किया तो उन्होने मुझे डांटते हुए मुझे वहां से भाग जाने के लिए कहा। खैर मुझे लगा कि इंटरव्यू के चक्कर में किसी की भावनाओं से खेलना ठिक नही है।घर के पूरे  दिवार पर उन्होने मैथस के सूत्र  और सीताराम से संबंधित भजन के सूक्त लिख रखे थे। बिहार के राजनीतिग्यो में लालूजी और रामविलास जी के बारे में उनके परिवारवालों ने खूब बडाइ की । केन्द्रिय मंत्री अर्जुण सिंह ने भी अपनी ओर से इस परिवार को मदद प्रदान की है। परिवार वालों ने एक वाक्या सुनाया ॥लालूजी वशिष्ठ बाबू का हालचाल जानने वसंतपुर पहुंचे। वशिष्ठ बाबू ने कहा कि ए लालूजी एगो रुपया देब...लालूजी के पास शायद पाकेट में एक सिक्का नही था..वशिष्ठ बाबू भडक गये कहा जो एक रुपया नही दे सकता वो हमारी मदद क्या करेगा। हालांकि उनकी मानसिक स्थिती ने ऐसा कहलवा दिया हो...पिछले कइ बर्षों  से सिजोफ्रेनिया से ग्रसित वशिष्ठ बाबू के बारे में गांव वालों ने दिखाया मीडिल स्कूल जहां उन्होने अपनी प्राथमिक शिक्षा  ग्रहण की थी। पीपल का बडा सा पेड सूखा पडा था और स्कूल की जर्जर इमारतों को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानों अब रो पडे॥पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपती एस एन पी सिन्हा ने  वशिष्ठ बाबू पर एक वायोग्राफी लिखी है  वि्श्व  अप्रितम  गनितग्य .इस किताब में उनके जीवन और उपलब्धियों पर लेखक ने बहुत ही सुंदर चित्रन  किया है।पटना में आयोजीत समारोह में वशिष्ठ बाबू की मां ल्हासो देवी ने अपने संबोधन में सिर्फ़  यही कहा कि मेरे पुत्र  को भला चंगा करने में लोग आगे आकर मेरी मदद करें।आइये हम सब मिलकर भारत के इस धरोहर के लिए आगे आकर मदद का हाथ बढायेँ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-729561979287882726?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/729561979287882726/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=729561979287882726' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/729561979287882726'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/729561979287882726'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/05/blog-post_10.html' title='मैथेमैटिक्स किंग वशिष्ठ नारायण'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-1236336663173237336</id><published>2008-05-02T00:50:00.000-07:00</published><updated>2008-05-02T01:00:59.519-07:00</updated><title type='text'>लता की महानता का दूसरा पक्ष</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SBrJmV8gNiI/AAAAAAAAABA/AGke_OQ5UGw/s1600-h/lata.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5195686780688414242" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SBrJmV8gNiI/AAAAAAAAABA/AGke_OQ5UGw/s320/lata.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;लता एक ऐसा नाम जिनकी कृतियों के बारे में लिखना मेरे जैसों के वश की बात नही। स्वर कोकिला जैसे विभूषणों से अलंकृत इस महान गायिका जब अपने चरम पर थी तब ना जाने कितनी प्रतिभाएं काल के गाल में समाती चली गइ थी। लता ने किसी एक को अपने आगे ना पनपने का मौका दिया और ना ही आगे बढने का।लता ने अपने पूरे फिल्मी करियर में खासकर महिला गायिकाओं को अपना निशाना बनाया।तितली उडी ...फूल ने कहा तू आजा मेरे पास ..जैसे हसीन गाने को अपना सुर देने वाली गायिका शारदा.. लता की प्रताडना की सबसे अहम उदाहरण है।शंकर और जयकिशन की जोडी ने शारदा को ब्रेक क्या दिया ..लता ने शंकर जयकिशन के कंपोजीशन में गाना ना गाने का प्रण कर लिया । उन्हीं दिनों राजकपूर अपने सपनों की फिल्म मेरा नाम जोकर के निमाॻण में लगे थे । राजकपूर की बकायदा एक टीम थी जिसमें लता , मन्ना डे , मुकेश , शैलेन्द्र , हसरत जयपुरी और शंकर जयकिशन महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक थे।मेरा नाम जोकर में शंकर जयकिशन बकायदा अपने कंपोजिशन तैयार कर चुके थे ।्अचानक लता ने राजकपूर से कहा कि शंकर को फिल्म से निकालो तभी मैं आपकी फिल्म में स्वर दे सकूंगी । राजकपूर के लिए ये कठिन मरहला था । राजकपूर ने शंकर जयकिशन को फिल्म से बाहर करने से इनकार कर दिया । मेरा नाम जोकर हिन्दी फिल्म इतिहास की बहुत बडी फिल्म होकर भी बाक्स आफिस पर पिट गयी । लोगों ने कहा लता ने नही गाया तो फिल्म को तो पिटना ही था। राजकपूर का एक बडा सपना खाक हो चुका था।खैर उसके बाद बाबी बनी , राजकपूर ने शंकर जयकिशन को चलता कर दिया , लता जी ने इस फिल्म में अपना बहुमूल्य सुर दिया । फिल्म ने टिकट खिडकी पर सफलता के झंडे गाड दिये। कुछ ही दिनों के बाद शंकर भी इस दुनिया से कूच कर गये।वाणी जयराम , हेमलता , चंद्राणी मुखर्जी , रुना लैला , सुधा मल्हो्त्रा ,प्रीती सागर ये कुछ ऐसे नाम है जो प्रतिभा संपन्न होने के बाबजूद लता की हेकडी के आगे नही टिक सकी और गुमनामियों के अंधेरे में खो गइ। लता के गाये कइ अमर गीतों के समानांतर क्या ये गाने आपके कानों में रस नही घोलते....बोले रे पपीहरा(वाणी जयराम) ....तुम मुझे भूल भी जाओं तो ये हक है तुमको (सुधा मल्होत्रा )..दो दिवाने शहर में (रुना लैला)..अंखियों के झरोखे से(हेम लता) ...तुम्हारे बिना जी ना लगे घर में (प्रीती सागर).....&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-1236336663173237336?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/1236336663173237336/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=1236336663173237336' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1236336663173237336'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1236336663173237336'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/05/blog-post.html' title='लता की महानता का दूसरा पक्ष'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SBrJmV8gNiI/AAAAAAAAABA/AGke_OQ5UGw/s72-c/lata.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-5961475084328038978</id><published>2008-04-12T03:07:00.000-07:00</published><updated>2008-04-12T04:16:28.768-07:00</updated><title type='text'>कलम आज उनकी जय बोल</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SACZNky0qnI/AAAAAAAAAAw/C7natQ0rS70/s1600-h/photo+shiv.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5188315229225003634" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SACZNky0qnI/AAAAAAAAAAw/C7natQ0rS70/s320/photo+shiv.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;देश में लोग महंगाइ और मुद्रास्फ़ीती के मकड्जाल में उलझे हुए है। मध्यप्रदेश की सरकार ने कितना बडा क्रांतीकारी फ़ैसला लिया उसे मीडीया ने तवज़्ज़ो ही नही दी। मीडीया को तो चाहिए राखी , राजु और शिल्पा । तथाकथित धर्मनिरपेक्श लोगों को भी नरेंद्र मोदी को गाली देने के अलावा कुछ नही सुझता।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;देश कभी का हिंदू राष्ट्र बन गया होता ...हम लोग भी गर्व से कहते जय श्रीराम.... मध्यप्रदेश की सरकार ने २००८-०९ के राज्य बजट में आम लोगों के लिये क्या क्या नही किया । १६ वस्तुओं को बिल्कुल टैक्स फ़्री कर दिया । जिन वस्तुओं को टैक्स- फ़्री किया गया उनमें क्रपान , हाथ का कडा, प्रसाद , भोग या महाभोग , धार्मिक चित्र, कपूर , गौमूत्र और उससे बने सभी उत्पाद , सत्तु -पंजीरी, मुरमुरा, बताशा, एवं मिश्री इत्यादी शामील है। एक धर्मनिरपेक्श देश में एक समुदाय विशेष के प्रति आग्रह दिखाने का साहस हिंदू सम्राट मोदीजी भी नही दिखा सके। राज्य सरकार की उदारता को देखकर दानवीर कर्ण भी शर्मा जाये। यही नही राज्य सरकार ने अपने पूर्व के बज़ट में भी जनेउ - , पूजा की धूपबत्ती पूजा में काम आनेवाली रस्सी और कलावे के धागे को पहली ही टैक्स फ़्री कर दिया था। राज्य के दयालु मुख्यमंत्री ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए राज्य सरकार के सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस की शाखाओं मे जाने की विधीवत छूट दे रखी है। इससे दो फ़ायदे होंगे एक तो कर्मचारियों में अनुशासन का समावेश होगा दूसरी तरफ़ आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लोककल्यान कारी महाराज शिवराज सरकार की वापसी कैसे होगी इसकी भी ट्रैनिंग हो जायेगी। दुख होता है कि ऐसे लोककल्यान्कारी फ़ैसले ना तो राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खी बनते है ना ही पढे लिखे लोगों के बीच बहस का मुद्दा। &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-5961475084328038978?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/5961475084328038978/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=5961475084328038978' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5961475084328038978'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/5961475084328038978'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/04/blog-post_12.html' title='कलम आज उनकी जय बोल'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SACZNky0qnI/AAAAAAAAAAw/C7natQ0rS70/s72-c/photo+shiv.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-2648905074221121057</id><published>2008-02-07T05:38:00.000-08:00</published><updated>2008-04-09T07:05:47.805-07:00</updated><title type='text'>खबरिया चैनल और हमारा समाज</title><content type='html'>समाचारों के लिये हमेशा से आम लोगों के बीच एक भूख रही है। आज से कुछ साल पहले तक किसि एक दूकान में लाला के यहां एक अखबार पहुंचता था. गांवों में लोग बडी ही बेसब्री से अखबार के आने का इन्तेज़ार करते थे। हालांकि लाला का समाचारों से कोइ सरोकार नही होता था , एक अदद अखबार&lt;br /&gt;उसके लिये पी आर के समान था लोगों या युं कहे अपने ज्यादा से ज्यादा ग्राहाकों तक पहुंचने के लिये।&lt;br /&gt;बुजुर्ग लोग पहले ही अखबार को तिलन्गी सरीखा बना लेते थे । एक तितली जिस तरिके से फूलों का रस निचोड निचोड कर पी जाती है ठिक उसी तरह गांव के वो पठनशील लोग अखबार की एक लाइन को चट कर जाते थे ।&lt;br /&gt;जारी है । फिर चर्चा होती थी अरे इस बार तो पांडेजी की हवा निकल जायेगी , दिल्ली की खूब हवा खा ली । उतने में शर्मा जी बोलने लगते थे अरे कल ही दिल्ली से लौटा हूं , एम पी साहब के यहां ही ठहरा था , फ़्रिज़ का पानी वहां पी लिया था साला गला भारी हो गया है। लोगों के लिये फ़्रिज़ बहुत दूर की बात थी उन दिनों । कभी कभी राजनितिक चर्चा घमासान हो जाती थी , बडी मुश्किल से लाला उन्हें शान्त करता था । धीरे धीरे मिडिया ने पैर पसारे और दैनीक अखबारों ने अपनी जगह प्रत्येक घर में बनानी शुरू की। ९० के दशक के बाद न्युज चैनलों का दौर आया। शुरुआत में तो ये खबरों की बदौलत जनता में पहुंचने की कोशिसे करते रहे ॥ लेकिन  टीआरपी के चक्कर में ऐसा लगता है कि न्युज़ कही गुम हो गया है और उसकी जगह ले ली है सांप बंदर और मदारी के खेल ने । राखी का चुम्मा मिक्का ने क्या ले लिया ऐसा लगा कि देश में आपतकाल की स्थिती पैदा हो गयी , चैनल वाले सुबह से शाम तक परेशान रहे कि भाइ देश पर आये इस संकट का निवारन नही हुआ तो देश की जनता का क्या होगा। मेरे कहने का मतलब ये नही है कि मैं कोइ नयी बातें आपके सामने रख रहा हूं ।, मेरी मां पढी लिखी नही है  । रामायन और महाभारत देखा करती थी टीवी पर । मैं जब पिछली बार घर गया था तो मेरी मां कहने लगी कि बेटा तुम यही काम दिल्ली में करते हो , बडी शरम आती है , उ राखी हमको मिल जाये तो ससुरी का नाक तोड दे हम। कहने का अर्थ ये है कि हम बाज़ार वाद के गिरफ़्त में है तो क्या जो समाचार पत्र या समाचारों की एक बेसीक परिधी है उसे लांघ जाये , तो फिर जनतंत्र के चौथे खंबे कहे जाने का हक हमें नही मिलना चाहिये.&lt;br /&gt;..........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-2648905074221121057?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/2648905074221121057/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=2648905074221121057' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2648905074221121057'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/2648905074221121057'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2008/02/blog-post.html' title='खबरिया चैनल और हमारा समाज'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-1020591101658365158</id><published>2007-12-28T03:13:00.000-08:00</published><updated>2008-01-03T06:01:06.702-08:00</updated><title type='text'>सात रुपये में south</title><content type='html'>सोंच रहे होंगे कि इस आर्टिकल का टाइटल रेहडी वाले उस दूकान्दार की आवाज़ की तरह है जो अपने माल को बेचने के लिये ग्राहकों से इसतरह की जुमलेबाजी किया करता है. लेकिन जिस अध्याय को मैं आपके बीच रख रहा हूं , उसे मैं प्रकाशित करना चाहता था , लेकिन भला मेरे जैसे दो कौडी के पत्रकार को भला कौन गंभीरता से लेता. अब सोच रहा हूं कि इस ब्लाग लेखन में भला कौन सा पैसा लग रहा है .&lt;br /&gt;दरअसल बचपन से पढाइ लिखाइ में ठीक ठाक था. स्कूली जीवन में ही मेरे दो चार ऐसे प्रिय दोस्त हो गये जो पैसे बाले थे . मेरे पिताजी बिहार सरकार में आफ़ीसर तो थे लेकिन एक तो घोर कमुनिष्ट उपर से इमानदारी का भी नशा.&lt;br /&gt;छ: भाइ बहन थे इसलिये आभाव तो परिवार में हमेशा बना रहा. खैर मैं बात कर रहा था अपने अमीर मित्रों की.कभी कभार स्कूल के दिनों में घर में कोइ मेहमान आ गया तो पांच दस रुपये दे गया बस मत पूछिये दो चार दिन तो बल्ले बल्ले हो जाती थी. लेकिन मेरे उन अमीर मित्रों के लिये ५ या १० रुपये कोइ खास मायने नहीं रखते थे. आज भी बो मेरे बचपन के दोस्त मेरे साथ उसी तरह करीब है . लेकिन रोज़ी रोटी के चक्कर में हम सब जुदा जुदा है.&lt;br /&gt;१२ वीं के बाद एक दोस्त पैसे वाल था डोनेशन के बल पर बैंगलोर चला गया इंजीनीयरींग पढने , उसने कहा तुम भी चल मेरे साथ महज ७० हज़ार ही तो लग रहे रहें हैं. मैं अपने पिताजी के पास गया और कहा कि ७० हजार दे दिजिये मैं बैंगलोर जाउंगा इंजीनीयरींग की पढाई करने. पैसे कहां थे उनके पास उन्होने इनकार कर दिया. दोस्त तो चला गया लेकिन बहुत याद आता था , जब जब वो छुट्टीयों में घर आये तो कहे कि चल बैंगलोर. एक बार अपने पिताजी को राजी कर लिया कि वहां जाकर दो महीने का कम्प्युटर का कोर्स करना चाहता हूं बहां मेरे दोस्त ने एडमिशन करा दिया है रेहने खाने की भी समस्या नही है. किसी तरह मैने अपने पिताजी को राजी कर लिया.&lt;br /&gt;खैर पिताजी राज़ी हो गये । चल पडा बनग्लोर । वहां पहुंचा , अक्सर मेरा दोस्त कालेज चला जाता और मैं इधर उधर घूमा करता ।वहां पढनेवाले अधिकांशत: लडके बिहार के थे । किसी के बाप ने अपना खेत बेचकर बेटे के लिये लिये डोनेशन फ़ी का इन्तेजाम किया था तो कुछ ने महाजन से कर्ज़ लेकर&lt;br /&gt;बेटे को इन्जीनियर बनाने के लिये यहां भेजा था। महीने की पांचवी तारीख तक अमुमन सबके पैसे घर से आ जाते थे । मेरे अपने दोस्त के अलावे अब तक कई और दोस्त बन गये थे। आलोक भाई चलो आपको ऐश कराते है। विनय भाई, गुलीन सर , गोपाल ये कुछ ऐसे महान लोग थे जिनकी दिल्चस्पी पढाई के अलावा और कई महत्वपुर्ण कार्यो से भी थी । उसमें गुलीन  सर तो लगभग १० सालों से अपनी पढाई पूरी नही कर पाये थे। हमें इन लोगों ने पहले एक महंगे रेस्टारेन्ट में खाना और बीयर पिलाया। हम लोग अब रूख कर चुके थे रेस्कोर्से की तरफ़ । यहां की तो दुनिया ही निराली थी । घोडे और घुडसावारों के अलावा बडे बडे लोग जो दांव लगाने के लिये यहां आये थे सब के सब सिरीयस।&lt;br /&gt;१० घुडसवार एक साथ दौडे , असलम कादर अपने घोडे चेतक पर उसी तरह पेसी स्राफ़ और भी कइ।&lt;br /&gt;ज्यादा दांव तो असलम कादर पर था , अरे यह क्या ? घोषणा हुई कि पेसी स्राफ़ जीत गया। मेरे सारे दोस्तों ने असलम कादर पर दांव लगाया था। सब निराश हो गये । मैंने कहा कि भाई मेरे हिसाब से तो असलम कादर ही जीता है। हालांकि मामला नज़दीकी था। मैने भी एक टिकट असलम कादर के नाम लिया था। सब अपना टिकट फ़ाडने लगे। मैने कहा रूक जाइये मैं चैलेंज करूंगा। &lt;span class=""&gt;मैंने चैलेंज कर&lt;/span&gt; दिया , फोटो फ़िनीश हुआ । असलम कादर जीत गया । दरअसल जो पूर्व विजेता था उसके घोडे की टांग ने टच  लाइन  को पहले क्रास किया था , असलम कादर के घोडे के मुंह ने पहले टच लाइन क्रास किया , इसलिये नियमत: असलम कादर को विजेता घोषित कर दिया गया। अब तो मेरा भांव बढ गया , अब तो धीरे धीरे मैं बुकी हो गया। रेस्कोर्स , घोडा , और घुड्सवारों से संबंधित साहित्य का अध्यन करने लगा। कौन से घोडे पे किस घुडसवार ने कहां कहां बाज़ी मारी पूरे रिकार्ड का पुलिंदा अब मेरे पास था । सबेरे मैं आँखे मलता ही रह्ता था कि धमक पडते थे गुलीन सर साथ में उनकी फ़ौज़।&lt;br /&gt;आब मैं रेस्कोर्स साइंस का बहुत बडा जानकार हो चुका था। पूरा दिन रेस्कोर्स में ही कटने लगा ।शाम में पार्टी और देर रात को घर आना । मेरा दोस्त बहुत दिन से मेरी दिनचर्या देख रहा था, उसने एक दिन कहा कि आलोक तुम गलत रास्ते पे गलत लोगों के साथ जा रहे हो , अपनी आदतों से बाज़ आओ वरना मैं तुम्हारे पिताजी से कह दूंगा। मुझ पर असर कहां पडने वाला था , चस्का लग चुका था।&lt;br /&gt;आखिर एक दिन मेरे दोस्त ने मेरे पिताजी से मेरी शिकायत कर दी। मुझें तुरंत लौट जाने का आदेश मिला। बहुत भारी मन से मुझें वापस लौटना पडा । अपने उन घोडे वाले दोस्तों को छोडने का गम आज भी है।&lt;br /&gt;( जारी है )&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-1020591101658365158?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/1020591101658365158/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=1020591101658365158' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1020591101658365158'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/1020591101658365158'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2007/12/blog-post_7751.html' title='सात रुपये में south'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-3867323052778301925</id><published>2007-12-28T00:27:00.000-08:00</published><updated>2007-12-28T03:09:02.412-08:00</updated><title type='text'>मैं कवि बन गया</title><content type='html'>बात सन १९९० की है , मैं बारह्बीं क्लास में पढता था . एक बार मेरे कस्बे में एक बडा मुशायरा होने वाला था. मैं लिखता रह्ता था लेकीन मंचिय कवि का दर्जा नही प्राप्त कर पाया था. मैने आनन फ़ानन में एक कविता लिखी और आयोजक के पास गया , आयोजक शहर का एक धनाढ्य व्यक्ति था. उसने मेरी&lt;br /&gt;कविता को देखा और बोला कि पागल यही कविता है ? कविता का मतलब फ़ूल पौधा , पहाड , जंगल होता है , उसने मेरी कविता को फ़ेंक दी. मैने हार नही मानी , मुशायरा शुरु हो चुका था , मैं भी कवियों की तरह शाल ओढ्कर , मुंह छुपाकर मंच पर बैठ गया . मैने सोंचा कि मेरी बारी कैसे आयेगी , मैने दूसरे आदमी से एक पुर्जे पर अपना नाम लिखा आलोक मसौढ्वीं , साहिर लुध्यान्वी , औए काका हाथरसी की तरह , पुर्जा मंच के सदर के पास पहुंच गया. सदर मेरे पिता थे. खैर उन्हें पता नही चला कि उन्का ही बेटा आलोक मसौढ्वीं है . मेरी बारी आ गयी , मैने सोचा कि मत चूको चौहान . फिर मैने शुरु की अपनी कविता और पिताजी के डर से एक सांस में ही पूरी कवीता पढ गया . अरे यह क्या ? लोग तालियां बजा रहे थे और बे बोले वंस मोर , जिसने मेरी कविता को रिजेक्ट कर दिया था वो कह रहा था वाह यह लडका तो शुरु से ही प्रतिभाशाली था.&lt;br /&gt;आप ये मत सोचीये कि मैं अपने मुंह मियां मिठु बन रहा हुं . सन ९० में अमेरिका ने इराक पर हमला बोला था , और हमारी सरकार देश कि हर समस्या को खाडी युद्ध से जोडकर देख रही थी . बहुत ज्यादा आपका दिमाग खा गया पेश है आपके सामने वही कविता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तुम देश में जमाखोरों को प्रश्र्य देते हो&lt;br /&gt;और फ़िर खाडी संकट का रोना रोते हो ?&lt;br /&gt;एक कहावत थी कि तेल नही तेल की धार देखो&lt;br /&gt;लेकीन अब न तेल मिलेगी और ना ही उसकी धार&lt;br /&gt;बच जायेगी बस लुटेरों की बंदरबांट.&lt;br /&gt;मंत्री जी की कार डकार रही है पेट्रोल के उन्माद से&lt;br /&gt;मगर गांव की बुधीया जला रही है लौ अपने आंसुओं के उफ़ान से.&lt;br /&gt;बुधीया कह्ती है कि खाडी का और मेरे गांब का संकट एक है.&lt;br /&gt;क्यूंकि वहां कुवैत सद्दामो के द्वारा और यहां गांब पंचायतों के द्वारा लूटे जाते है.&lt;br /&gt;मैंने कहा जब कुवैत को बचाने बुश आ सकते है तो गांब को बचानेवाला कोइ नही ?&lt;br /&gt;उसने कहा यहां बुश का नही बल्कि घूस का राज है .&lt;br /&gt;मैं अचंभित रह गया उसके जबाब से और सोंचा इस देश को भगवान भी नही बचा सकता अप्ने पुन्य प्रताप से .&lt;br /&gt;( समाप्त)&lt;br /&gt;कवि बननेलायक कविता थी या नही आप बताइयेगा . शुक्रिया&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-3867323052778301925?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/3867323052778301925/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=3867323052778301925' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3867323052778301925'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/3867323052778301925'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2007/12/blog-post_28.html' title='मैं कवि बन गया'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-7994630363186643082</id><published>2007-12-25T04:31:00.000-08:00</published><updated>2007-12-25T05:01:12.944-08:00</updated><title type='text'>क्या होगा इन्डिया का कन्गारुओं के देश में</title><content type='html'>क्रिकेट फ़ीवर एक बार फ़िर दिवानों के रग रग में बस गया है. ट्वेन्टी ट्वेन्टी में अप्रत्यषित सफ़लता के बाद टीम इन्डीया उत्साह से लबरेज है.मुझे याद है कि सन १९८० का वो दौरा जब भारत ने  एक मैच हारकर  लीली और पास्को के तूफ़ान को किस तरह धाराशायी कर दिया था . एडीलेड टेस्ट में तो सन्दीप पाटील और यश्पाल शर्मा की जोडी ने तो मानो कन्गारुओं के आक्रमण की धज्जियां उदा दी थी. पाटील के १७४ रनों को आज भी कंगारु भुलाये नही भुलते. टेस्ट ड्रां हो गया. और अगले टेस्ट मेल्बोर्न मे़ कंगारुओ की पारी को ८५ रनों पर समेट कर भारत ने समेत कर ऐतेहासिक जीत दर्ज की थी. सीरीज बराबरी पर समाप्त हो गया. कुछ वैसा ही पिछ्ले दौरे मे हुआ . सेहवाग , गांगुली , सचिन , कुम्ब्ले , आदि के बेह्तरीन प्रदर्शन के बदौलत भारत ने एक बार फिर सिरिज बराबर करने में सफ़लता पाइ. इस बार फिर सारे क्रिकेट जगत की निगाह मौजुदा सीरिज पर लगी है . अगर भारत ने कंगारुओं पर अपनी बादशाहत कायम कर ली तो कंगारुओं की राजशाही पर  बिश्व क्रिकेट जगत में संशय अवश्य हो जायेगा. भारत को हर हाल में आक्रामक होना पडेगा चाहे बल्लेबाजी की बात हो या गेंदबाजी की या फ़िल्डिन्ग की .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-7994630363186643082?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/7994630363186643082/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=7994630363186643082' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7994630363186643082'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7994630363186643082'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2007/12/blog-post.html' title='क्या होगा इन्डिया का कन्गारुओं के देश में'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-9035391202017366099.post-7459810894548906082</id><published>2007-07-16T03:19:00.000-07:00</published><updated>2008-04-13T01:06:25.615-07:00</updated><title type='text'>६ दिसंबर भारत के इतिहास की काली तारीख</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SAG-0zG4LhI/AAAAAAAAAA4/y0ALazQQAgo/s1600-h/delhi1[1].jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5188638059989052946" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SAG-0zG4LhI/AAAAAAAAAA4/y0ALazQQAgo/s320/delhi1%5B1%5D.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;तारीख ६ दिसंबर सन १९९२ , धीरे धीरे मैं अपने कस्बे और ज़िले में कवि और रंगकर्मी बन गया था. इस काली तारीख से काफ़ी दिन पेहले से ही हमलोग सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ़ हल्ला बोल रहे थे. बाबरी मस्ज़िद और मंदिर की आड मे़ लोग आम आदमी के खून मे़ ज़हर घोलना चाह रहे थे . हमलोगो की नुक्कड टीम सबसे सस्ता गोश्त , और असगर बज़ाहत के लिखित नाटकों का प्रदर्शन करके जनता को आगाह कर रही थी , लेकिन ना बाबरी मस्ज़िद बची और ना ही उसके बाद निर्दोषों की जान . बस मेरे कलम ने जन्म दिया मेरी ब्यथा को इस साधारन से गज़ल के रूप में , जो आपके सामने पेश है.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;सौ घर जला कर एक बनाया आशियां &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;हम जल रहें है उनके घर शहनाइयां , सौ घर जला कर .......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;सो गया है ये शहर किस निंद में...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;है ये कैसी भागती परछाइयां... हम जल रहें है...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;आदमी अब आदमीयत छोडकर ..&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कत्ल कर के ले रहा अंगडाइया....हम जल रहें है...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;रौशनी की आस भी धुंधला गइ ..&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;दे रही दिल को सुकूं पूरवाइयां ..हम जल रहें है...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;(समाप्त)&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9035391202017366099-7459810894548906082?l=confusionhai.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://confusionhai.blogspot.com/feeds/7459810894548906082/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=9035391202017366099&amp;postID=7459810894548906082' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7459810894548906082'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/9035391202017366099/posts/default/7459810894548906082'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://confusionhai.blogspot.com/2007/07/blog-post.html' title='६ दिसंबर भारत के इतिहास की काली तारीख'/><author><name>कुमार आलोक</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05450754013929589504</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='23' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SxjqLCd3EVI/AAAAAAAAAG8/_fausNB6m4w/S220/IMG_0739.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_BGmNWqDdrEw/SAG-0zG4LhI/AAAAAAAAAA4/y0ALazQQAgo/s72-c/delhi1%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry></feed>
